परमेश्वर की सबसे सफल असफलता

December 16, 2025

परमेश्वर की सबसे सफल असफलता

इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया और उसको वह नाम प्रदान किया जो सब नामों में श्रेष्ठ है, कि यीशु के नाम पर प्रत्येक घुटना टिके, चाहे वह स्वर्ग में हो या पृथ्वी पर या पृथ्वी के नीचे, और परमेश्वर पिता की महिमा के लिए प्रत्येक जीभ अंगीकार करे कि यीशु मसीह ही प्रभु है। (फिलिप्पियों 2:9–11)

क्रिसमस परमेश्वर की सबसे सफल असफलता के आरम्भ को चिह्नित करता है। उसे पराजित प्रतीत होने वाली परिस्थिति के द्वारा अपनी सामर्थ्य को प्रदर्शित करने में सदा आनन्द प्राप्त होता है। वह युक्‍तिपूर्ण विजय प्राप्त करने के लिए सुनियोजित रीति से पीछे हटता है।

पुराने नियम में, यूसुफ, जो याकूब के बारह पुत्रों में से एक था, उससे स्वप्न में महिमा और सामर्थ्य प्राप्ति की प्रतिज्ञा की गयी थी (उत्पत्ति 37:5-11)। परन्तु उस विजय को प्राप्त करने के लिए उसे मिस्र में दास बनना पड़ा। और, जैसे कि यह पर्याप्त नहीं था, जब उसकी स्थिति में उसकी खराई के कारण सुधार हुआ, तो उसे दास से भी निकृष्ट बना दिया गया: अर्थात एक बन्दी।

परन्तु यह सब योजना के अन्तर्गत था। परमेश्वर द्वारा बनाई गई योजना उसके स्वयं और उसके परिवार के भले और अन्ततः सम्पूर्ण जगत के भले के लिए! क्योंकि वहाँ कारागार में वह फिरौन के प्याऊ से मिला, जो अन्ततः उसे फिरौन के पास ले आया, जिसने उसे मिस्र पर अधिकारी नियुक्त कर दिया। और अन्ततः, उसका स्वप्न सच हो गया। उसके भाई उसके सामने झुक गए, और उसने उन्हें भुखमरी से बचाया। महिमा प्राप्ति के लिए यह कितना असम्भावित मार्ग है।

परन्तु यह परमेश्वर की रीति है—यहाँ तक ​​कि उसके पुत्र के लिए भी। उसने अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया कि दास का स्वरूप धारण कर लिया। एक दास से भी निकृष्ठ—अर्थात एक बन्दी—और उसे घात किया गया। परन्तु यूसुफ के समान, उसने अपनी खराई बनाए रखी। “इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया और उसको वह नाम प्रदान किया जो सब नामों में श्रेष्ठ है, कि यीशु के नाम पर प्रत्येक घुटना टिके , चाहे वह स्वर्ग में हो या पृथ्वी पर या पृथ्वी के नीचे” (फिलिप्पियों 2:9-10)।

और हमारे लिए भी परमेश्वर का मार्ग यही है। हमें महिमा की प्रतिज्ञा दी गयी है—जैसा कि रोमियों 8:17 में कहा गया है यदि हम उसके साथ दु:ख उठाएंगे। तो ऊपर जाने का मार्ग नीचे की ओर से जाता है। तथा आगे जाने का मार्ग पीछे की ओर से जाता है। सफलता का मार्ग परमेश्वरीय रीति से नियुक्त असफलताओं के माध्यम से ही है। वे सदा विफलता के समान दिखेंगे और प्रतीत होंगे।

परन्तु यदि यूसुफ और यीशु हमें इस क्रिसमस किसी बात की शिक्षा देते हैं, तो वह यह है: शैतान और पापी लोगों ने जिसके द्वारा बुराई करने की ठानी थी, “परमेश्वर ने उसी को भलाई के लिए ले लिया!” (उत्पत्ति 50:20)।

भयभीत सन्तो, नया साहस लो
जिन घटाओं से तुम भयभीत हो
वे करुणा से भरे हैं और खूब बरसेंगे
तुम्हारे सिर पर आशीषों के जैसे।4


4 विलियम कूपर, “परमेश्वर रहस्यमय रीति से कार्य करता है,” 1773।

साझा करें
जॉन पाइपर
जॉन पाइपर

जॉन पाइपर (@जॉन पाइपर) desiringGod.org के संस्थापक और शिक्षक हैं और बेथलेहम कॉलेज और सेमिनरी के चाँसलर हैं। 33 वर्षों तक, उन्होंने बेथलहम बैपटिस्ट चर्च, मिनियापोलिस, मिनेसोटा में एक पास्टर के रूप में सेवा की। वह 50 से अधिक पुस्तकों के लेखक हैं, जिसमें डिज़ायरिंग गॉड: मेडिटेशन ऑफ ए क्रिश्चियन हेडोनिस्ट और हाल ही में प्रोविडेन्स सम्मिलित हैं।

Articles: 407

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  1. परमेश्वर की सबसे सफल असफलता (Current)

    जॉन पाइपर | December 16, 2025
  2. मृत्यु का पूर्वाभ्यास (Rehearsal)

    जॉन पाइपर | December 31, 2025
  3. तैयार और सशक्त किए गए

    जॉन पाइपर | December 30, 2025
  4. एक भयानक गन्तव्य

    जॉन पाइपर | December 29, 2025
  5. महिमा ही लक्ष्य है

    जॉन पाइपर | December 28, 2025
  6. आपका लक्ष्य क्या है?

    जॉन पाइपर | December 27, 2025
  7. आपदा के विषय में कैसे विचार करें

    जॉन पाइपर | December 26, 2025
  8. क्रिसमस के तीन उपहार

    जॉन पाइपर | December 25, 2025
  9. क्रिसमस के दो उद्देश्य

    जॉन पाइपर | December 24, 2025
  10. परमेश्वर का अवर्णनीय उपहार

    जॉन पाइपर | December 23, 2025
  11. कि तुम विश्वास करो

    जॉन पाइपर | December 22, 2025