कलवरी के लिए प्रत्येक पग प्रेम से भरा हुआ था
<a href="" >जॉन पाइपर द्वारा भक्तिमय अध्ययन</a>

संस्थापक और शिक्षक, desiringGod.org

हम प्रेम को इसी से जानते हैं, कि उसने हमारे लिए अपना प्राण दे दिया। (1 यूहन्ना 3:16)

ख्रीष्ट का प्रेम उसकी मृत्यु में हमारे लिए उतना ही सचेत था, जितना कि उसने हमारे लिए साभिप्राय पीड़ा उठायी थी। उसने साभिप्राय अपना प्राण दिया था, और यह उसने केवल हमारे लिए किया था। और यह उसका प्रेम था। 

“यीशु ने यह जानकर कि मेरी घड़ी आ पहुँची है कि मैं जगत को छोड़ कर पिता के पास जाऊँ, तो अपनों से जो संसार में थे जैसा प्रेम करता आया था उन से अन्त तक वैसा ही प्रेम किया” (यूहन्ना 13:1)। 

कलवरी के मार्ग पर उसके प्रत्येक पग का अर्थ था, “मैं तुम से प्रेम करता हूँ।” 

इसलिए, ख्रीष्ट के प्रेम को उसके जीवन देने में आभास करना, इस बात को देखने में सहायता करता है कि यह कार्य उसके द्वारा कितना साभिप्राय किया गया था। 

ध्यान दीजिए कि यीशु ने उस हिंसात्मक क्षण के तुरन्त बाद क्या कहा जब पतरस ने दास के सिर को काटने का प्रयास किया किन्तु केवल कान ही काट पाया था। 

तब यीशु ने उस से कहा, “अपनी तलवार म्यान में रख, क्योंकि जो तलवार उठाते हैं वे सब तलवार से नाश किए जाएँगे। क्या तू सोचता है कि मैं अपने पिता से विनती नहीं कर सकता? क्या वह तुरन्त ही बारह सेनाओं से अधिक स्वर्गदूतों को मुझे नहीं सौंप सकता? परन्तु तब पवित्रशास्त्र का लेख कैसे पूरा होगा कि ऐसा ही होना अवश्य है?” (मत्ती 26:52-54)

यह कहना एक बात है कि पुराने नियम में यीशु की मृत्यु के सम्बन्ध में विस्तृत बातों की भविष्यवाणी की गई थी। परन्तु यह कहना और भी अधिक महत्वपूर्ण बात है कि यीशु स्वयं इस बात को पूरी होते हुए देखने के लिए सटीक निर्णयों को ले रहे थे कि पवित्रशास्त्र के लेख पूरे हों। 

मत्ती 26:54 में यीशु ने यही बात कही थी। “मैं इस क्लेश से बच सकता हूँ, परन्तु तब कैसे पवित्रशास्त्र का लेख पूरा होगा कि ऐसा होना अवश्य है?”

दूसरे शब्दों में, मैं बचने हेतु उस मार्ग को नहीं चुन रहा हूँ जिसे मैं ले सकता हूँ, क्योंकि मैं तो पवित्रशास्त्र को जानता हूँ। मैं जानता हूँ कि मेरे लोगों के उद्धार के लिए क्या किया जाना अवश्य है। परमेश्वर के वचन में मेरे विषय में भविष्यवाणी की गई थी, उसे पूरा करना मेरा चुनाव है। यह मेरा चुनाव है कि – प्रत्येक पग में – मैं अपने लोगों से अत्यधिक प्रेम करूँगा। और मैं चाहता हूँ कि वे इस प्रेम का अनुभव करें। और सम्पूर्णता से सुरक्षित और स्वतन्त्र रहें और पूरी रीति से इस संसार से पृथक जीवन जीएँ।

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