क्षमा करने के विषय में बाइबल क्या कहती है? 

अपने ख्रीष्टीय जीवन में, हम यीशु ख्रीष्ट में अपने पापों की क्षमा हेतु धन्यवादी होते हैं और प्रतिदिन के पापों की क्षमा भी माँगते हैं। परन्तु हमारे प्रति जब अन्य लोग पाप करते हैं, तो हम उनको क्षमा करने में कम पाए जाते हैं। कई बार हम प्रतिशोध लेना चाहते हैं, क्रोधित होते हैं और उन्हें क्षमा नहीं कर पाते हैं। प्रायः लोग क्षमा करने को निर्बलता के साथ जोड़कर देखते हैं। आइए हम बाइबल में क्षमा के विषय में 3 बातों को देखें –

1. क्षमा करना मेल-मिलाप का आधार है – उत्पत्ति 50:15-21 में हम यूसुफ का उसके भाइयों के साथ मेल-मिलाप की घटना को देखते हैं। वह अपने भाइयों के बुराई और पापों का प्रतिशोध नहीं लेता है। वह उन्हें क्षमा करता है और उनसे कोमलता से बातें करता है। एक समय हम भी अपने पापों में मरे हुए थे और परमेश्वर से दूर थे। परन्तु यीशु ने हमारे पापों को क्षमा किया, हमारा मध्यस्थ बना, हमारा मेल पिता से करा दिया और हमें उसका सन्तान बना दिया (इफिसियों 2:1, 1 तीमुथियुस 2:5, रोमियों 5:10, यूहन्ना 1:12)।  

2. क्षमा करना एक निर्देश है – मत्ती 6:14, इफिसियों 4:32 में दूसरों को क्षमा करने हेतु निर्देश दिया गया है। क्योंकि हमें ख्रीष्ट में पापों की क्षमा मिली है (इफिसियों 1:7), इसलिए हमें भी दूसरों को क्षमा करना होगा। हमने पापों की क्षमा पाई है, इसलिए हम अन्य लोगों के प्रति शब्दों और व्यवहार में क्रोध नहीं दिखा सकते। ये कठिन है और इसलिए हम प्रार्थना करें कि परमेश्वर हमें दूसरों को क्षमा करने हेतु सहायता करे।    

3. क्षमा करने का सर्वश्रेष्ठ आदर्श यीशु ख्रीष्ट है –  क्रूस पर यीशु क्षमा करने का आदर्श बना (लूका 23:34)। उसके साथ लोगों ने अन्याय और दुर्व्यवहार किया और उसे क्रूस पर चढ़ा दिया। वह अत्यन्त शारीरिक पीड़ा में था और लोग वहाँ खड़े होकर उसकी निन्दा कर रहे थे। परन्तु यीशु की प्रतिक्रिया उनके प्रति क्रोध या प्रतिशोध का नहीं थी। इसके विपरीत, वो उनके पापों की क्षमा के लिए पिता से प्रार्थना कर रहा था। इसलिए वह हमसे भी अपेक्षा करता है कि हम अपने शत्रुओं को क्षमा करें।    

अतः क्षमा करने के द्वारा हम दूसरों से छोटे नहीं बन जाते हैं, परन्तु ऐसा करना परमेश्वर को भाता है। जब हम इस बात से आनन्दित होंगे कि परमेश्वर ने हमारे असंख्य पापों को क्षमा कर दिया है, तो हम अन्य लोगों को प्रेम में होकर क्षमा कर पाएँगे।   

साझा करें
मोनीष मित्रा
मोनीष मित्रा

परमेश्वर के वचन का अध्ययन करते हैं और मार्ग सत्य जीवन के साथ सेवा करते हैं।

Articles: 37