परिचययदि ख्रीष्टीय लोगों से कलीसिया का विवरण पूछा जाए, तो अधिकांश लोग आराधना, वचन का प्रचार, दान, प्रभु भोज इत्यादि जैसे विषय पर महत्व देते हुए कलीसिया का विवरण देंगे।...
जब हम सुसमाचार के विषय में बात करते हैं तो हमें दो बातों पर विचार करना चाहिए कि बाइबल पर आधारित सुसमाचार क्या है और क्या नहीं हैं?- इसका अर्थ...
साधारण अर्थ में, बाइबल 66 किताबों का संग्रह है जिसे हम परमेश्वर के द्वारा प्रेरित मानते हैं। इसका अर्थ यह है कि इन पुस्तकों के लेखकों ने अपनी व्यक्तिगत विचारधारा...
ख्रीष्टीय विश्वास के जीवन में यीशु का पुनरुत्थान सबसे महत्वपूर्ण भाग है। प्रेरित पौलुस पुनरुत्थान के सन्दर्भ में लिखता है कि यीशु के पुनरुत्थान के बिना हमारा विश्वास व्यर्थ है...
प्रायः कुछ लोग क्रूसीकरण के दिन को एक विलाप के दिन के रूप में देखते हैं। इस अवसर पर विभिन्न समाचार पत्रों में यह लिखा जाता है कि यीशु ख्रीष्ट...
हमारी प्रार्थनाओं को परमेश्वर की इच्छा और सुसमाचार से प्रेरित होना चाहिए। ऐसी प्रार्थना सबसे अधिक परमेश्वर को महिमा देती है। हमने इससे पहले वाले लेख में देखा था कि...
पास्टर होने के नाते  “उत्तरदायी होना” शब्द, प्रायः हमारे जीवन और सेवकाई में बहुत असहज और अनावश्यक लगता है। हमें स्वतंत्र होना प्रिय लगता है अर्थात् अनु-उत्तरदायी होना प्रिय लगता...
मसीह जीवन में प्रार्थना का एक बड़ा महत्व है। हम सभी इस बात पर विश्वास करते हैं कि हमें हर दिन प्रार्थना करनी चाहिए और बाइबल भी यह शिक्षा देती...
उसके कोड़े खाने से हम चंगे हुए  (यशायाह 53:5); उसके घावों से तुम स्वस्थ हुए हो  (1 पतरस 2:24)। कई बार हम बाइबल के बहुत से पदों व खण्डों को...
“आओ, हम और कहीं आस-पास की बस्तियों में जाएं, कि मैं वहां भी प्रचार कर सकूं; क्योंकि मैं इसीलिए निकला हूँ ” (मरकुस 1:38)। यीशु के ये शब्द हमें उसकी...