परमेश्वर हमारी मृत्यु निर्धारित करता है

प्रत्येक वस्तु जो सृजी गई है वह एक दिन समाप्त हो जाएगी। प्रत्येक व्यक्ति जो इस संसार में जन्मा है, वह एक दिन अवश्य मरेगा। इस सत्य को हम सब जानते हैं। किन्तु प्राय: जब हम अपने माता-पिता, भाई-बहन, मित्र, सहकर्मी, रिश्तेदार, कलीसिया के लोगों के आकस्मिक मृत्यु के विषय में सुनते हैं तो हम विभिन्न कारणों पर विचार करने लग जाते हैं! परन्तु एक महत्वपूर्ण सत्य प्राय: लोग उस समय भूल जाते हैं और ऐसी प्रतिक्रिया करते हैं जैसे कि परमेश्वर उस घटना से अनभिज्ञ था और परमेश्वर से हटकर यह दुखपूर्ण घटना घटित हुई!

ऐसी परिस्थितियो में हम ध्यान दें कि कैसे परमेश्वर के हाथों में हमारी मृत्यु है! कैसे हम इस बात को समझें कि परमेश्वर अपने लोगों को अपनी इच्छा में मरने देता है और वह ही है जो हमारी मृत्यु को निर्धारित करता है कि हम कहाँ, कब और कैसे मरेंगे!

एकमात्र परमेश्वर ही हमारी मृत्यु निर्धारित करता है क्योंकि उसी ने हमारा जन्म भी निर्धारित किया था।

हमारे अस्तित्व का आधार परमेश्वर है: संसार में जो कुछ भी होता है, वह परमेश्वर के नियन्त्रण में होता है। वह प्रत्येक समय, वस्तु तथा घटना पर प्रभुता करता है। प्रत्येक ख्रीष्टीय को यह जानना चाहिए कि उसकी मृत्यु का दिन उसका सबसे उत्तम दिन होने वाला है क्योंकि वह परमेश्वर के पास जा रहा है। हमारे अस्तित्व का स्रोत परमेश्वर है। हमारा जीवन परमेश्वर के हाथ में ही है। हम अपनी इच्छा से अचानक इस संसार में नहीं आ गए हैं वरन् परमेश्वर अपनी अनन्त योजना में हमें इस संसार में लाया है। वह परमेश्वर जीवनदाता है (1 तीमु 6:13) इसलिए परमेश्वर के पास हमारे जीवन पर अधिकार है। परमेश्वर हम सबको जीवन और श्वास प्रदान करता है (प्रेरित 17:25)।

स्मरण रखें, जीवन और मृत्यु परमेश्वर के हाथ में है, उसकी इच्छा के बिना कोई भी हमारा प्राण हमसे नहीं छीन सकता।

हमारी मृत्यु परमेश्वर की इच्छा द्वारा ही होगी: जिसने जीवन दिया है केवल उसी के पास अधिकार है कि वह अपनी इच्छा में जब चाहे हमारा जीवन वापस ले ले। परमेश्वर ही हमारी मृत्यु निर्धारित कर सकता है क्योंकि उसी ने हमारा जन्म भी निर्धारित किया था। बिमारी, दुर्घटना, शत्रु, शैतान हमारी मृत्यु को निर्धारित नहीं करते वरन् परमेश्वर हमारे मृत्यु के समय को नियुक्त करता है। हमारी मृत्यु परमेश्वर की इच्छा में होती है। उदाहरण के लिए- एक माँ के गर्भ में पल रहा बच्चा गर्भ में मर जाता है, एक विश्वासयोग्य परमेश्वर का सेवक भयंकर दुर्घटना में मर जाता है, एक भली विश्वासी महिला गम्भीर बीमारी से मर जाती है। एक ग़ैरमसीही पृष्ठभूमि से आया हुआ व्यक्ति लोगों द्वारा अपने विश्वास से न मुकरने के कारण मार दिया जाता है क्यों? इसे हम क्या कहेंगे? कि इन सबकी मृत्यु परमेश्वर के नियन्त्रण से बाहर थी? नहीं! ऐसा नहीं है कि बीमारी, दुर्घटना, शत्रु हम पर हावी हो जाते हैं इसीलिए हमारी मृत्यु होती है वरन् इसलिए क्योंकि परमेश्वर जब चाहता है तब अपनी इच्छा में अपने लोगों को अपनी उपस्थिति में बुला लेता है। ध्यान रखिए, परमेश्वर के सिवाय कोई ईश्वर नहीं है, वही मृत्यु और जीवन का देने वाला है (व्यवस्था 32:39)।

परमेश्वर ने जितना समय हमारे जीवन में नियुक्त किया है उतने समय तक ही हमारी साँसे चलेंगी, और अपने नियुक्त समय पर वह हमारा जीवन ले लेगा।

हमारी मृत्यु का समय परमेश्वर नियुक्त करता है। यदि वह नहीं चाहता तो लोग भले ही जानलेवा बीमारी से ग्रसित हो, चाहे शरीर दुर्घटना में कितना भी ज़ख्मी हो, चाहे मानसिक स्थिति कितनी भी खराब हो, चाहे सताव बार-बार हो रहा हो, चाहे जीवन दुखों से कितना भी भरा हो, हमारी साँसे चलती रहेंगी। जब तक प्रभु अपनी दया में हमें जीवित रखना चाहता है, तब तक हम जीवित रहेंगे भले ही हम जैसी भी परिस्थिति में हों! परमेश्वर के लोग इस बात को जानते हैं कि वे परमेश्वर के नियन्त्रण में हैं, इसलिए अय्यूब कहता है, “मैं अपनी माँ के गर्भ से नंगा निकला और नंगा ही चला जाऊँगा, यहोवा ने दिया और यहोवा ही ने लिया: यहोवा का नाम धन्य हो” (अय्यूब 1:21)। जो वर्ष, महीना, सप्ताह, दिन, समय उसने नियुक्त किया है हम उसी दिन मरेंगे न तो हम उससे पहले मरेंगे न ही नियुक्त समय से अधिक एक भी पल आगे जीवित रह सकते हैं।

यदि हम ख्रीष्ट में हैं तो हमें मृत्यु से घबराने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि हमारी मृत्यु से परमेश्वर महिमा पाता है, चाहे यह मृत्यु आज हो या किसी और समय में हो!

हमारी मृत्यु द्वारा परमेश्वर को महिमा मिलती है: प्रिय ख्रीष्टीयों, स्मरण रखें, परमेश्वर की इच्छा है तो हम अगले पल जीवित रहेंगे। यदि उसकी इच्छा है तो हम अपनी योजनाओं को पूरा करेंगे, पढ़ाई पूरी कर पाएंगे, विवाह कर पाएंगे, बच्चों को बढ़ते हुए देख पाएंगे, तथा अन्य बातों को होते हुए देख पाएंगे। यदि हम ख्रीष्ट में हैं तो हमें मृत्यु से घबराने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि हमारी मृत्यु से परमेश्वर महिमा पाता है, चाहे यह मृत्यु आज हो या किसी और समय में हो! यदि प्रभु की इच्छा होगी तब हम जीवित रहेंगे और जिस भी किसी कार्य की योजना” बनाते हैं, उसको कर पाएँगे (याकूब 4:13,15)।  

जब हम इस बात को समझ जाते हैं कि हम परमेश्वर की इच्छा से ही मरेंगे तब चाहे हमारे जीवन में कोई भी परिस्थिति हो, हम प्रभु पर भरोसा रखते हुए प्रत्येक परिस्थिति का सामना करते हैं। बड़ी से बड़ी बीमारी, दुख, सताव की स्थिति हमें भयभीत नहीं करती, कि हमारा क्या होगा, वरन् हम यह भरोसा रखते हैं, कि जब तक प्रभु ने जीवन दिया है, वह हमें बनाये रखेगा चाहे हम कितने भी टूट क्यों न जाएं! इसलिए परमेश्वर ने जब तक जीवन दिया है हम परमेश्वर के लिए जीवन जिये। हम मृत्यु से भयभीत न हों, वरन् जे.सी.राइल के इन वाक्यों को स्मरण रखें:-

“जब तक परमेश्वर अनुमति न दें, संसार की समस्त शक्तियाँ मेरे जीवन को नहीं ले सकती। जब परमेश्वर मुझे अपने पास बुलाएगा तब पृथ्वी के समस्त चिकित्सक भी इसको संरक्षित नहीं रख सकते।” (जॉन चार्ल्स राइल)

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