एकमात्र यीशु के द्वारा ही हम स्वर्ग जा सकते हैं।

यीशु ने उससे (दूसरे डाकू से) कहा, “मैं तुम से सच कहता हूँ कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा।” (लूका 23:43)

हम संसार में किसी भी व्यक्ति से स्वर्ग जाने के विषय में पूछे तो हम सबके पास भिन्न-भिन्न विचारधाराएँ हो सकती हैं। कोई कहेगा, कि यह कार्य करो, ऐसा करो, यहाँ जाओ, वहाँ पर दर्शन कर के आओ, अपने शरीर को यातना दो तथा विभिन्न प्रकार के मार्गों द्वारा ईश्वर को प्रसन्न कर सकते हैं। समाज में स्वर्ग जाने के कई मार्ग के विषय में लोग हमें बता सकते हैं। किन्तु कौन हमें वास्तव में स्वर्ग ले जा सकता है? आइये एक बाइबल में वर्णित एक महत्वपूर्ण घटना पर विचार करें।

सुसमाचार की पुस्तकें यीशु के कार्यों का वर्णन करते हैं। यीशु को यहूदा इस्करियोती, जो उसका शिष्य था, उसने तीस चाँदी के सिक्कों के लिए यीशु को पकड़वा दिया। उसके बाद यीशु पर झूठे आरोप लगाए गए, उस पर थूका गया, उसे पीटा गया, कोड़े लगाए गए, गालियाँ दी गई और क्रूस पर उसे दो अपराधियों के साथ चढ़ा दिया गया।

लूका 23:39-43 वर्णन करता है कि दो डाकू (राजद्रोही, कुकर्मी) यीशु के साथ क्रूस पर लटकाए गए थे, जो ऐसा प्रतीत होता है कि वे रोमी सरकार के विरूद्ध गम्भीर जुर्म, अपराध के कारण दण्ड भोग रहे थे; अन्यथा वे इतनी खतरनाक सज़ा के भागी नहीं होते। वे शर्मनाक, दर्दनाक एवं शापित मृत्यु का सामना करने वाले हैं। 

किन्तु यहाँ पर ध्यान देने वाली बात यहै है कि दो डाकू यीशु के साथ ही क्रूस पर लटकाए गए हैं। दोनो यीशु के साथ हैं, और जो कुछ भी हो रहा है, वे उन घटनाओं के आँखो देखी गवाह हैं। किन्तु दोनो के मृत्यु से पहले उनके प्रतिउत्तर में अन्तर है। एक डाकू यीशु की निन्दा करता है, जो उसकी भ्रष्टता और उसके जीवन में परमेश्वर का भय न होने को दर्शाता है। परन्तु दूसरा डाकू परमेश्वर के भय की बात करता है, वह इस बात को मान रहा है कि वे लोग सही निर्णय के आधार पर दण्ड पा रहे हैं। उन्होंने ऐसे कार्य किये हैं कि वे क्रूस पर चढ़ाये जाकर मारे जाएं। दूसरा डाकू यह समझ गया कि वह अपराधी था, और वह यीशु उसकी सहायता कर सकता था। और इसलिए वह दया की चाह रखते हुए याचना करता है और अपने विश्वास का सुन्दर अभिव्यक्ति करता है, वह कहता है “ हे यीशु, जब तू अपने राज्य में आए (प्रवेश करे) तो मुझे स्मरण करना!”

यीशु ख्रीष्ट उससे बहूमूल्य प्रतिज्ञा करते हैं, “मैं तुम से सच कहता हूँ आज ही, तू मेरे साथ, स्वर्गलोक में होगा” यह अपराधी दया की विनती करता है, कि जब यीशु अपने राज्य में आए तब के लिए, किन्तु यीशु उससे प्रतिज्ञा करते हैं, कि उसी दिन वह उसके साथ स्वर्ग में प्रवेश करेगा।  

क्रूस पर लटका डाकू यीशु ख्रीष्ट के कारण मृत्यु से जीवन की ओर जा रहा है। 

उस अपराधी के लिए अनन्त काल के गन्त्व्य को बदल देने वाली घटना थी। (यह उसके जीवन का टर्निग प्वान्ट था) वह वास्तव में एक भ्रष्ट व्यक्ति था, वह वहाँ के सरकार द्वारा बन्दी बनाया गया था, वह अपने अपराध के कारण पीटा गया, और क्रूस पर कीलों से ठोककर लटका दिया गया था। लेकिन यहाँ, उसके दुख भरे जीवन, अशान्त, आशारहित, नर्क के गन्तव्य की ओर जा रहा व्यक्ति यीशु के कारण स्वर्ग में जा रहा है। वह क्रूस पर लटका डाकू यीशु ख्रीष्ट के कारण मृत्यु से जीवन की ओर जा रहा है। 

जब यीशु यह कहते हैं कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा इसका अर्थ है कि वे दोनो मरेंगे और दोनो एक साथ स्वर्ग में प्रवेश करेंगे। मरने के बाद डाकू को जीवन मृत्यु के चक्र में बार-बार घूमते हुए जन्म लेना नहीं है। या तो मृत्यु के बाद हम परमेश्वर की उपस्थिति में होंगे या उसकी अनुपस्थिति में नहीं होंगे। दूसरा कुछ विचार यह होता है कि मरने के बाद हमें अवसर होता है जहाँ हम अपने पापों का दण्ड भोगकर स्वर्ग के लिए शुद्धिकरण की प्रक्रिया को पूरी करने के बाद स्वर्ग में प्रवेश कर सकते हैं। परन्तु यीशु सब प्रकार के गलत विचारधाराओं को यह कहने के द्वारा ध्वस्त कर दे रहे हैं जब वह यह वाणी कहते हैं।  

यह डाकू हमेशा- हमेशा के लिए यीशु के साथ रहने के लिए जा रहा है, और यीशु के साथ रहना स्वर्ग को प्रकट करता है। स्वर्ग को सबसे अद्भुत बनाती है, वह है यीशु की उपस्थिति। यह स्वर्ग इसलिए नहीं है क्योंकि वहाँ पर करने और देखने के लिए बहुत कुछ बढ़िया होगा। यह स्वर्ग इसलिए भी नहीं है क्योंकि वहाँ पर आपकी और हमारी समस्याएं, दुख पीछे इस पृथ्वी पर छूट जाएंगे। यह स्वर्ग इसलिए हैं क्योंकि यहाँ परमेश्वर स्वयं है। यही हम विश्वासी की आशा है। हम और आप यीशु के साथ होंगे (फिलिप्पियों 1:23 “…मेरी लालसा तो यह है कि कूच करके मसीह के पास जा रहूं, क्योंकि यह अति उत्तम है।”, 2 कुरि 5:8 “हम प्रभु के साथ रहना उत्तम समझते हैं”)। यीशु स्वर्ग की आशा है। यीशु वह प्रतिज्ञा है, जो हमें मिलेगा। वह हमारा पुरस्कार है। 

उत्पत्ति में पाप के कारण मनुष्य अदन की वाटिका, पवित्र परमेश्वर की उपस्थिति से निकाल दिया गया था, और यहाँ यीशु क्रूस से अपने लोगों को अपनी उपस्थिति में ला रहे हैं। 

दोनो डाकुओं में भिन्नता है। पहला यीशु से चाहता है कि यीशु उसके लिए कुछ करे। वह यीशु को मसीहा के रूप में स्वीकार करने के लिए इच्छुक है यदि वह उसकी माँगो को पूरा करेगा…. अर्थात- मुझे इस क्रूस से बचा। दूसरा डाकू केवल, केवल मसीह को चाहता है। ऐसा प्रतीत होता है कि डाकू के लिए स्वर्ग यीशु के बिना चाहिए, किन्तु दूसरा डाकू यीशु के साथ रहना चाहता है।यहाँ पर सबसे अनोखी बात हम यह देखते हैं कि यीशु जो, पवित्र, निर्दोष, धर्मी है, वह तथा दूसरा डाकू दोनो एक साथ स्वर्ग जाते हैं। बिना कुछ किए वह भ्रष्ट डाकू स्वर्ग में अर्थात परमेश्वर की उपस्थिति में अनन्तकाल के लिए रहने जा रहा है। 

कर्मों के द्वारा हमारा उद्धार सम्भव नहीं है। यीशु को छोड़ किसी अन्य के द्वारा हम स्वर्ग नहीं जा सकते।

भाईयों और बहनो, यदि हम अपने कार्य, अपनी धार्मिकता, अपने धन, मान-सम्मान द्वारा स्वर्ग में जाने की सोच रहे हैं, तो ध्यान दें, हमें स्वर्ग में जाने के लिए यीशु की आवश्यकता है, जो हमारे पापों के लिए क्रूस पर बलिदान हुआ, उसकी ओर देखिए, वही है जो हमें अपने साथ स्वर्ग लेकर जाएगा। कर्मों के द्वारा हमारा उद्धार सम्भव नहीं है। यीशु को छोड़ किसी अन्य के द्वारा हम स्वर्ग नहीं जा सकते। चाहे जितने भी भयंकर, डाकू से बद्तर हम क्यों न हो, यीशु हमें अपने अनुग्रह द्वारा बचाता है। पश्चाताप करिए और उस पर विश्वास करिए। 

यदि हम विश्वासी हैं तो हमें स्वयं को स्मरण दिलाना है कि हमारे अनन्त जीवन का आधार यीशु है। केवल यीशु ही अनन्त जीवन की आशा दे सकते हैं। अनन्त जीवन का आधार केवल यीशु ख्रीष्ट है। केवल यीशु ख्रीष्ट के पास अनन्त जीवन देने का अधिकार है। यीशु ख्रीष्ट ही एकमात्र अनन्त जीवन का स्रोत है। अनन्त जीवन की आशा केवल यीशु में है। वह प्रतिज्ञा करता है कि वह हमें भी अपनी उपस्थिति में ले जाएगा। यीशु ख्रीष्ट अधर्मियों को अपने साथ स्वर्गलोक में ले जाने की प्रतिज्ञा करता है। हमारी नागरिकता स्वर्ग की है। 

एक प्रभु के सेवक ने ऐसा कहा, “इस क्रूस पर लटके हुए डाकू के विषय में सोचिए, जब वह स्वर्ग गया होगा, तो स्वर्गदूत ने पूछा होगा, “तुम कभी बाइबल अध्ययन में नहीं गए, तुमने कभी बपतिस्मा नहीं लिया, तुम कलीसिया की सदस्यता के विषय में नहीं जानते, तुम यहाँ क्या कर रहे हो?” उसने कहा, “मैं नहीं जानता।” इसका क्या अर्थ है कि तुम नहीं जानते? मैं नहीं जानता। वह अपने मुख्य स्वर्गदूत के पास जाता है और कुछ और प्रश्न उससे पूछा जाता है, “क्या तुम धर्मीकरण के सिद्धान्त को समझते हो?” मैने इसके विषय में कभी नहीं सुना” “पवित्रशास्त्र के सिद्धान्त के विषय में ?” वह सब देख ही रहा था। परेशान हो कर स्वर्गदूत ने कहा, “किस आधार पर तुम यहाँ हो” और उसने उत्तर दिया, “बीच वाले क्रूस पर लटके व्यक्ति ने कहा कि मैं यहाँ आ सकता हूँ।”

जिस प्रकार से वह डाकू केवल यीशु पर विश्वास करने के द्वारा स्वर्ग में प्रवेश किया, हम सब भी केवल यीशु के द्वारा, जो बीच के क्रूस पर हमारे लिए बलिदान हुआ, उसी के कारण हम स्वर्गलोक में जा सकते है। 

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नीरज मैथ्यू
नीरज मैथ्यू
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