परमेश्वर के छोटे लोगों के लिए
ख्रीष्ट आगमन | चौथा दिन
<a href="" >जॉन पाइपर द्वारा भक्तिमय अध्ययन</a>

संस्थापक और शिक्षक, desiringGod.org

“उन्हीं दिनों में ऐसा हुआ कि औगुस्तुस कैसर की ओर से यह राजाज्ञा निकली कि सारे जगत के लोगों की गणना की जाए। यह प्रथम जनगणना तब हुई जब क्विरिनियुस सीरिया का राज्यपाल था। सब लोग नाम लिखवाने के लिए अपने-अपने नगर को जाने लगे। अतः यूसुफ भी इसलिए कि वह दाऊद के घराने और वंश का था, गलील के नासरत नगर से यहूदिया में दाऊद के नगर बैतलहम गया, कि अपनी मंगेतर मरियम के साथ जो गर्भवती थी, नाम लिखवाए।” (लूका 2:1–5)

आपने क्या कभी सोचा है कि यह कितनी अद्भुत बात है कि परमेश्वर ने पहले से ही यह ठहराया था कि मसीहा बैतलहम में जन्म लेगा (जैसा कि मीका 5:2 की नबूवत दर्शाती है)? और क्या आप इस बात से अचम्भित नहीं होते हैं कि उसने इस बात को भी ऐसे ठहराया कि जब समय आया, तो मसीहा की माता और विधिवत् पिता बैतलहम में नहीं वरन् नासरत में रह रहे थे; और अपने वचन को पूरा करने के लिए तथा दो अज्ञात, साधारण, छोटे लोगों को उस पहले क्रिसमस पर बैतलहम में लाने हेतु, परमेश्वर ने औगुस्तुस कैसर के हृदय में डाला कि रोमी साम्राज्य के सभी लोग अपने नगर में नाम लिखवाने के लिए जाएँ? दो लोगों को सत्तर मील ले जाने हेतु सम्पूर्ण संसार के लिए एक राजाज्ञा निकाली गयी!

क्या आपने मेरे समान कभी सात अरब लोगों के इस संसार में छोटा और महत्वहीन अनुभव किया है, जहाँ सभी समाचार बड़े राजनीतिक और आर्थिक एवं सामाजिक आन्दोलनों तथा वैश्विक महत्व, असीम शक्ति और प्रतिष्ठा रखने वाले लोगों के विषय में हैं? यदि आप ने ऐसा अनुभव किया है, तो यह बात आपको निराश या दुखी न होने दे। क्योंकि यह बात पवित्रशास्त्र में अन्तर्निहित है कि सभी विशाल राजनीतिक बल और सभी विशाल औद्योगिक प्रणालियाँ, उनके जाने बिना ही, परमेश्वर द्वारा निर्देशित किये जा रहे हैं; यह सब उनके लिए नहीं, वरन् परमेश्वर के छोटे लोगों के कारण किया जा रहा है—छोटी मरियम, छोटा यूसुफ, जिन्हें नासरत से बैतलहम जाना है। परमेश्वर अपने वचन को पूरा करने और अपने बच्चों को आशीष देने के लिए एक साम्राज्य को भी संचालित करता है।

ऐसा मत सोचिये कि प्रभु का हाथ छोटा है क्योंकि आप अपने अनुभव के सीमित संसार में कठिनाई का अनुभव करते हैं। वह हमारी समृद्धि या हमारी प्रसिद्धि को नहीं परन्तु हमारी पवित्रता को पूरे मन से खोजता है। और इस बात की पूर्ती के लिए, वह सम्पूर्ण संसार पर राज्य करता है। जैसा कि नीतिवचन 21:1 कहता है, “यहोवा के हाथ में राजा का हृदय तो जल की नालियों के समान ही है; / वह उसे जहाँ चाहता है मोड़ लेता है।” और वह अपने लोगों के बीच छुटकारे और पवित्रीकरण तथा अनन्त उद्देश्यों को पूरा करने के लिए इसे सदा मोड़ता रहता है।

वह छोटे लोगों का बड़ा परमेश्वर है, और हमारे पास इस बात से आनन्दित होने का बहुत बड़ा कारण है कि, उनके जाने बिना ही, सभी राजाओं और राष्ट्रपतियों और प्रधानों और कुलपतियों और प्रमुखों ने, स्वर्ग में हमारे पिता की सम्प्रभु राजाज्ञाओं का पालन किया, कि हम, उसके बच्चे, उसके पुत्र यीशु ख्रीष्ट के स्वरूप के अनुरूप बन सकें—और तत्पश्चात उसकी अनन्त महिमा में प्रवेश कर सकें।

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