“हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तू ने मुझे क्यों छोड़ दिया?” (मत्ती 27:46) 

क्रूस पर यह यीशु की चौथी वाणी है। किसी भीषण परिस्थिति मे त्यागे जाने का अनुभव एक कठिन अनुभव होता है। क्रूस पर यीशु ने अपने आपको त्याग हुआ पाया और उसने ऊँची आवाज़ में पुकारा कि “हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तू ने मुझे क्यों छोड़ दिया?” इस लेख में हम देखेंगे कि क्यों क्रूस पर यीशु ने अपने आप को त्यागा हुआ पाया?

यीशु पर पिता ने अपने क्रोध को उण्डेला – क्रूस पर यीशु ने हमारे स्थान पर पिता के क्रोध को सहा। वह पिता से प्रेम करता था और पिता के साथ उसकी संगति का आधार प्रेम था। परन्तु क्रूस पर वह हमारे लिए पाप बन गया (2 कुरिन्थियों 5:21) और पिता को यही भाया कि वह उसे कुचले (यशायाह 53:10)। पिता ने जगत की उत्पत्ति से जिनको चुन लिया था, उन सब के पापों का बोझ यीशु क्रूस पर अपनी देह मे उठा रहा था। जब उनके पापों का दण्ड पिता ने यीशु पर उण्डेल दिया था, ऐसी स्थिति में यीशु ने अपने आप को त्यागा हुआ पाया।

यीशु अपनी मानवता का प्रमाण दे रहा था – यीशु का कहना “हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर” दर्शाता है कि वह अपनी मानवता में होकर त्यागे जाने की पीड़ा को सहते हुए अपने परमेश्वर को पुकार रहा है। वह वास्तविक पीड़ा में है, अपने आपको त्याग हुआ पा रहा है और इस कारण ऊँचे स्वर में पुकारता है। यह दर्शाता है कि वास्तव में यीशु उस दुख और पीड़ा को क्रूस पर सह रहा था। यह एक वास्तविक सच्चाई और घटना है जो उस दिन क्रूस पर घटित हुई।

यीशु पुराने नियम की भविष्यवाणी को पूरा कर रहा था – यीशु की यह वाणी भजन 22 का पूर्तिकरण था। भजन 22 में ख्रीष्ट के दुखभोग के विषय में, क्रूस पर ख्रीष्ट के दुख के विषय मे लिखा गया है। यीशु की यह वाणी उसके ख्रीष्ट होने की पुष्टि थी। क्रूस पर वह उन सब अनुभवों में से होकर जा रहा था जिसके विषय में भजन 22 में लिखा हुआ था। 

अतः हम यीशु के प्रति इस बात के लिए कृतज्ञ हो सकते हैं कि अब हमारे ऊपर कोई दण्ड की आज्ञा नहीं है। उसने हमारे सब अपराधों का दण्ड अपने ऊपर ले लिया है, पिता के क्रोध को हमारे स्थान पर सह लिया है।              

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मोनीष मित्रा
मोनीष मित्रा

परमेश्वर के वचन का अध्ययन करते हैं और मार्ग सत्य जीवन के साथ सेवा करते हैं।

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