वह आज्ञा जो सृजन करती है
<a href="" >जॉन पाइपर द्वारा भक्तिमय अध्ययन</a>

संस्थापक और शिक्षक, desiringGod.org

जो सब कुछ को प्रकट करता है वह ज्योति है। इस कारण वह कहता है, “हे सोने वाले, जाग और मृतकों में से जी उठ, तो मसीह की ज्योति तुझ पर चमकेगी।” (इफिसियों 5:14)

जब यीशु लाज़र को मरे हुए में से जी उठने के लिए आज्ञा देता है, तो लाज़र ने कैसे उस आज्ञा का पालन किया? यूहन्ना 11:43 कहता है, “उसने [यीशु] ऊँची आवाज़ में पुकारा, “हे लाज़र, निकल आ।” यह आज्ञा एक मृतक व्यक्ति को दी गई थी। अगला पद कहता है, “जो मर गया था वह कफ़न से हाथ-पैर बँधा हुआ निकल आया” (यूहन्ना 11:44)। 

लाज़र ने यह कैसे किया? एक मृतक व्यक्ति पुनः जीवित होने की आज्ञा का पालन कैसे कर सकता है? इसका उत्तर यह हो सकता है: उस आज्ञा में नया जीवन सृजन करने की सामर्थ्य है। किसी आज्ञा के प्रति आज्ञाकारी होने का अर्थ है वह कार्य करना जो कि जीवित लोग करते हैं। 

यह अत्यन्त महत्वपूर्ण है। परमेश्वर की आज्ञा, “मरे हुए में से जी उठो!” में वह सामर्थ्य है जो हमें आज्ञा पालन करने की क्षमता देता है। हम उस जीवन का सृजन करके इस आज्ञा का पालन नहीं करते हैं। हम इसका पालन जीवित लोगों के समान कार्य करने के द्वारा करते हैं — लाज़र बाहर आया। वह जी उठा। वह बाहर निकल कर यीशु के पास आया। परमेश्वर की बुलाहट जीवन को सृजती है। वह बुलाहट जिस बात की सृष्टि करती है हम उसी की सामर्थ्य में होकर प्रतिउत्तर करते हैं। 

इफिसियों 5:14 में पौलुस कहता है, “हे सोने वाले, जाग और मृतकों में से जी उठ, ख्रीष्ट की ज्योति तुझ पर चमकेगी।” आप सोने से जागने की आज्ञा का पालन कैसे करते हैं? यदि आपके घर में विषैली वायु फैली हुई है और कोई चिल्लाता है, “उठो! अपने आप को बचाओ! बाहर जाओ!” तो आप स्वयं को जगाने के द्वारा आज्ञा पालन नहीं करते हैं। ऊँचा स्वर तथा सामर्थी आज्ञा स्वयं आपको जगाती है। संकट के समय आप जाग्रत लोगों के समान व्यवहार करने के द्वारा आज्ञा पालन करते हैं। आप उठते हैं और घर से बाहर निकल जाते हैं। वह बुलाहट ही जागृति को उत्पन्न करती है। आप उस सामर्थ्य में प्रतिक्रिया करते हैं जिसे बुलाहट ने सृजा था अर्थात् — जागृत होना। 

मैं यह विश्वास करता हूँ कि यह स्पष्टीकरण है कि क्यों बाइबल नए जन्म के विषय में असत्याभासी बातें कहती है: अर्थात, हमें अपने लिए नये हृदय प्राप्त करने की आवश्यकता है, परन्तु यह तो परमेश्वर ही है जो नए हृदय की सृष्टि कर सकता है। उदाहरण के लिए: 

व्यवस्थाविवरण 10:16: “अपने हृदय का ख़तना करो!”

व्यवस्थाविवरण 30:6: “परमेश्वर यहोवा तेरे मन का ख़तना करेगा।”

यहेजकेल 18:31:  “अपने हृदय और आत्मा को नया बनाओ!”

यहेजकेल 36:26: “मैं तुम्हें एक नया हृदय दूँगा और तुम्हारे भीतर एक नई आत्मा उत्पन्न करूँगा।”

यूहन्ना 3:7: “अवश्य है कि तू नया जन्म ले।”

1 पतरस 1:3: “परमेश्वर ने हमें नया जन्म दिया है।”

नया जन्म लेने की आज्ञा का पालन करने का उपाय है कि पहले जीवन तथा श्वास के ईश्वरीय दान का अनुभव करना, और इसके पश्चात् वह करना है जो जीवित, श्वास लेने वाले लोग करते हैं: विश्वास, कृतज्ञता तथा प्रेम में परमेश्वर को पुकारना। जब परमेश्वर की आज्ञा, पवित्र आत्मा के जीवन की सृष्टि करने वाले तथा हृदय परिवर्तन करने वाली सामर्थ्य के साथ आता है, तो यह जीवन प्रदान करता है। और हम विश्वास करते हैं, आनन्दित होते हैं तथा आज्ञा का पालन करते हैं। 

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