पांच डिजिटल संकट

पांच डिजिटल संकट

वरन् प्रभु यीशु मसीह को धारण कर लो और शारीरिक वासनाओं की तृप्ति में मन न लगाओ। (रोमियों 13:14)

एक जेलिफ़िश जल के बहाव के साथ बहती है परन्तु ख्रीष्टीय लोग ठीक इसके विपरीत जीवन भर समकालीन संस्कृति के बहाव में नहीं बहते हैं। हम आत्मा की सामर्थ्य से जीते हैं और परमेश्वर के वचन के आधार पर अपनी दिशा को प्राप्त करते हैं। हम तैरते हैं। डॉलफिन के समान, न कि जेलिफ़िश के। उस दिशा निर्धारण और सामर्थ्य का एक भाग इस बात में व्यक्त होता है कि हम कितनी विचारशील रीति से प्रतिदिन डिजिटल वास्तविकता में स्वयं को संलग्न रखते हैं। इसमें संकट भी हैं। इन में से पाँच यह हैं।

1) निरन्तर जिज्ञासा का काँटा

डिजिटल उपकरण, खोज करने की कभी न समाप्त होने वाली सम्भावना प्रदान करते हैं। यहां तक ​​कि साधारण यंत्र भी हमारी जिज्ञासा और खोजबीन के कारण घण्टों का समय नष्ट कर सकते हैं। इस पर ऐसे अनेक ऐप्स हैं जो आपको अपनी जटिलताओं में खींच कर आपके समय में से कई सप्ताहों को खा जाते हैं।

यह सब एक छलावा है, जो आपको सामर्थी और प्रभावशील होने के भ्रम में डालता है, किन्तु दिन के अन्त में आपको खालीपन और घबराहट की भावना के साथ छोड़ देता है।

संकल्प: मैं उपकरण पर अपने खोजबीन के समय को कड़ाई से सीमित करूंगा और तकनीक की तुलना में स्वयं को सत्य के लिए अधिक समर्पित करूंगा।

2) आभासी (अ )वास्तविकता का खोखला संसार

यह देखना कितने दुःख की बात है कि प्रतिभाशाली, रचनात्मक लोग अपने जीवन के घण्टों और दिनों को ऐसे नगरों और सेनाओं को बनाने तथा साहसिक कार्य करने में लगा देते हैं, जिसका वास्तविकता के साथ कोई सम्बन्ध नहीं है। हमारे पास जीने के लिए एक ही जीवन है। हमारी सभी शक्तियाँ हमें वास्तविक परमेश्वर द्वारा वास्तविक संसार के लिए दी गयी हैं जो वास्तविक स्वर्ग और वास्तविक नर्क की ओर ले जाती हैं।

संकल्प: मैं अपनी निर्माणकारी, रचनात्मक ऊर्जा का उपयोग “आभासी वास्तविकता” की अवास्तविकता में नहीं, किन्तु वास्तविक संसार की वास्तविकता में करूंगा।

3) एक यंत्र के साथ “व्यक्तिगत ” सम्बन्ध

किसी भी अन्य आविष्कार से बढ़कर, कम्प्यूटर एक व्यक्ति के समान होने के सबसे निकट है। आप इसके साथ खेलों को खेल सकते हैं। यह आपसे बात करेगा। यह सदैव आपके लिए उपलब्ध रहेगा। यहां सबसे बड़ा संकट यह है कि हम इस सरलता से संचालित होने वाले इलेक्ट्रॉनिक “व्यक्ति” के साथ वास्तव में सुखद हो सकते हैं और धीरे-धीरे वास्तविक मनुष्यों के अप्रत्याशित, खीझ दिलाने वाले, कभी-कभी पीड़ादायक व्यवहार से दूर हो जाते हैं।

संकल्प: मैं व्यक्तिगत सम्बन्धों के जोखिम को अमानवीय इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा से नहीं बदलूंगा।

4) गुप्त में मिलने (ट्रिस्ट ) का जोखिम

“मिलन \’ मिलना \ संज्ञा: मिलने हेतु (प्रेमियों के मध्य) एक समझौता है।” यौन सम्बन्ध आरम्भ होते हैं एक साथ एकान्त में मिलने, तत्पश्चात लम्बी बातचीतों, और अंततः हृदय के मिलने से, और अब डिजिटल उपकरणों के माध्यम से बिना किसी के जाने ऐसा करना सम्भव है। आप सोच सकते हैं कि “यह कोई बड़ी बात नहीं है” — जब तक कि लड़की (या लड़का) शहर में न आ जाएं।

संकल्प: मैं अपने पति या पत्नी के अलावा विपरीत लिंग के व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत सम्बन्ध नहीं बनाऊंगा। यदि मैं अविवाहित हूं, तो मैं किसी अन्य व्यक्ति के पति या पत्नी के साथ इस प्रकार का सम्बन्ध नहीं बनाऊंंगा।

5) अश्लील चलचित्र (पोर्न )

ऐसे अत्यधिक कपटपूर्ण गन्दी श्रेणी के चलचित्र (एक्स-रेटेड वीडियोस), अब हम न केवल देख सकते हैं, किन्तु अपनी स्वयं की गोपनीयता में उस विकृत कृत्य में सम्मिलित भी हो सकते हैं। संवादात्मक अश्लील चलचित्र वास्तव में आभासी रीति से आपको “ऐसा करने” या उन्हें “ऐसा करने” की अनुमति देगा।

मैंने इसे कभी नहीं देखा है। न ही मेरा कभी ऐसा करने का अभिप्राय है। यह आत्मा को मार देता है। यह परमेश्वर को दूर कर देता है। यह महिलाओं को वस्त्रहीन कर देता है। यह प्रार्थना को बुझा देता है। यह बाइबल को कोरा कागज बना देता है। यह आत्मा का स्तर गिरा देता है। यह आत्मिक सामर्थ्य को नष्ट कर देता है। यह सब कुछ को अशुद्ध कर देता है।

संकल्प: मैं यौन उत्तेजना के लिए कभी भी कोई ऐप या वेबसाइट नहीं खोलूंगा, न ही जो कुछ अश्लील है उसे खरीदूंगा या डाउनलोड करूंगा।

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