कुछ न करने का पाप

मैं प्राय: इस संसार में अपने जीवन को प्रेम करने के प्रलोभन का सामना करना तो दूर, पहचानने में विफल रहा हूँ। यह मेरे द्वारा किए गए कार्यों में बड़े पापों में प्रकट नहीं होता है, परन्तु उन अच्छे कार्यों में जिन्हें मैं नहीं करता हूँ। चार्ल्स स्पर्जन ने जिसे “कुछ न करने का पाप” कहा था, उसका दोषी रहा हूँ।

पाप, जैसा कि समान्य रीति से समझा जाता है, न केवल बुरा करना है (उल्लंघन के पाप), किन्तु अच्छा करने में विफलता (चूक जाने के पाप) भी है। मैं चूक जाने के पापों की तुलना में उल्लंघन के पापों की अधिक चिन्ता किया करता हूँ। एक ऐसे समाज में जो अभी भी एक ईश्वरवादी नैतिकता के प्रभाव में है, हम जो अपना न्याय उन बातों के आधार पर करते हैं जिन्हें हम करते हैं न कि उनके आधार पर जिन्हें हम नहीं करते हैं। परन्तु युद्ध मात्र रक्षात्मक रणनीति अपनाने से नहीं जीते जा सकते हैं।

और ऐसे भव्य युद्ध से हम कैसे स्वयं को पीछे हटाते हैं। क्या इसमें भाग लेना हमारा परम सौभाग्य नहीं है? गढ़ के भीतर से केवल देखना भी पर्याप्त होता; तुरही फूँकना और झण्डे सम्भालना एक सम्मान की बात होती। परन्तु स्वयं राजा के द्वारा बुलाया जाना, उसके अस्त्र-शस्त्र में सज्जित होना, साथ में आगे बढ़ने के लिए एक परिवार दिया जाना, और खोए प्राणों को जीतना — हम कैसे इस से पीछे हट सकते हैं? वह विजयी योद्धा, वह राजा, वह यहूदा के गोत्र का सिंह, युद्ध के मध्य खड़ा है। उसके साथ जुड़ने के लिए क्या आप उत्तेजित नहीं हैं? 

पाप, जैसा कि समान्य रीति से समझा जाता है, न केवल बुरा करना है (उल्लंघन के पाप), किन्तु अच्छा करने में विफलता (चूक जाने के पाप) भी है।

हम में से जो निष्क्रिय होकर बैठकर गोल-मटोल हो गए हैं, हमें दो इस्राएली गोत्र रूबेन और गाद के लोगों से बहुत कुछ सीखना है, जो प्रतिज्ञा के देश के कगार पर डगमगाए थे। वे चूक जाने के पाप, अर्थात् “कुछ न करने के पाप,” युद्ध के समाप्त होने से पहले और परमेश्वर के लोगों के अधिकार में भूमि होने से पहले अपने अस्त्र-शस्त्र डालने का पाप, के प्रलोभन में आए। जबकि परमेश्वर के विशेष कार्य में निष्क्रियता को हानिरहित माना जा सकता है, परमेश्वर इसे एक गम्भीर पाप के रूप में देखता है, इसलिए हमें भी ऐसा ही करना चाहिए।

ठहरी हुईं गोत्र

ये दो गोत्र, रूबेन और गाद के लोग, उन बारह गोत्रों में से थे, जो मूसा के पीछे प्रतिज्ञा के देश की ओर चले। जब वे बच्चे थे, ये लोग लहू के चौखटों में से और एक विभाजित समुद्र के मध्य चलते हुए मिस्र देश से निकल आए थे। जब वे बड़े हुए, तो वे जंगल में सीहोन और ओग से लड़े। उनकी पीढ़ी, उनके पूर्वजों की पढ़ी के विपरीत, प्रतिज्ञा के देश में जाने के लिए परमेश्वर के अभियान में विश्वासयोग्य प्रमाणित हुई।

परन्तु अब, वे अपनी आवश्यकताओं के लिए उपयुक्त किसी सुखद भूमि पर पहुँचे और अपने मिशन में बने न रहने के लिए प्रलोभित होंगे। ये पुरुष पहाड़ी पर के नगर को, उस जिस देश में दूध और मधु की धाराएँ बहती हैं, नहीं चाहते थे; वे चारागाह के लिए भूमि चाहते थे। इसलिए उन्होंने मूसा से कहा कि उन्हें उनके कार्य से मुक्त करें:

जिस पर यहोवा ने इस्राएली मण्डली को विजय दिलाई है, वह पशुओं के लिए उपयुक्त है और तेरे दासों के पास पशु हैं। यदि तेरा अनुग्रह हम पर हो तो यह देश तेरे दासों को निज भूमि होने के लिए दे दिया जाए, हमें यरदन पार न ले चल (गिनती 32:4-5)।

एक साधारण अनुरोध। एक विनम्र सी पूछताछ। परन्तु परमेश्वर और मूसा ने इस बात को इस प्रकार से नहीं देखा। और आज परमेश्वर के उन पुरुषों को, जो अमेरिका जैसे उपयुक्त देशों में निष्क्रिय बैठे हुए हैं, उनका उत्तर सुनने की आवश्यकता है।

कुछ न करने का पाप

मूसा ने गादियों और रूबेनियों से कहा, 

जब तुम्हारे भाई युद्ध करने को जाएँगे तब क्या तुम यहाँ बैठे रहोगे? तुम इस्राएलियों को पार होकर उस देश में जाने से क्यों निरूत्साहित कर रहे हो जिसे यहोवा ने उन्हें दिया है?

जब मैंने तुम्हारे पूर्वजों को कादेश बर्ने से उस देश को देखने के लिए भेजा तब उन्होंने ऐसा ही किया था…अब देखो, तुम उन पापी मनुष्यों की सन्तान होकर अपने पूर्वजों के स्थान पर उठ खड़े हुए हो कि इस्राएल के विरूद्ध यहोवा के भड़के हुए क्रोध को और भी भड़काओ! यदि तुम उसके पीछे चलने से फिर जाओ तो वह फिर उन्हें जंगल में छोड़ देगा; और तुम इन सब लोगों का नाश करा दोगे।” (गिनती 32:6-8, 14-15)

उन पर लगाए गए तीन आरोपों पर ध्यान दें।

तुमने अपना कार्य त्याग दिया।

जबकि दस गोत्र युद्ध के लिए निकले, गाद और रूबेन को ऐसे लोगों के रूप में वर्णित किया गया है जो “वहाँ बैठे” रहते थे। “जब तुम्हारे भाई युद्ध करने को जाएँगे तब क्या तुम यहाँ बैठे रहोगे?” इन योद्धाओं की योजना मात्र “वहाँ बैठने” का नहीं था। इसके विपरीत, वे भेड़-बकरियों को चराने, घर बनाने, अपने शहर की किलेबन्दी करने, और भूमि को एक उपयुक्त निवास स्थान के रूप में विकसित करने में व्यस्त होने वाले थे।

“हम में से बहुत से लोग संसार और शैतान को परेशान नहीं करते हैं, और इसके स्थान पर अधिक परेशान नहीं होते हैं।”

वे उस प्रकार के आलसी या कायर पुरूष नहीं थे, जो अपने भाइयों को युद्ध में आगे बढ़ते हुए देखकर केवल बैठे-बैठे देखते रहेंगे। फिर भी अपनी भेड़ों की चरवाही करने के लिए अपने सामने के महान आदेश से सेवानिवृत्त होने के द्वारा, मूसा कहता है कि वे ऐसा ही कर रहे थे। वह कहता है कि वे अपना समय व्यर्थ में गँवा रहे हैं क्योंकि वे अपने समय का दुरुपयोग कर रहे थे।

भले ही अन्य कार्यों में, सम्मानजनक कार्यों में कितने व्यस्त थे, जब तक वे युद्ध से स्वयं को अलग रख रहे थे, परमेश्वर के पवित्रशास्त्र में उनका चित्रण इस रीति से होती कि वे बिना कोई महत्वपूर्ण कार्य किए केवल एक साथ बैठे हुए थे।

तुमने अपने साथी सैनिकों को हानि पहुँचाया।

ऐसा चित्रण अन्य गोत्रों को उस कार्य को करने में निरूत्साह का कारण होता जिसे करने के लिए परमेश्वर ने उन्हें बुलाया था।

तुम इस्राएलियों को पार होकर उस देश में जाने से क्यों निरूत्साहित  कर रहे हो जिसे यहोवा ने उन्हें दिया है?

भाग न लेना निष्पक्ष नहीं होता है। जैसे कि कोई भी खिलाड़ी या सैनिक या परिवार का सदस्य जानता है, एक जन की उदासीनता सभी के संकल्प को प्रभावित करती है। रूबेन और गाद न केवल स्वयं पाप करने के मार्ग पर थे, परन्तु उन्होंने तो दूसरों के लिए भी आज्ञा मानना कठिन बनाया। अन्य गोत्र देश में बड़े और पहले से स्थापित राष्ट्रों के विरुद्ध पूरी सामर्थ्य से खड़ी नहीं होंगी।

तुमने प्रभु के विरुद्ध पाप किया।

वे अपने पूर्वजों के समान अविश्वासयोग्य व्यवहार को प्रकट कर रहे थे। मूसा उनसे तत्परता से कहता है, “जब मैंने तुम्हारे पूर्वजों को कादेश बर्ने से उस देश को देखने के लिए भेजा, तब उन्होंने भी ऐसा ही किया था।”

और उनके पूर्वज उस देश का भेद लेने गए, और कालेब और यहोशू को छोड़ सब ऐसा सन्देश लेकर लौट आए, जिसने लोगों को इब्राहीम से प्रतिज्ञा किए गए देश की ओर आगे बढ़कर उसे अधिकार में लेने के लिए निरुत्साहित किया। उनके पूर्वज भी कनान के किनारे तक गए और जब परमेश्वर ने उन्हें आगे बुलाया तो वे पीछे गए। उनके पूर्वज बहुत कायर थे, और अब वे बहुत सुविधापूर्ण स्थिति में थे।

प्रतिउत्तर में, मूसा ने बात की गम्भीरता को नहीं घटाया। वह उन्हें सांप के बच्चाों, तथा पापी पुरुष कहता है, जो इस्राएल को एक बार फिर से जंगल में भटकने के लिए भेजेंगे, जिससे उनकी मृत्यु हो जाएगी यदि वे यहोवा की दृष्टि में इस दुष्टता को करेंगे (गिनती 32:15)। प्रत्येक जन को उस कार्य में तब तक लगे रहना चाहिए जब तक कि सभी गोत्रों के पास उनकी विरासत न हो। उन्हें कुछ न करने के पाप से पश्चाताप करना चाहिए और परमेश्वर के लोगों के साथ चलना चाहिए।

कुछ न करने वाले कैसे पश्चाताप करते हैं

रूबेन और गाद के पुरुष वास्तव में पापमय कारण से रुकने के अपने निर्णय के लिए पश्चाताप करते हैं।

हम यहीं अपने पशुओं के लिए बाड़े बनाएँगे और अपने बच्चों के लिए नगर बनाएँगे; परन्तु हम इस्राएलियों के आगे आगे हथियार धारण करके तब तक चलेंगे जब तक कि उन्हें उनके नगर में न पहुंचा दें।….जब तक कि हर एक इस्राएली अपने अपने भाग का अधिकारी न हो जाए तब तक हम अपने घरों को न लौटेंगे। (गिनती 32:16-18)

वे निर्माण करेंगे और बसेंगे, परन्तु पहले वे लड़ेंगे।

और यहोवा उनसे यही करवाता है, और माँग करता है कि प्रत्येक सैनिक हथियार धारण करते हुए यरदन के पार “यहोवा के सामने” तब तक चले जब तक वह देश यहोवा के वश में न आ जाए (गिनती 32:20-24)। यदि वे उन बातों को करने में असफल होंगे जिनको करने की प्रतिज्ञा उन्होंने की थी, तो वे अपने पीछे लौटने वाले पैरों के पीछे-पीछे मूसा के गम्भीर शब्दों को सुनेंगे: “देखो, तुमने यहोवा के विरुद्ध पाप किया है, और निश्चय ही तुमको तुम्हारा पाप लगेगा” (गिनती 32:23)।

क्या हम यहीं बैठे रहें?

परमेश्वर अभी भी हम में से बहुत लोगों से, आधुनिक गाद और रूबेन के पुरुषों से, हमारी पुरूषत्व के हृदय को काटने के लिए उस प्रश्न को पूछ सकता है: “जब तुम्हारे भाई युद्ध करने को जाएँगे तब क्या तुम यहाँ बैठे रहोगे?”

अत्यधिक लोगों ने (जिनमें मैं भी सम्मिलित हूँ) अपने घरों को पश्चिम में पाया है। हम धार्मिक स्वतन्त्रता का आनन्द लेते हैं और समय-समय पर प्रार्थना करते हैं, “तेरा राज्य आए।” हमारे पास पत्नी, दो बच्चे, और एक सुखद अस्तित्व है — और निस्सन्देह कुछ अच्छा ही करने में व्यस्त हैं। हममें से अधिकांश लोग संसार और शैतान को कष्ट नहीं देते हैं, और इसके कारण हमें कष्ट नहीं दिया जाता है। जब शैतान हमें मवेशियों के घूमने के लिए भूमि, ताजा भोजन, सुखद बिस्तर प्रदान करता है, और हम सन्तुष्टि से बैठे जाएँगे और नदी नहीं पार करेंगे।

परन्तु हमारे राजा ने हमें एक महान कार्य दिया है।

स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिए जाकर सब जातियों के लोगों को चेले बनाओ, और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो, और जो जो आज्ञाएँ मैंने तुम्हें दी हैं उनका पालन करना सिखाओ। और देखो, मैं युग के अन्त तक सदैव तुम्हारे साथ हूँ। (मत्ती 28:18-20)

हममें से अधिकांश लोग संसार और शैतान को कष्ट नहीं देते हैं, और इसके कारण हमें कष्ट नहीं दिया जाता है।

यह महान कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है। हमारी शपथें अभी पूरी नहीं हुई हैं। परमेश्वर के चुने हुए सभी लोगों के पास उनका उत्तराधिकार नहीं है। हमारा विजय अभी पूर्ण नहीं हुआ है — हम अभी भी यरदन के इस पार ही हैं। “आगे बढ़ो ख्रीष्टीय सैनिको, युद्ध के लिए हो तैयार” (“Onward Christian soldiers, marching as to war”) वे गीत के शब्द हैं जिन्हें पहले के परिश्रमी लोगों ने हमें दिए हैं। परन्तु कलीसियाओं में बहुत से पुरुषों के शिथिल स्वभाव से ऐसा प्रतीत होता है कि हमें कहा गया था, “बैठे रहो, ख्रीष्टीय सैनिको, जब तक तुम बैठे-बैठे थक न जाओ।”

कुछ भी नहीं करने के पाप का सामना करने का अर्थ है प्रतिदिन की झंझटों में न फँसना। इसका अर्थ है राजा और हमारे स्वर्गीय देश की सेवा करने न भटकना। इसका अर्थ है अपने महान कार्य से दृष्टि न हटाना, भले ही हमारे सामने जितने सार्थक अवसर क्यों न आएँ। इसका अर्थ है यह स्मरण रखना कि विवाह और परिवार उस महान कार्य के अंग हैं, वे स्वयं वह महान कार्य नहीं हैं। हम तब तक विश्राम नहीं कर सकते जब तक कि ख्रीष्ट के पास उन लोगों के प्राण न हों जिनके लिए वह मरा। पवित्रता युद्ध की अग्रिम पंक्ति में हमारी कर रही है। हमारी बुलाहट, हमारा सौभाग्य, हमारा आनन्द आगे की ओर है।

ग्रेग मोर्स desiringgod.org के लिए एक कर्मचारी लेखक हैं और बेथलहम कॉलेज और सेमिनरी के स्नातक हैं। वह और उसकी पत्नी, अबीगैल, सेंट पॉल में अपने बेटे और बेटी के साथ रहते हैं।

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