क्या एक प्रेमी परमेश्वर मुझे घायल करेगा?

कलीसिया में जाने के अपने थोड़े समय से मुझे जो बातें स्मरण हैं, उनमें से सबसे प्रभावशाली वह सन्देश है, जो दीवार पर लिखा हुआ था: “तू अपने परमेश्वर से भेंट करने के लिए तैयार हो जा।”

यह इतनी बड़ी बात थी, कि यदि आप इसे न देख पाते तो इससे आपके अन्धेपन की पुष्टि हो जाती। जब कोई उसे देखना नहीं भी चाहता था, तब भी ऐसा लगता था कि यह आज्ञा आप को  घूर रही थी।

जब भी मेरा ध्यान उपदेश से भटकता था, यह कहता है — तू अपने परमेश्वर से भेंट करने के लिए तैयार हो जा।  जब मेरा ध्यान प्रार्थना भटकने लगा, तो उसने मुझे पाया — तू अपने परमेश्वर से भेंट करने के लिए तैयार हो जा।  उस आज्ञा के कारण जो सदैव अपनी मीनार से सर्वेक्षण करने वाले चौकीदार के समान थी, मैंने और निष्ठा से प्रार्थना की, अधिक ऊँचे स्वर से गाया, और अच्छी रीति से सुना।

व्यथित करने वाले निमंत्रण

मुझे वह दिन भी स्मरण है जब मैंने उन डरावने शब्दों का पता लगाने के लिए साहस जुटाया। दीवार ने मुझे बताया, कि यह आमोस 4:12 में पाया जाता है। मैंने पद 6 से आरम्भ किया, जहाँ यहोवा ने अपने लोगों से ये बातें कहीं:

“मैंने तुम्हारे सब नगरों में दाँतों की सफाई और तुम्हारे सब स्थानों में रोटी की कमी की, फिर भी तुम मेरी ओर न फिरे,” यहोवा की यही वाणी है।

“मैंने वर्षा को तुम से रोक रखा जबकि कटनी के लिए तीन माह शेष थे . . . फिर भी तुम मेरी ओर न फिरे,” यहोवा की यही वाणी है।

“मैंने तुम्हें लू और गेरुई से मारा और इल्लियाँ तुम्हारी बहुत-सी वाटिकाओं, दाख की बारियों, तथा अंजीर और जैतून के वृक्षों को चट कर गईं; फिर भी तुम मेरी ओर न फिरे,” यहोवा की यही वाणी है।

“जैसी महामारी मैंने मिस्र में भेजी थी वैसी ही तुम पर भी भेजी; मैंने तुम्हारे जवानों को तुम्हारे लूटे हुए घोड़ों सहित तलवार से घात किया। मैंने तुम्हारी छावनी की दुर्गन्ध तुम्हारे नथनों में भर दी; फिर भी तुम मेरी ओर न फिरे, ” यहोवी की यही वाणी है।

“जैसे मैंने सदोम और अमोरा को उलट दिया था, वैसे ही तुम्हें भी उलट दिया। तुम आग की लपट से निकली हुई लकड़ी के समान थे, फिर भी तुम मेरी ओर न फिरे, ” यहोवा की यही वाणी है।

“इस कारण हे इस्राएल, मैं तुझ से ऐसा ही करूँगा। इसलिए कि मैं तुझ से ऐसा करूँगा, हे इस्राएल, तू अपने परमेश्वर से भेंट करने के लिए तैयार हो जा।” (आमोस 4:6-12)।

अपने परमेश्वर से भेंट करने के लिए तैयार हो जा।  यह रविवार की आराधना सभा के लिए बुलाहट नहीं थी। यह तो व्यभिचारी लोगों के लिए एक भयावह बुलाहट था कि वे न्याय के लिए अपने जलन रखने वाले पति से मिलने के लिए स्वयं को तैयार करें। फिर भी केवल इसी ने मुझे कष्ट नहीं दिया। कड़ी चेतावनी से पहले परमेश्वर ने जो कुछ किया, उसने मुझे भी झकझोर दिया।

“परमेश्वर हमें नाश होने के लिए नहीं छोड़ेगा। जब हम चट्टानों की ओर भटकते हैं, तो वह हमें अपनी छड़ी से स्वर्ग की ओर वापस ले जाता है।”

क्या आप ने उन्हें ध्यान दिया?

परमेश्वर चाहता था कि इस्राएल उसके पास लौट आए, तो उसने क्या किया? उसने उन्हें दाँतों की सफाई दी (अर्थात् उसने उन्हें भूखा रखा); उसने उनसे वर्षा रोक ली, उनकी खाद्य आपूर्ति और अर्थव्यवस्था को रोक दिया; उसने उनकी दाख की बारियों को नष्ट कर दिया; उसने उनके मध्य रोग फैला दिए; उसने जवान सैनिकों को मार डाला, उसने नके योद्धाओं को अपने अधिकार में ले लिया, और उसने उनकी सेना को नष्ट कर दिया; उसने आग की लपटों को नगरों पर चढ़ने के लिए ठहराया। परमेश्वर ने उन्हें दु:ख दिया, कि वे अपने पापों से फिरें और उसी खोज करें।

उन्होंने ऐसा नहीं किया। और क्योंकि इनमें से किसी भी परीक्षा के कारण लोग परमेश्वर के पास नहीं आए, अब परमेश्वर लोगों के पास जाएगा। “अपने परमेश्वर से भेंट करने के लिए तैयार हो जाओ।”

हमारी अपेक्षा से अधिक भयंकर

क्या यह चित्रण उस परमेश्वर के साथ असंगत है जिसकी आप आराधना करते हैं? कि वह परमेश्वर, आपके प्रति प्रेम के कारण, आपको बचाने के लिए आपको हानि पहुँचाएगा? एक ऐसे प्रेम के साथ जो आपको चंगा करने के लिए आपको काटेगा, तोड़ेगा और आपका लहू बहाएगा — एक विशेषज्ञ सर्जन के जैसे? मैं विचार कर रहा था कि यदि यह बाइबल पद दीवार से उपदेश मंच की ओर आते तो कितनी कुर्सियाँ खाली हो जाती?

बहुत से लोग परमेश्वर के ऐसे प्रेम से संतुष्ट हैं, जिसमें केवल कोमल दयालुता और अटूट नम्रता है। वे चाहते हैं कि उसका प्रेम उनके तत्काल सुख के लिए पूरी रीति से समर्पित हो — भले ही वे इस सुख को खाेजने को क्या करते हैं। कुछ लोगों की कल्पना के अनुसार, कोमलता परमेशवर का वह स्वभाव है जिसे हटाया नहीं जा सकता है। हमारे सपनों के प्रति कोमल। हमारी इच्छाओं के प्रति कोमल। हमारे बैंक खातों और पापों के प्रति कोमल। इस प्रकार के “प्रेम का ईश्वर” की आराधना करने के लिए अनुग्रह के आश्चर्यकर्म की आवश्कता नहीं पड़ती है; नास्तिक व्यक्ति को इस प्रकार के ईश्वर से कोई आपत्ति नहीं है।

फिर भी परमेश्वर का प्रेम, जैसा कि बाइबल में पाया जाता है, एक आग है जो मैल को खा जाती है, एक छेनी है जो उसकी सिद्धता में ढालती है, एक अनन्त आलिंगन है जो सभी प्रतिद्वंद्वियों को दूर रखता है, चिकित्सक की धारदार छूरी है जिसका उद्देश्य मृत्यु के बाद वास्तविक जीवन और दृढ़ सुख देना है। इस प्रेम के लक्ष्य इस जीवन में हमारा विश्राम, हमारा स्वास्थ्य, या हमारी सुरक्षा से महान हैं। जितना हम प्रायः सोचते हैं, यह प्रेम उससे कहीं अधिक भयंकर और गहरा है, तथा जितना हम प्रायः चाहते हैं, यह उससे अच्छा और दृढ़ है। यह प्रेम हमें हानि पहुँचा सकता है, और यह प्रेम हमें जान से मार सकता है।

वह उनको ताड़ना देता है जिनसे वह प्रेम करता है

परमेश्वर का प्रेम हमारी अनुभव की गई आवश्यकताओं के आस-पास नहीं घूमता है। उसके मन में हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ बातें है, न कि विश्रामदायक बातें। उसका प्रेम — भयावह, जलन रखने वाला, स्वामिगत — वह प्रेम है जो हमें बचाने के लिए हमें निरन्तर घायल करेगा।

क्या तुम उस उपदेश को भूल गए हो जो तुम्हें पुत्र मानकर दिया गया है? “हे मेरे पुत्र, प्रभु की ताड़ना को हल्की बात न समझ, और जब वह तुझे झिड़के, तो हताश न हो। क्योंकि प्रभु जिस से प्रेम करता है उसकी ताड़ना भी करता है, और जिसे पुत्र बना लेता है, उसे कोड़े भी लगाता है।” (इब्रानियों  12:5-6)

यहाँ “ताड़ना करता” का अनुवाद “कोड़े मारता” या “चाबुक मारता” किया जा सकता है। यह एक सहने वाली बात है। यह कुछ अप्रिय और बहुत पीड़ादायक है। यह कुछ ऐसा है जिसको हम नहीं चुनेंगे। कुछ ऐसा जिसे हम घृणा करने के लिए प्रलोभित होते हैं। कुछ ऐसे जो उस क्षण में हम कोमल, नम्र या प्रेमी नहीं लगता है। परन्तु उसके कोड़े इसी प्रकार से हैं। स्थल को देखें।

वह उन्हें चोट पहुँचाता है जिन्हें वह प्रेम करता है और प्रत्येक उस पुत्र को हानि पहुँचाता है जिसे वह अपना पुत्र बनाता है। वह शैतान की सन्तानों को ताड़ना नहीं करता, केवल अपनी सन्तानों की ताड़ना करता है (इब्रानियों 12:8)। ये अप्रिय सुधार, लेपालक होने के ये चिन्ह, हमें “उसकी पवित्रता में भागीदार” होने और “धार्मिकता के शान्तिपूर्ण फल” का आनन्द उठाने के लिए लाते हैं जो अनन्त जीवन की ओर ले जाता है (इब्रानियों 12:10-11)।

उसके प्रेम की तीक्ष्ण धार है —  हमें नष्ट करने के लिए नहीं, किन्तु हमें उन सभी बातों से अलग करने के लिए है जो हमारे लिए खतरा हैं। ये सुधार, जिन्हें हम अपने क्रोधित परमेश्वर के प्रहारों के रूप में अनुभव करते हैं, वास्तव में, उसके प्रेम के असंभाव्य प्रमाण हैं। जैसा कि केल्विन ने कहा,

यह एक आपार सान्त्वना की बात है — कि वे दण्ड जिनके द्वारा हमारे पापों की ताड़ना की जाती है, परमेश्वर के क्रोध का नहीं, किन्तु उसके पितृ प्रेम के प्रमाण हैं, और साथ ही हमारे उद्धार की सहायता के लिए है, क्योंकि परमेश्वर हम से इसलिए क्रोधित है क्योंकि हम उसके पुत्र हैं, जिन्हें वह नाश होने के लिए नहीं छोड़ेगा।

वह हमें नाश होने के लिए नहीं छोड़ेगा। जब हम चट्टानों की ओर भटकते हैं, तो वह हमें अपनी छड़ी से स्वर्ग की ओर खींचता है। जो “प्रेम के ईश्वर” की महिमा लगती है — हमारे अपने मार्ग पर हमें छोड़ दिया जाना — वास्तव में, उसका क्रोध है, जो इस रीति से सुनाई देता है: “परमेश्वर ने उन्हें छोड़ दिया . . . उन्हें छोड़ दिया . . उन्हें दे दिया” (रोमियों 1:24, 26, 28)।

मृत्यु भी प्रेम हो सकती है?

इसी कारण तुम में से बहुत से निर्बल और रोगी हैं और बहुत-से सो भी गए . . . परन्तु प्रभु दण्ड देकर हमारी ताड़ना करता है कि हम संसार के साथ दोषी न ठहराए जाएँ। (1कुरिन्थियों 11:30, 32)

जब हम विनाश की ओर भटकते हैं, परमेश्वर का प्रेम चुपचाप, सन्तोष से नहीं बैठता। वह खड़े होकर अपनी दुल्हन को वेश्यावृत्ति करते हुए देखता है। यह हमें ढूँढता है। हमें छुड़ाता है। हमें धोता है। हमें परिवर्तित करता है। हमें अनुशासित करता है। और कभी-कभी यह हमें मार देता है।

कुरिन्थियों के कुछ लोगों के लिए ऐसा प्रेम बिना माँगे के आया। उन्होंने अयोग्य रीति से प्रभु-भोज खाना आरम्भ किया। उन्होंने स्वयं की जाँच नहीं की। उन्होंने न्याय खाया और पिया। परमेश्वर ने उन्हें कैसे प्रतिउत्तर दिया?  प्रेरित बताता है “इस कारण, “तुम में से बहुत से लोग निर्बल और रोगी हैं, और कुछ मर गए हैं ।” कुछ लोग परमेश्वर के अनुशासन के कारण अस्वस्थ थे। कुछ निर्बल थे। अन्य मर गए। परमेश्वर द्वारा अपनी कलीसिया को अनुशासित करने के कारण अन्तिम संस्कार किए गए।

हमें मृत्यु तक अनुशासित क्यों किया जाएगा? “जिससे कि संसार के साथ-साथ हम पर भी दोष  न लगाया जाए।” मृत्यु से भी निकृष्ट कुछ है। परमेश्वर का प्रेम कभी-कभी हमारे प्राणों को बचाने के लिए हमारी सासें रोक देता है। यह प्रेम, हमारी उथली धारणाओं के विपरीत, एक महासागर है, जो उग्र और सुन्दर है। यदि परमेश्वर ने हमसे इस प्रकार प्रेम किया होता जैसा कि हम हम स्वयं करते हैं, तो हम नाश हो जाते।

परमेश्वर का प्रेम हमारी अनुभव की गई आवश्यकताओं के आस-पास नहीं घूमता है। उसके मन में हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ बातें है, न कि विश्रामदायक बातें।

परमेश्वर के द्वारा प्रेम किया जाना

परमेश्वर का प्रेम क्या ही भयानक और अद्भुत है। यह परमेश्वर अपने लोगों को प्राप्त करने के लिए इतना गम्भीर है कि वह उन्हें सर्वदा के लिए खिलाने हेतु उन्हें भूखा रखेगा, उन्हें सर्वदा के लिए सम्भालने हेतु उन्हें अभी मार देगा। उसके शत्रु उसे दानव कह सकते हैं, परन्तु उसके सन्त गाते हैं, “तेरी करूणा जीवन से भी उत्तम है, मेरे होंठ तेरी प्रशंसा करेंगे” (भजन 63:3)।

परमेश्वर के द्वारा प्रेम किए जाने का अर्थ है पवित्र बनाया जाना, स्वर्ग के लिए तैयार किया जाना, अनन्तकाल के लिए उपयुक्त किया जाना, इस संसार के गरजते जंगल के माध्यम से, यरदन नदी के पार, लाया जाना, और एक नई सृष्टि के प्रतिज्ञा के देश के भीतर सुरक्षित किया जाना। यह प्रेम हमें उसकी उपस्थिति के लिए तैयार करने वाले धक्कों, चोटों और लहू के बहने से नहीं बचाएगा।

यह माँग करना कि परमेश्वर के प्रेम को हमारी जैसी भी स्थिति है, उससे सन्तुष्ट होना चाहिए, यह माँग करने के जैसा है कि परमेश्वर को परमेश्वर होना बन्द कर देना चाहिए: क्योंकि परमेश्वर वह है जो वह है, हमारे वर्तमान चरित्र के कुछ कलंक उसके प्रेम को बाधित करते होंगे और परमेश्वर में घृणा उत्पन्न करते होंगे, और क्योंकि वह पहले से ही हमसे प्रेम करता है, उसे हमें प्रेम किये जाने योग्य बनाने के लिए श्रम करना होगा। (सी.एस. लुईस, पीड़ा की समस्या (The Problem of Pain), 41)

और वह ऐसा ही करता है। हमें क्षमा करने के बाद, वह हमें सुन्दर बनाता है। वह सब परिस्थितियों को मोड़ देता है, सब कुछ  भलाई के लिए कार्य करता है — प्रत्येक घाव और प्रत्येक आनन्द को— उसके पुत्र की स्वरूप के अनुरूप होने की हमारी अनन्त महिमा के लिए (रोमियों 8:28-29)।

परमेश्वर का प्रेम उसकी सन्तानों को वहाँ गले लगाता है जहाँ वे वर्तमान में बैठे हैं (वह हमारे लिए तब मरा जब हम अधर्मी ही थे) — हम अपने आप को उसके प्रेम के योग्य नहीं बनाते हैं; हम ऐसा नहीं कर सकते हैं। परन्तु उसका प्रेम, जब हम उसको मिल जाते हैं, तो वह हमें वहीं नहीं छोड़ेगा जहाँ हम हैं — हम प्रेम में उसके सामने पवित्र और निर्दोष होने के लिए ठहराए गए हैं।

उसके सम्पूर्ण मन और सम्पूर्ण प्राण से

फिर भी इसका अर्थ यह नहीं है कि वह समान रूप से आशीष देता है और चोट पहुँचाता है, न ही वह हमारे रोने या हमारी पीड़ा के प्रति उदासीन रहता है। सच्चाई ठीक इसके विपरीत है। इस्राएल के लिए यहोवा की ताड़ना के विषय में एक हृदयविदारक विलाप के मध्य में, यिर्मयाह हमें स्मरण दिलाता है,

प्रभु सर्वदा अस्वीकार करता न रहेगा, चाहे वह दुख भी दे, फिर भी अपनी अपार करुणा के अनुसार दया भी करेगा; क्योंकि वह मनुष्यों को मन से न तो पीड़ा पहुँचाता, और न दुख देता है। (विलापगीत 3:31-33 )

“वह अपने मन से पीड़ा नहीं पहुँचाता है।” हमें चोट पहुँचाने में उसकी प्रसन्नता नहीं है। वह उस लड़के के समान नहीं है जो खाली समय में सूक्ष्मदर्शी से कीड़ों को जलाता है। जब वह हम पर भारी से भारी पीड़ा देता है, तब भी ऐसा करने में उसका आनन्द नहीं है। किन्तु, यिर्मयाह कलीसिया के प्रति परमेश्वर के हृदय का वर्णन इस प्रकार से करता है:

मैं उनके साथ अनन्तकाल की यह वाचा बान्धूँगा कि उनकी भलाई करने से कभी न फिरूँगा और मैं अपना भय उनके हृदयों में डालूँगा जिससे वे मुझ से कभी विमुख न हों। मैं आनन्दपूर्वक उनकी भलाई करूँगा, और अपने सम्पूर्ण मन और सम्पूर्ण प्राण से  वास्तव में उन्हें इस देश में स्थापित करूँगा। (यिर्मयाह 32:40-41)

यह प्रेम  — एकमात्र प्रेम जो हमें नरक से बचाने के लिए, हमें उसकी दृष्टि में प्रसन्न करने के लिए, हमें अनन्त काल तक प्रसन्न करने के लिए पर्याप्त रीति से सामर्थी है — हमें हमारे पाले हुए पापों और विनाशकारी कार्य में अकेला नहीं छोड़ता है। उसका प्रेम हम में भय उत्पन्न करता है कि कहीं हम उससे विमुख न हो जाएँ।  वह अपने सम्पूर्ण हृदय और सम्पूर्ण प्राण से  चाहता है कि हम वहाँ हो जहाँ वह है।

जब यीशु ख्रीष्ट हमारे पापों के लिए परमेश्वर के क्रोध को सहने आया तो उसने अपने लोगों के लिए अपने हृदय की अथाह गहराइयों को एक बार और सर्वदा के लिए प्रमाणित कर दिया। हमें इस बात पर आश्चर्य नहीं करना चाहिए कि परमेश्वर हमें हमारे पापों के लिए कुचल देगा; किन्तु हमें इस बात पर आश्चर्य करना चाहिए कि उसका प्रेम हमारे लिए अपने पुत्र को कुचल देगा। भले ही परमेश्वर हमारे भलाई के लिए हमें कैसे भी कष्ट देता है, सबसे भारी प्रहार भी हमारे पाप के लिए उपयुक्त नहीं हैं। क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया कि उस ने अपना एकलौता पुत्र दे दिया।

ग्रेग मोर्स desiringgod.org के लिए एक कर्मचारी लेखक हैं और बेथलहम कॉलेज और सेमिनरी के स्नातक हैं। वह और उसकी पत्नी, अबीगैल, सेंट पॉल में अपने बेटे और बेटी के साथ रहते हैं।

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