आओ, हम साथ मिलकर प्रभु की आराधना करें।

विश्वासियों के लिए इस पृथ्वी पर परमेश्वर के लोगों के साथ, उसकी प्रजा के रूप में एक साथ उसकी स्तुति-आराधना करना बहुत ही अद्भुत आनन्द का विषय है! इसलिए जब विश्वासी रविवार को आराधना के लिए कलीसियाई रीति से इकट्ठे होते हैं तो यह स्वर्ग में होने वाले परमेश्वर के लोगों द्वारा आराधना किए जाने की एक झलक प्रदर्शित करते हैं। कलीसियाई आराधना हमारे लिए अदुभुत है क्योंकि सब प्रकार के लोग केवल यीशु के कारण एक परिवार होकर परमेश्वर की स्तुति- प्रशंसा करती है। परमेश्वर की इच्छा यह है कि उसकी प्रजा उसकी आराधना साथ मिलकर करे, तो आइये विचार करें कि विश्वासियों को क्यों साथ में मिलकर परमेश्वर की आराधना करनी चाहिए!

परमेश्वर हमारे जीवन का स्रोत है: बाइबल प्रमाण देती है कि हम परमेश्वर के द्वारा अस्तित्व में आए हैं। उसने हमें रचा है, उसने हमें अपनी श्वाँस दी है। उसी की इच्छा और योजना में हम चलते- फिरते और अपने सारे कार्यों को कर पाते हैं। हमारा प्राण उसके हाथों में है। कुछ भी नहीं है जो उसके नियन्त्रण में न हो। वह सृष्टिकर्ता है इसलिए वह राज्य करता है और हम सब उसके अधीन हैं। हम अस्तित्व में परमेश्वर की इच्छा में आए हैं, इसलिए हमें उसके प्रति आभार प्रकट करते हुए उसकी आराधना करना है। इस कारण, जब हमें सन्तों के साथ मिलकर आराधना करने का सौभाग्य मिला है तो इस बात के लिए कृतज्ञ हों! परमेश्वर जो है और जो वह करता है, उसके लिए अवश्य ही हम उसको सराहें

यदि हमारा आत्मिक जन्म हुआ है और हम आज शारिरिक रूप से जीवित हैं तो हम परमेश्वर की आराधना अवश्य करेंगे।

परमेश्वर हमारा राजा है: परमेश्वर ने केवल हमारी सृष्टि ही नहीं की वरन् जब हम उससे पाप के कारण दूर थे, उसकी प्रजा कहलाए जाने से वंचित थे, तथा उसके लोगों से दूर भी थे, तब उसने अपनी दया दिखाई। उसने हमसे प्रेम किया और हमें यीशु के द्वारा अपनी सन्तान कहलाने का सौभाग्य दिया। अब यीशु के कारण परमेश्वर हमारा पिता है। वह हमारा राजा है, और उसकी हम प्रजा हैं, ऐसी प्रजा जो उसके पुत्र के लहू द्वारा खरीदी गई है। अब हम उसके राज्य की भेड़ें हैं वह हमारा चरवाहा है (भजन 100:3)।

परमेश्वर ने हमें बचाया है: यदि हम अपने जीवन के विषय में विचार करें तो हम पाएंगे कि हमारे पास ऐसा कोई कारण नहीं है कि हम परमेश्वर की स्तुति न करें! परमेश्वर ने हम पर इतने उपकार किए हैं कि उस उन उपकारों की गणना भी नहीं कर सकते! स्मरण रखिए, उसी के द्वारा हम अस्तित्व में हैं। हम उसे कुछ और नहीं चढ़ाते वरन कृतज्ञता के रूप में उसे स्तुति प्रशंसा की भेंट अर्पित करते हैं। वास्तव में तो हमारा पूरा जीवन ही उसका है, और उसी के लिए है। हम अपने जीवन को देखें तो हमारा हृदय उसकी महिमा करने के लिए बाध्य होगा क्योंकि यीशु हमारे जैसे भक्तिहीनो, निर्बलों, शत्रुओं, पापियों, आशारहित, परमेश्वर रहित, उसके राज्य से वंचित लोगों के लिए इस संसार में क्रूस पर मरने के लिए आ गया। (रोमियो 5:1-11, इफिसियों 2:11-13)

परमेश्वर ने हमें सौभाग्य दिया है कि हम उसके सन्तों के साथ मिलकर अपने एकमात्र उद्धारकर्ता की आराधना करें।

परमेश्वर हमारे अस्तित्व को बनाए रखेगा: उसने हमें अन्धकार के राज्य से निकाला ताकि अपनी उपस्थिति में ज्योति में सदाकाल तक हमें रखे। अपने अनुग्रह में वह हमें छुड़ाता है और प्रतिदिन हमें अपने अनुग्रह में जीवन जीने की शक्ति प्रदान करता है। उसने हमें पवित्र किया है और हम उसी के द्वारा अस्तित्व में सदाकाल तक रहेंगे।

परमेश्वर की प्रजा होने के नाते आइये हम अपने राजा में आनन्दित हों और उसकी महिमा के लिए स्तुति-आराधना की भेंट अपने शब्दों, कार्यों और सम्पूर्ण जीवन से चढ़ायें। आइये हम उसके लोगों अर्थात उसकी पवित्र प्रजा के साथ परमेश्वर का गुणानुवाद करें, उसकी प्रशंसा करें, उसकी करूणा और उसके उपकारों के प्रति आभारी हों। जब उसने हमें यह अवसर दिया है कि हम इस पृथ्वी पर उसके सन्तों के साथ मिलकर उसकी आराधना करें तो अवश्य ही हम उसकी प्रजा के रूप में कलीसियाई आराधना के लिए उत्साहित रहें!

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