सुसमाचार: परमेश्वर प्रसन्नचित्त है
<a href="" >जॉन पाइपर द्वारा भक्तिमय अध्ययन</a>

संस्थापक और शिक्षक, desiringGod.org

. . .परमधन्य परमेश्वर का महिमामय सुसमाचार . . .(1तीमुथियुस 1:11)

यह 1 तीमुथियुस में एक सुन्दर वाक्याँश है, जो बाइबल के प्रचलित शब्दों की चिर-परिचित सतह के नीचे छिपा हुआ है। परन्तु जब आप इस पर ध्यान लगाते हैं, तो वह ऐसा सुनाई देता है: “प्रसन्नचित्त  परमेश्वर की महिमा का सुसमाचार।” यहाँ पर “धन्य” शब्द, वह शब्द नहीं है जिसका अर्थ है “स्तुति हो”, परन्तु वह शब्द है जिसका अर्थ है “प्रसन्नचित्त।”

परमेश्वर की महिमा का एक बड़ा भाग उसकी प्रसन्नता है। 

प्रेरित पौलुस के लिए यह अकल्पनीय बात थी कि परमेश्वर अनन्त आनन्द से वंचित होकर भी सर्व-महिमावान रह सके। असीम रूप से महिमान्वित होने का अर्थ है असीम रूप से प्रसन्न होना। उसने इस वाक्याँश का प्रयोग किया, “प्रसन्नचित्त  परमेश्वर की महिमा” क्योंकि परमेश्वर के लिए यह महिमामय बात है कि वह जैसा है वैसे ही प्रसन्नचित्त हो। 

परमेश्वर की महिमा इस तथ्य में निहित है कि हम जितनी कल्पना भी नहीं कर सकते हैं वह उस से भी अधिक प्रसन्नचित्त है। अठारहवीं सदी के महान प्रचारक, जोनाथन एडवर्ड्स ने कहा था कि, “परमेश्वर की पूर्णता का एक भाग जो वह हम पर प्रकट करता है वह है उसकी प्रसन्नता। यह प्रसन्नता उसके स्वयं में आनन्दित एवं प्रफुल्लित होने में निहित है और मनुष्यों की प्रसन्नता भी इसी में है कि परमेश्वर में आनन्दित और प्रफुल्लित हों।”

और यह सुसमाचार का एक महत्वपूर्ण भाग है, पौलुस कहता है: प्रसन्नचित्त परमेश्वर की महिमा का सुसमाचार।” यह सुसमाचार है कि परमेश्वर महिमामय रूप से प्रसन्नचित्त है। कोई भी व्यक्ति अपना अनन्तकाल एक उदास और दुखी परमेश्वर के साथ नहीं बिताना चाहेगा। 

यदि परमेश्वर अप्रसन्न है, तो सुसमाचार का लक्ष्य — सर्वदा के लिए परमेश्वर के साथ रहना — एक सुखद लक्ष्य नहीं है, और इसका अर्थ है कि यह थोड़ा भी सुसमाचार नहीं है। परन्तु, वास्तव में, यीशु हमें एक प्रसन्नचित्त परमेश्वर के साथ अन्नतकाल बिताने के लिए आमन्त्रित करता है जब वह कहता है कि, “अपने स्वामी के आनन्द में सहभागी हो” (मत्ती 25:23)। 

यीशु ने यूहन्ना 15:11 में कहा, “ये बातें मैंने तुम से इसलिए कही हैं कि मेरा आनन्द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए।” यीशु ने कहा, और उसने जीवन जीया, और मर गया कि उसका आनन्द — परमेश्वर का आनन्द — हम में बना रहे और हमारा आनन्द पूरा हो जाए। इसलिए, सुसमाचार “प्रसन्नचित्त  परमेश्वर की महिमा का सुसमाचार” है। 

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