बुरे स्वामी की सेवा कैसे करें 
<a href="" >जॉन पाइपर द्वारा भक्तिमय अध्ययन</a>

संस्थापक और शिक्षक, desiringGod.org

इस सेवा को मनुष्य की नहीं पर प्रभु की जानकर सुइच्छा से करो, यह जानते हुए कि चाहे दास हो या स्वतन्त्र, जो जैसा अच्छा कार्य करेगा, वह प्रभु से वैसा ही प्रतिफल पाएगा। (इफिसियों 6:7-8)

इफिसियों 6:7-8 से अपने कार्य के सम्बन्ध में इन पाँच बातों पर ध्यान दीजिए।

1) सम्पूर्णता से प्रभु-केन्द्रित जीवन जीने के लिए बुलाहट।

जिस प्रकार का जीवन साधारणतः हम जीते हैं उसकी तुलना में यह आश्चर्यचकित करने वाली बात है। पौलुस कहता है कि हमारे सभी कार्य ऐसे किए जाने चाहिए जैसे कि यह कार्य ख्रीष्ट के लिए हैं, न कि किसी मानवीय निरीक्षक के लिए। इस सेवा को “मनुष्य की नहीं परन्तु प्रभु की जानकर” सुइच्छा से करो।

इसका अर्थ यह है कि हम कार्यस्थल पर जो भी करेंगे उसमें भी प्रभु के विषय में विचार करेंगे। हम पूछेंगे कि, प्रभु क्यों चाहेगा कि यह कार्य किया जाए? प्रभु इसे कैसे करवाना चाहेगा? प्रभु कब चाहेगा कि यह कार्य सम्पन्न हो जाए? क्या प्रभु इसे करने में मेरी सहायता करेगा? इसका यहोवा के सम्मान पर क्या प्रभाव पड़ेगा? दूसरे शब्दों में, एक ख्रीष्टीय होने का अर्थ है कि सम्पूर्णता से प्रभु-केन्द्रित जीवन जीना और कार्य करना। 

2) एक भला व्यक्ति बनने के लिए बुलाहट। 

प्रभु-केन्द्रित जीवन जीने का अर्थ यह है एक भला व्यक्ति बनना और भला कार्य करना। पौलुस कहता है, “सुइच्छा के साथ [इस सेवा को करो] … जो जैसा भला कार्य करता है।” यीशु ने कहा कि जब हम अपने प्रकाश को चमकने देंगे, तो मनुष्य हमारे “भले कार्यों” को देखेंगे और स्वर्ग में हमारे पिता की महिमा करेंगे (मत्ती 5:16)।

3) पृथ्वी पर अविचारशील स्वामियों के लिए भला कार्य करने की सामर्थ्य। 

पौलुस का उद्देश्य है ख्रीष्टियों को प्रभु-केन्द्रित उद्देश्यों के साथ उन निरीक्षकों के अधीन भी भला कार्य करने के लिए सक्षम बनाना जो कि विचारशील नहीं हैं। आप अपने कार्य में भला कैसे कर पाएँगे जबकि आपका स्वामी आपकी उपेक्षा या आलोचना करता है? पौलुस का उत्तर है कि: अपने स्वामी को अपने मुख्य निरीक्षक के रूप में देखना बन्द करिए और प्रभु के लिए कार्य करना आरम्भ करिए। इसे पृथ्वी पर अपने स्वामी द्वारा दिये गये कर्तव्यों में दर्शाईये। 

4) प्रोत्साहित होइए कि कुछ भी भला व्यर्थ में नहीं किया जाता है। 

सम्भवतः इन सभी में सबसे अद्भुत वाक्य यह है कि: “जो जैसा अच्छा कार्य करेगा वह प्रभु से वैसा ही प्रतिफल पाएगा।” ये तो अद्भुत बात है। सब कुछ! “जो जैसा अच्छा कार्य करेगा।”  प्रत्येक छोटे से छोटा अच्छा कार्य जो आप करते हैं उसे प्रभु देखता है, बहुमूल्य जानता है और उसे पुरस्कृत करता है।

और इसका प्रतिफल प्रभु आपको देगा। इस अर्थ में नहीं कि आपने कुछ भी अर्जित किया है — मानो कि आप उसको अपना ऋणी बना सकते हैं। वह तो आपका और संसार में सब कुछ का स्वामी है। वह हमारा थोड़ा भी ऋणी नहीं है। परन्तु वह स्वतन्त्र रूप से, हमें सभी भले कार्यों के लिए अनुग्रहपूर्वक प्रतिफल देने के लिए चुनता है।  

5) इस बात का प्रोत्साहन कि पृथ्वी पर महत्वहीन सामाजिक स्थिति स्वर्ग में महान प्रतिफल के लिए कोई बाधा नहीं है।

प्रत्येक भला कार्य जो आप करते हैं उसका प्रतिफल प्रभु आपको देगा — “चाहे वह दास हो या स्वतन्त्र।” आपका निरीक्षक आपके विषय में सम्भवतः यह विचार कर सकता है कि आप कुछ भी नहीं हैं — अर्थात् केवल एक बन्धुवा दास। या उसे ज्ञात भी नही हो कि आप अस्तित्व में हैं। यह बात महत्वपूर्ण नहीं है। प्रभु जानता है कि आप अस्तित्व में हैं। और अन्त में कोई भी विश्वासयोग्य सेवा व्यर्थ में नहीं जाएगी। 

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