पोर्नोग्राफी से कैसे सुरक्षित रहें

“तुम पवित्र बने रहो, क्योंकि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा पवित्र हूँ” (लैव्यव्यवस्था 19:20)।

बाइबल का जीवित परमेश्वर पवित्र है और वह अपने लोगों से पवित्रता की मांग करता है। हम मसीह के शिष्य होते हुए अपवित्रता में आनन्दित नहीं हो सकते हैं या उसमें जीवन नहीं बिता सकते हैं। हम तो उन बातों से प्रेम करेंगे जिनसे परमेश्वर प्रसन्न होता है। 

तो एक विश्वासी स्वयं को कैसे शुद्ध रख सकता है? भजन संहिता 119:9, “जवान अपनी चाल को कैसे शुद्ध रखे? तेरे वचन के अनुसार चलने से।” यह अद्भुत बात है! परमेश्वर ने अपने वचन में हमें स्वयं को शुद्ध रखने के तरीके बताए हैं। इसलिए हमें स्वयं को इस पाप से दूर रखने के तरीकों पर विचार करना चाहिए। यहाँ कुछ बातें हैं जिनके बारे में हम सदैव अपने चर्च में बड़ों और नवयुवकों  के साथ बात करते हैं।  

परमेश्वर के साथ एक घनिष्ठ सम्बन्ध: “तू अपने परमेश्वर यहोवा से अपने सारे मन, अपने सारे प्राण, तथा अपनी सारी शक्ति से प्रेम कर” (व्यवस्थाविवरण 6:5)। सभी पापों के विरोध में हमारी लड़ाई का आरम्भिक चरण परमेश्वर के साथ हमारे सम्बन्ध में पाया जाता है। यह तब होता है जब हमारा हृदय परमेश्वर के द्वारा नियंत्रित हो, ताकि हम पर पाप की पकड़ ढ़ीली हो जाए। थॉमस चाल्मर्स के शब्दों में, “परमेश्वर का प्रेम और संसार का प्रेम दो प्रकार के प्रेम हैं, इनमें न केवल प्रतिद्वंदिता की स्थिति में, बल्कि शत्रुता की स्थिति में भी वे इतने परस्पर-विरोधी हैं कि वे एक साथ एक ही चीज़ के नीचे नहीं हो सकते हैं।” इसलिए, आइए हम अपना समय परमेश्वर के ज्ञान में बढ़ने और अपने हृदयों को परमेश्वर से प्रेम करने में लगाए.। हमें परमेश्वर के वचन को पढ़ने और मनन करने में अनुशासित होना चाहिए। परमेश्वर से प्रेम करने और उसे प्रसन्न करने की अभिलाषा में हमें नियमित प्रयासरत रहना चाहिए।

प्रार्थना: “हम तो अपनी किसी योग्यता के कारण नहीं, पर तेरी… हम तो अपनी किसी योग्य बड़ी दया के कारण तुझ से अनुनय-विनय कर रहे हैं” (दानिय्येल 9:18)। प्रार्थना में हम अपना हृदय खोलते हैं और उसे परमेश्वर के सामने रखते हैं। प्रार्थना में, हम परमेश्वर से बात कर सकते हैं और उसकी इच्छा पर निर्भर हो सकते हैं। परीक्षा के समय स्वयं यीशु ने प्रार्थना किया था, और उसने अपने शिष्यों को सिखाया “जागते और प्रार्थना करते रहो कि परीक्षा में न पड़ो” (मरकुस 14:38)। इसलिए, हमें प्रार्थना में परमेश्वर से निवेदन करना चाहिए कि हम परीक्षा में न पड़ें (मत्ती 6:13)। और जब हम परीक्षा में पड़ते हैं, तो हम प्रार्थना करें और अपनी निर्बलता को स्वीकार करें, ताकि हमारा विवेक परमेश्वर के सामने संवेदनशील और शुद्ध बना रहे। प्रार्थना को छोटी बात न समझें परन्तु, निरन्तर प्रार्थना करते रहें (1 थिस्सलुनीकियों 5:17)। आइए हम पाप से बचने के लिए परमेश्वर की सहायता पर निर्भर हों।

उत्तरदायी होना: “क्योंकि यदि उनमें से एक गिरे तो दूसरा अपने साथी को उठाएगा। परन्तु उस पर हाय कि जब वह अकेला गिरे तो उसको उठानेवाला कोई दूसरा न हो” (सभोपदेशक 4:10)। अपने पास्टरों और विश्वासियों के साथ उत्तरदायी होना, हमें इस तरह के पापों से दूर रहने में सहायता करता है। एक विश्वासी के रूप में, आपको अपने अगुवों के साथ और दूसरों के साथ अपने जीवन को खोलना चाहिए। अपने संघर्षों के बारे में ईमानदारी से बात करें और उन्हें आपके हृदय, परिवार और व्यक्तिगत भक्ति (डिवोशनल) के जीवन के बारे में कठिन सवाल पूछने की अनुमति दें। आप अपने भाइयों को अनुमति दें कि वे आपकी ईश्वर भक्ति और पवित्रता में और अधिक वृद्धि करने में सहायता करें। आप उनके साथ अपने फोन और लैपटॉप के पासवर्ड को भी साझा कर सकते हैं जिससे की आपके पास कुछ छिपाने के लिए न हो। यह एक ऐसा पाप है जिससे आप अकेले नहीं लड़ सकते हैं। आपको अपने विश्वासी भाई और बहनों की आवश्यकता है।

स्व-अनुशासन और समय संचालन: “इसलिए सावधान रहो कि तुम कैसी चाल चलते हो – निर्बुद्धि मनुष्यों के सदृश नहीं वरन् बुद्धिमानों के सदृश चलो। समय का पूरा-पूरा उपयोग करो, क्योंकि दिन बुरे हैं” (इफिसियों 5:15-16)। यद्यपि हम पवित्र आत्मा की सहायता के बिना पाप से नहीं लड़ सकते हैं, परन्तु ख्रीष्टियों के जीवन में स्व-अनुशासन बहुत ही महत्वपूर्ण है। हम आलसी और निष्क्रिय होते हुए यह आशा नहीं कर सकते हैं कि हम शुद्ध बने रहेंगे। यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि हम अपने समय और मस्तिष्क को किन बातों से भर रहें हैं। अपने लिए एक समय-सारिणी बनाएं और उसी के अनुसार कार्य करने का प्रयास करें। प्रयास करें कि फोन, कम्प्यूटर, टीवी या इंटरनेट पर देर रात तक अकेले समय न बिताएं, बल्कि जल्दी सो जाएं, ताकि आप अगले दिन प्रातःकाल उठकर वचन पढ़ने और प्रार्थना करने में समय बिता सकें। आइए हम परमेश्वर पर भरोसा करें, और शुद्ध रहने और परमेश्वर की महिमा के लिए अपने समय को देने के लिए हर सम्भव प्रयास करें।

अपनी पत्नी या पति के साथ एक निकट सम्बन्ध: यदि आप विवाहित हैं, तो परमेश्वर ने आपको एक साथी दिया है जिससे आप अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे में खुल कर बता सकते हैं, वह ऐसा व्यक्ति है जिसके साथ आपके सबसे गहरे सम्बन्ध हैं। इसलिए, अपनी पत्नी या पति के साथ अपने सम्बन्ध को बढ़ाने के लिए समय निकालें और प्रयास करें। अपने पापों और संघर्षों के बारे में बात करने के उदाहरण के द्वारा उसकी अगुवाई कीजिए। अपनी पत्नी या पति से घर पर स्वयं को अनुशासित करने के प्रयासों में आपको जवाबदेही बनाए रखने में सहायता करने के लिए कहें, और उससे कहें कि वह आपके लिए प्रार्थना करे। आप अपने फोन, लैपटॉप, सोशल मीडिया अकाउण्ट, व्हाट्सएप इत्यादि के पासवर्डों को बताने के द्वारा अपनी पत्नी या पति के साथ पारदर्शी रहें। अपनी पत्नियों और पतियों के प्रति विश्वासयोग्य रहने का प्रयास करें और उनसे कुछ भी गुप्त न रखें।

यदि हम एक विश्वासी या मसीही के रूप में अपनी कलीसिया और अपने देश को पोर्नोग्राफी का विरोध करने में सहायता करना चाहते हैं, तो यह महत्वपूर्ण है कि हम स्वयं शुद्ध रहें। आइए हम भरसक प्रयास करें कि हम उस “पवित्रता के खोजी बनें जिसके बिना कोई प्रभु को नहीं देख पाएगा”(इब्रानियों 12:14)। और हमारे सभी प्रयासों में, आइए “हम [अपने] हृदय की चौकसी पूरे यत्न के साथ करे, क्योंकि जीवन का मूल सूत्र वही है” (नीतिवचन 4:23)। परमेश्वर हमारे हृदयों को शुद्ध रखें और हमें यौन पापों से भागने में सहायता करे। यह हमारे जीवन के लिए सत्य हो सके, और हमारे चर्च पवित्रता और शुद्धता में बढ़ते जाएं।

नोट: यदि आप एक ख्रीष्टीय हैं जो नियमित रूप से अश्लील वेबसाइटों पर जाने की आदत में हैं, तो आपको अपने पास्टर से, विश्वसनीय मित्रों से बात करने और सहायता लेने की आवश्यकता है। आपको परमेश्वर से, अपने परिवार और कलीसिया से क्षमा मांगने की आवश्यकता है। यदि वे आपको अनुशासित करते हैं तो कृपया क्रोधित या हताश न हों। वे ऐसा इसलिए कर रहें हैं क्योंकि वह आपसे प्रेम करते हैं। मेरे प्रिय भाई और बहन अपनी आत्मा के कारण, पश्चाताप करें, और क्षमा पाएं।

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