यीशु अच्छा चरवाहा है।

यीशु ख्रीष्ट ने कहा, “अच्छा चरवाहा मैं हूँ” जो हमें उसके अनोखेपन के विषय में सत्यों को स्पष्ट करता है और एक ख्रीष्टीय होने के नाते हम स्वयं को इस चरवाहे से जुड़ा हुआ पाते हैं। आइये ध्यान दें कि यीशु कैसे हमारे लिए अच्छा चरवाहा है!

यीशु अपनी भेड़ों को जानता है: वह अपनी भेड़ों को पूर्ण रीति से जानता है (यूहन्ना 10:14-15)। उसकी भेड़ों में वे सब प्रकार के लोग सम्मिलित हैं जो कहीं के भी हों, किसी भी पृष्ठभूमि के हों, कोई भी स्थिति से आए हुए क्यों न हों, वे सब उस चरवाहे की भेड़शाला में होने के कारण उसकी निज भेड़े हैं। वह अपनी भेड़ों की चिन्ता करता है। यीशु अच्छा चरवाहा है जो अपनी भेड़ों को बुलाता है और उसकी भेड़े उसके पीछे आती हैं।  

यीशु ऐसा चरवाहा नहीं है जो हमारी कठिन परिस्थितियों में हमें छोड़ कर भाग जाये वरन वह अपनी भेड़ों के लिए अपना प्राण तक दे देता है।

यीशु अपनी भेड़ों को तृप्त करता है: वह हमें भली वस्तुओं से तृप्त करता है। यदि यीशु हमारे पास है तो सब कुछ हमारे पास है। उसके होते हुए हमें चिन्ता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। यीशु ही अच्छा चरवाहा है जो हमारी आत्मा को सन्तुष्ट करता है। वह हमें उत्तम भोजन से तृप्त करता है। और यदि हमारे पास ऐसा चरवाहा है तो हमें केवल उस पर भरोसा रखना है, वह हमारे लिए पर्याप्त है।  

यीशु अपनी भेड़ों की सुरक्षा करता है: यीशु हमारे साथ है तो हमें किसी का भय नहीं है। हमारा कोई भी शत्रु हमें उसके हाथ से छीन नहीं सकता। जब मृत्यु के अन्धकार में से होकर जाते हैं तो वह अपनी करूणा से सम्भालता है। वह सान्त्वना प्रदान करता है। यीशु अपने लोगों (भेड़ों) को अनन्त जीवन प्रदान करता है इसलिए उसके लोग कभी नाश नहीं होंगे तथा कोई भी उन्हें उसके हाथों से छीन नहीं सकता। (यूहन्ना 10:28) 

यीशु अपनी भेड़ों के लिए अपना प्राण देता है: यीशु ऐसा चरवाहा नहीं है जो हमारी कठिन परिस्थितियों में हमें छोड़ कर भाग जाये वरन वह अपनी भेड़ों के लिए अपना प्राण तक दे देता है। वह बहुतों की फिरौती के मूल्य में प्राण देने आया (मत्ती 20:28)। यीशु स्वयं अपना प्राण अपने लोगों के लिए देता है। यीशु ने यह चुना कि वह हमारे लिए अपना प्राण दे (यूहन्ना 10:11-15,18)।

यीशु सच्चा चरवाहा है और वह हमारा साथ कभी भी नहीं छोड़ेगा। वह अनन्तकाल तक हमें अपने साथ रखेगा।

यीशु अपनी भेड़ों की अगुवाई करता है: हम चाहे कितनी भी कठिन परिस्थिति में से होकर जाएँ, चाहे हम भयंकर बिमारी में से होकर जाएँ, चाहे हम घोर सतावों के मध्य में से होकर जाएँ और यहाँ तक कि हम मर भी जाएं फिर भी वह हमारा साथ नहीं छोड़ेगा। वह हमें अपने साथ वहाँ ले जाएगा, जहाँ वह जाएगा। यहाँ तक कि उसने हमारा मार्गदर्शन करने के लिए वर्तमान में पवित्र आत्मा दिया है साथ ही उसने वचन हमारे हाथों में सौंपा है ताकि हम उसके मार्गदर्शन में उसकी महिमा के लिए जी सकें। 

यदि हमने यीशु पर विश्वास किया है और हम उसकी चारागाह की भेड़ हैं तो वह हमें कभी नहीं छोड़ेगा। चाहे हमें कोई समझे या न समझे, चाहे संसार में हमें वह न मिले जो संसार में सब चाहते हैं, चाहे हम कितनी भी दुख की परिस्थितियों में से होकर क्यों न जाएं! यदि यीशु हमारा चरवाहा है, तो वह वास्तव में हमारा ध्यान रखेगा। उस पर भरोसा करें और उसके पीछे चलते रहें! 

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