परमेश्वर ही एकमात्र बुद्धि का स्रोत है।

जब हम ख्रीष्टीय लोग बहुत कष्टों, विभिन्न परीक्षाओं के सघन कोहरे में से गुजर रहे होते हैं। जब हमें कुछ भी समझ में न आ रहा हो कि हम क्या करें, तब उस स्थिति में किस बात की सबसे अधिक आवश्यकता होती है? हमें ऐसी स्थिति के मध्य में, विश्वास में बने रहने के लिए सबसे अधिक परमेश्वर की बुद्धि की आवश्यकता होती है। क्योंकि सच्चा विश्वास हमारी भावनाओं पर नहीं, बल्कि परमेश्वर की सत्य प्रतिज्ञाओं के ज्ञान और समझ पर आधारित होता है।

बुद्धि परमेश्वर-प्रदत्त दान है। जो हम ख्रीष्टियों को परमेश्वर की इच्छा के अनुसार चलने, कठिन परिस्थिति में परमेश्वर के वचन के अनुसार निर्णयों को लेने में और जीवन जीने के लिए सहायता प्रदान करता है। हम सभी को परमेश्वर-प्रदत्त आत्मिक बुद्धि की आवश्यकता है।

1. हम सभी को बुद्धि की आवश्यकता है

“यदि तुम में से किसी को बुद्धि की कमी हो (याकूब 1:5 अ)

इसका सीधा सा अर्थ है उस समय  – उन सबको बुद्धि की आवश्यकता थी। आज – हमें भी बुद्धि की आवश्यकता है। हम सभी में बुद्धि की कमी है।

‘यदि तुम में से किसी के पास बुद्धि की कमी है’ वाक्य मानकर चलता है या हमें अवगत कराता है कि हम सभी ख्रीष्टीय लोगों को बुद्धि की आवश्यकता है, जो परीक्षाओं में होकर जा रहे हैं, उन्हें बुद्धि की आवश्यकता है। उन परीक्षाओं से निपटने का तरीका जानने के लिए उन्हें बुद्धि की आवश्यकता है। बुद्धि उन्हें परीक्षाओं को समझने और उसके मध्य विश्वास में बने रहने में सहायता प्रदान करती है। बुद्धि यह तय करने में सहायता प्रदान करेगी कि हमें विपरीत परिस्थितियों में क्या करना चाहिए।

हम सबको विभिन्न विषयों को समझने और उनके समाधान के लिए तथा परमेश्वर की इच्छा के अनुसार जीने के लिए बुध्दि की आवश्यकता है।

हमारे लिए आज, एक ख्रीष्टीय के रूप में हमें अपना जीवन जीने हेतु बुद्धि की आवश्यकता है, चाहे हम इसे स्वीकार करें या न करें। यदि आप किसी को सुझाव दे रहे हैं, तो आपको बुद्धि की आवश्यकता है। यदि आप किसी को अनुशासित कर रहे हैं, तो उसे करने के लिए बुद्धि की आवश्यकता है। यदि आप निर्णय ले रहे हैं, तो आपको बुद्धि की आवश्यकता है। यदि आप कलीसिया या किसी निजी कम्पनी में काम कर रहे हैं, तो आपको बुद्धि की आवश्यकता है। यदि आप छात्र हैं, तो आपको बुद्धि की आवश्यकता है। अगर आप विवाहित हैं और आपके पास बच्चे हैं, तो आपको बुद्धि की आवश्यकता है। यदि आप अपने विश्वास के लिए कष्टों में होकर जा रहे हैं, तो आपको बुद्धि की आवश्यकता है।

हम सभी को अपने जीवन में विभिन्न विषयों समझने और उनके समाधान के लिए तथा परमेश्वर की इच्छा के अनुसार जीने के लिए बुद्धि की आवश्यकता है। हम सभी को बुद्धि चाहिए। बुद्धि की यह आवश्यकता एक और प्रश्न की ओर ले जाती है, कि हमें बुद्धि कहाँ मिल सकती है? – याकूब 1:5 का दूसरा भाग, हमें इस अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न का उत्तर देता है?

2. परमेश्वर समस्त बुद्धि का स्रोत है

तो वह परमेश्वर से मांगे, और उसे दी जाएगी, (याकूब 1:5 ब)

जब याकूब कहता है कि वह परमेश्वर से मांगे, तो वह हमें मांगने हेतु निवेदन नहीं करता है, परन्तु आज्ञा देता है। यह हमारे लिए विकल्प नहीं है, परन्तु यह अनिवार्य है। याकूब कह रहा है कि यदि तुम में से किसी को बुद्धि की घटी हो, तो हम क्या करें? याकूब हमें बहुत ही सरल आदेश देता है – परमेश्वर से मांगो। यह बुद्धि हमें केवल परमेश्वर ही दे सकता है – क्योंकि परमेश्वर ही सर्वज्ञानी व सर्व-बुद्धिमान है, उसकी बुद्धि और ज्ञान बहुत ही अगाध हैं। वह समस्त बुद्धि का स्रोत है। (रोमियों 11:33)।

तो हम क्या करें? यीशु जो राजा सुलैमान से भी बड़ा या श्रेष्ठ है, कहते हैं – मांगो तो तुम्हें दिया जाएगा। ढूंढ़ो तो पाओगे (मत्ती 7:7)। बुद्धि मांगे बिना हम इसे प्राप्त नहीं कर सकते हैं। इसलिए परमेश्वर से बुद्धि मांगे। अपनी बुद्धि और ज्ञान पर भरोसा मत करो, परमेश्वर की बुद्धि की खोज करो और मांगो। चांदी और छिपे हुए खजाने क ज्ञान के जैसे ढ़ंढ़ो। परमेश्वर तुम्हें बुद्धि और परमेश्वर का ज्ञान और समझ देगा (नीतिवचन 2:3-6)। हमें संदेह के साथ परमेश्वर से बुद्धि नहीं मांगना चाहिए। परन्तु विश्वास और पूर्ण निश्चयता के साथ परमेश्वर से बुद्धि मांगना चाहिए, क्योंकि वह उदारता के साथ देता है।

परमेश्वर ही सर्वज्ञानी व सर्व-बुद्धिमान है, उसकी बुद्धि और ज्ञान बहुत ही अगाध हैं। वह समस्त बुद्धि का स्रोत है।

3. परमेश्वर उदारता से बुद्धि देता है (5 स)

जो बिना उलाहना दिए सब को उदारता से देता है। (याकूब 1:5 स)”

इसका अर्थ है- परमेश्वर बिना शर्त, बिना मोल-तोल किए बुद्धि देता है। वह कैसे देता है? वह भरपूरी से देता है। परमेश्वर दयालु और उदार है। वह अपने लोगों को स्वतंत्र रूप से और बिना सीमा के, वह सब कुछ देता है जिसकी उन्हें आवश्यकता होती है। परमेश्वर मांगने वालों को दोष नहीं देते। उन्हें बहुत अधिक या बहुत बार बार मांगने से डरने की आवश्यकता नहीं है। परमेश्वर उन्हें वह सब कुछ देने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं जिसकी उन्हें आवश्यकता होती है। वह अपने लोगों से उनकी बुद्धि की कमी के कारण कभी क्रोधित नहीं होता। वह प्रायः उन्हें देने के लिए उससे कहीं अधिक तत्पर होता है, जितना वे माँगने के लिए तत्पर होते हैं।

तो प्रिय भाइयो, अपने जीवन के सभी बातों में बुद्धि मांगें। परमेश्वर बुद्धि का स्रोत है, उससे बुद्धि मांगें। सच्ची बुद्धि परमेश्वर का भय मानना और परमेश्वर को जानना है। केवल एक ही रीति है जिससे आप परमेश्वर को जान सकते हैं – ख्रीष्ट यीशु के द्वारा। इसलिए, यीशु पर विश्वास करें और बुद्धि को प्राप्त करें।

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