यीशु मसीह हम पापियों को बचाने के लिए मनुष्य के रूप में दुख उठाया।

इसके पश्चात यीशु ने यह जानकर कि सब कुछ पूरा हो चुका, इसलिए कि पवित्रशास्त्र की बात पूरी हो, कहा, “मैं प्यासा हूँ।” वहाँ सिरके से भरा एक बर्तन रखा था, अतः उन्होंने सिरके में भिगाए हुए स्पंज को जूफे की टहनी पर रखा और उसके मुँह से लगाया। (यूहन्ना 19:28-29)

क्या आपने कभी इस बात पर विचार किया है कि यीशु ख्रीष्ट जिसने कहा, जो कोई प्यासा हो, मेरे पास आए, और पीए, जो कोई मुझ पर विश्वास करता है, जैसा कि पवित्रशास्त्र में कहा गया है, ‘उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियाँ बह निकलेंगी” (यूहन्ना 7:37-38)। इसके बाद हम देखते हैं यही यीशु ख्रीष्ट क्रूस पर लटका हुआ है, मनुष्य के पापों के लिए दुख उठा रहा है, और अत्यन्त पीड़ा में होकर कहता है, “मैं प्यासा हूँ”। 

जब यीशु ख्रीष्ट कहता है कि मैं प्यासा हूँ तो वह क्रूस पर लटके हुए नाटक नहीं कर रहा था, वह बहाना नहीं बना रहा था परन्तु वह वास्तव में अनुभव कर रहा था कि वह प्यासा है। उसे पानी की आवश्यकता है। जो कि इस बात को दिखाती है कि यीशु ख्रीष्ट परमेश्वर के साथ – साथ मनुष्य भी है। वह सौ प्रतिशत परमेश्वर और सौ प्रतिशत मनुष्य है।   

तो प्रश्न यह है कि यीशु ख्रीष्ट क्यों मनुष्य की देह में आए। इस विषय में मुख्य रीति दो कारण को देखेंगे। 

  1. वह मनुष्य इसलिए बना ताकि वह हमारे पापों के अपने आप को बलिदान कर सके। 

यीशु मसीह हमारे और आपके लिए मनुष्य बना ताकि वह हमारे पापों को अपने ऊपर लेकर बलिदान कर दे। बाइबल3 बताती है कि मनुष्य ने पाप किया था, मनुष्य ने परमेश्वर के विरोध में जीवन जीया इसलिए परमेश्वर का क्रोध, दण्ड मनुष्यों पर बना हुआ था। इस कारण मनुष्य को ही इस दण्ड चुकाना था। और हम पापी मनुष्य इस दण्ड को कभी नहीं चुका सकते थे। हमें एक सिद्ध मनुष्य की आवश्यकता थी जो हमारे बदले स्वयं को बलिदान कर दे, हमारे बदले परमेश्वर के क्रोध को सह सके जिसके कि हमको पापों की क्षमा मिल सके। बाइबल बताती है कि बिना लहू बहाए पापों की क्षमा नहीं है (इब्रानियों 9:22)।

हमारे पापों की क्षमा किसी पशु, बैल, बकरों के बलिदान के द्वारा सम्भव नहीं था। हमारे और आपके पापों की क्षमा के लिए एक सिद्ध मनुष्य के बलिदान की आवश्यकता थी। 

परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो कि उसने हमारे और आपके पापों के लिए अपने पुत्र यीशु मसीह को इस संसार में भेज दिया। यीशु मसीह जो परमेश्वर का पुत्र है अपनी इच्छा में होकर आज से लगभग 2022 वर्ष पूर्व इस संसार में स्वर्ग का सिंहासन का छोड़कर पृथ्वी पर मनुष्य देहधारी होकर आ गया। जिसने हमारे लिए पवित्र जीवन जीया। जिसने हमारे लिए क्रूस पर दर्दनाक और असहनीय पीड़ा को सह लिया। उसने हमारे लिए अर्थात उन लोगों के लिए जो उस पर विश्वास करेंगे उनके पाप और दण्ड को सह लिया और क्रूस पर मर गया जिससे कि वह अपनी मृत्यु के द्वारा हमारे लिए मृत्यु दण्ड की कीमत को चुका दे।

न केवल यह बात परन्तु दूसरी बात, वह इसलिए संसार में मनुष्य बन कर आया ताकि जो बात परमेश्वर ने पुराने नियम में आने वाले मसीहा के विषय में दाऊद के मुख कहलवाई वह यीशु मसीह के द्वारा पूरी हो सके। 

  1. वह मनुष्य इसलिए बने ताकि वह पवित्रशास्त्र की बात को पूरी कर सके। 

यीशु मसीह क्रूस पर भजन संहिता 69:21 को पूरा कर रहे हैं। भजन 69 में परमेश्वर का नियुक्त राजा दाऊद अपने शत्रुओं से घिरा हुआ है, लोग उसकी निन्दा कर रहे हैं, उसका मज़ाक बना रहे हैं, वह अत्यन्त दुखी है। और जब वह प्यासा हुआ तो उसके शत्रुओं ने उसको सिरका पिलाया। ठीक इसी प्रकार दाऊद के वंश से, यीशु मसीह जो परमेश्वर के द्वारा अभिषिक्त राजा है। वह हमारे पापों के लिए क्रूस पर लटका हुआ है। उसके शत्रु उसकी निन्दा करते हैं, उसका मज़ाक बनाते हैं। यीशु मसीह दाऊद से बढ़कर अत्यन्त पीड़ा में है।  और जब वह दर्द में, पीड़ा में है तो वह कहता है कि मैं प्यासा हूँ। और उसके पास वहाँ पर सैनिक लोग यीशु मसीह को पानी नहीं परन्तु सिरका देते हैं। जब यीशु मसीह को सिरका पिलाया जाता है तो वह बात जो पवित्र आत्मा ने दाऊद के द्वारा लिखवा दिया वह बात पूरी हो जाती है। यह परमेश्वर की योजना में था कि परमेश्वर का पुत्र यीशु मसीह जो अभिषिक्त राजा है, अपने लोगों के छुटकारे  के लिए दुख उठाए, मारा जाए, गाड़ा जाए और तीसरे दिन जी उठे। प्रभु यीशु मसीह हमारा ऐसा राजा है जिसने शरीर में दुख उठाया, क्रूस की मृत्यु को सह लिया। ताकि हमको और आपको उस दण्ड को, उस मृत्यु को न सहना पड़ा। यीशु मसीह  प्यासा हुआ जिसके द्वारा हमें जीवन का जल मिला है। क्योंकि यह जल हमें आत्मिक रीति से तृप्त करती है जिसके पीने के बाद हम कभी भी प्यासे नहीं होगें। इसलिए यीशु सामरी स्त्री से कहते हैं, “प्रत्येक जो इस जल [भौतिक जल] में से पीता है, वह फिर प्यासा होगा, परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूँगा, अनन्तकाल तक प्यासा न होगा उसमें अनन्त जीवन के लिए उमण्डने वाला जल का सोता बन जाएगा।” (यूहन्ना 4:13-14)। यीशु ख्रीष्ट हमारे लिए अनन्त उद्धार का स्त्रोत है। 

यदि आप यीशु ख्रीष्ट पर विश्वास करते हैं कि यीशु ख्रीष्ट ने आपके पापों की क्षमा के लिए मनुष्य बन कर आ गया और प्रेम में होकर स्वयं को बलिदान कर दिया तो आप यीशु ख्रीष्ट को धन्यवाद दीजिए तथा उसके प्रति कृतज्ञ रहिए। साथ ही साथ यीशु के लिए जीवन जीएँ क्योंकि वही है जो हमें जीवन का जल प्रदान करता है। 

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