यीशु किस बात से आनन्दित होता है
<a href="" >जॉन पाइपर द्वारा भक्तिमय अध्ययन</a>

संस्थापक और शिक्षक, desiringGod.org

उसी क्षण वह पवित्र आत्मा में अत्यन्त आनन्दित हुआ, और उसने कहा, “हे पिता, स्वर्ग और पृथ्वी के प्रभु, मैं तेरी स्तुति करता हूँ कि तू ने बुद्धिमानों और ज्ञानियों से इन बातों को गुप्त रखा पर बच्चों पर प्रकट किया। हाँ, हे पिता, यही तुझे भला लगा।” (लूका 10:21)

यह पद सुसमाचारों में मात्र दो स्थानों में पाए जाने वालों में से एक है जहाँ बताया जाता है कि यीशु आनन्दित हुआ। सत्तर चेले अपने प्रचार की यात्राओं से अभी लौटे हैं और उन्होंने यीशु को अपनी सफलता का विवरण दिया है।

ध्यान दें कि त्रिएकता के तीनों सदस्य यहाँ आनन्दित हो रहे हैं: यीशु आनन्दित हो रहा है, परन्तु लिखा है कि वह आत्मा में आनन्दित हो रहा है। इससे मैं समझता हूँ कि पवित्र आत्मा उसे भर रहा है और उसे आनन्दित होने के लिए प्रेरित कर रहा है। फिर पद के अन्त में परमेश्वर पिता के आनन्द का वर्णन किया गया है। लिखा है, “हाँ, हे पिता, यही तुझे भला लगा” — यही करने में तू आनन्दित हुआ!

अब, ऐसी बात क्या है जिससे कि सम्पूर्ण त्रिएकता एक साथ इस स्थान में आनन्दित होती है? यह परमेश्वर का स्वतन्त्र, चुनाव करने वाला प्रेम है जो बौद्धिक उच्च वर्ग से बातों को छिपाता है और बच्चों पर उन्हें प्रकट करता है। “हे पिता, स्वर्ग और पृथ्वी के प्रभु, मैं तेरी स्तुति करता हूँ कि तू ने बुद्धिमानों और ज्ञानियों से इन बातों को गुप्त रखा पर बच्चों पर प्रकट किया।”

और वह कौन सी बाते हैं जिसे पिता कुछ लोगों से छिपाता है और कुछ लोगों पर प्रकट करता है? लूका 10:22 उत्तर देता है, “केवल पिता के अलावा कोई नहीं जानता कि पुत्र कौन है।” तो इसलिए,जो बात पिता प्रकट करता है, वह है उसके पुत्र की आत्मिक पहचान।

जब सत्तर शिष्यों ने अपने सुसमाचारीय कार्य से लौटकर यीशु को अपने कार्य का विवरण दिया, यीशु और पवित्र आत्मा आनन्दित हुए कि परमेश्वर पिता ने, अपने भले अभिप्राय के अनुसार — अपने स्वयं के आनन्द के अनुसार — यह चुना है कि पुत्र को बच्चों पर प्रकट किया जाए और बुद्धिमानों से छिपाया जाए।

इसका अर्थ यह नहीं है कि केवल कुछ ही श्रेणी के लोग परमेश्वर द्वारा चुने जाते हैं। बात यह है कि परमेश्वर इस बात के लिए स्वतन्त्र है कि वह अपने अनुग्रह के लिए सबसे कम उपयुक्त प्रतीत होने वाले पात्र को चुन सकता है।

परमेश्वर उस बात के विरुद्ध जाता है जो मानवीय श्रेष्ठता को सही प्रतीत होती है। वह आत्म-निर्भर बुद्धिमानों से छिपाता है और सबसे असहाय और अनुपयुक्त लोगों पर प्रकट करता है।

जब यीशु देखता है कि पिता ऐसे लोगों को सेंतमेंत में प्रकाशन देता है और बचाता है जिनकी एकमात्र आशा निशुल्क अनुग्रह है, तो वह पवित्र आत्मा में हर्षित होता है और अपने पिता के चुनाव में आनन्दित होता है।

इसलिए, जब हम यह देखते हैं — वास्तव में, जब हम जानते हैं कि हम उन चुने हुए बच्चों में से हैं — तो हम भी उस आनन्दोल्लास में लग जाते हैं।

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