पवित्रता के संघर्ष में प्रमाणित हथियार

जब पौलुस शरीर के कार्यों को “आत्मा के द्वारा” (रोमियों 8:13) घात करने के लिए कहता है, मैं उसे इस प्रकार समझता हूँ कि हमें आत्मा के अस्त्र-शस्त्र में से एक हथियार का उपयोग करना चाहिए जो घात करने के कार्य में आता है; अर्थात, तलवार, “जो परमेश्वर का वचन है” (इफिसियों 6:17)।

इसलिए, जब शरीर भय या लालसा के कारण किसी पापमय कार्य को करने वाला होता है, तो हम आत्मा की तलवार लेकर उस भय और उस लालसा का घात करते हैं। मेरे अनुभव में इसका अर्थ मुख्य रूप से किसी उत्तम प्रतिज्ञा की सामर्थ्य द्वारा पाप की प्रतिज्ञा की जड़ को काटना है।

उदाहरण के लिए, जब मैं किसी अवैध यौन-सम्बन्धी सुख की ललक करना आरम्भ करता हूँ, तो उस तलवार–का प्रहार जिसने इस प्रतिज्ञा किए हुए सुख की जड़ को प्रायः काटा है वह यह है “धन्य हैं वे जिनके मन शुद्ध हैं, क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे” (मत्ती 5:8)। मैं उन सुखों को स्मरण करता हूँ जिन्हें मैंने तब चखा जब शुद्ध विवेक से परमेश्वर को स्पष्ट देखा, और मैं स्मरण करता हूँ पापों के सुख के स्वाद के बाद की अल्पकालीनता, उथलेपन और उत्पीड़न को, और उस स्मृति के द्वारा, परमेश्वर ने उस जय प्राप्त करने वाली पाप की सामर्थ्य को मार दिया। 

परमेश्वर का वचन धारण करते हुए पाप को मारने वाली सामर्थ्य का साधन होना सुन्दर बात है।   

“उत्तम प्रतिज्ञा की सामर्थ्य द्वारा पाप की प्रतिज्ञा की जड़ को अलग करना”

पाप के विरूद्ध सफल संग्राम की एक कुंजी है प्रलोभन के उस समय के अनुकूल उन प्रतिज्ञाओं का निकट होना। परन्तु कई बार ऐसा होता है कि जब हमारे मनों में परमेश्वर से पूर्णत: उपयुक्त वचन प्राप्त नहीं होता है। और एक आवश्यकतानुसार तैयार प्रतिज्ञा के लिए बाइबल पढ़ने का समय नहीं होता है।   

इसलिए जब भी भय या लालसा हमें भटकाने की धमकी देती है तो हमें तुरन्त उपयोग करने के लिए सामान्य प्रतिज्ञाओं के एक छोटे शस्त्रागार की आवश्यकता है। 

 मेरे सबसे प्रमाणित हथियारों में से यहाँ कुछ इस प्रकार हैं: 

1.   “मत डर, क्योंकि मैं तेरे साथ हूँ।”
“मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूं। इधर-उधर मत ताक, क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर हूं। मैं तुझे दृढ़ करूंगा और निश्चय ही तेरी सहायता करूंगा, और अपने धर्ममय दाहिने हाथ से तुझे सम्भाले रहूंगा” (यशायाह 41:10)।

मेरी सोच की तुलना में कहीं बढ़कर मैंने अपने प्राण में अनेक अजगरों को इस तलवार से मारा है। यह मेरे लिए एक अनमोल हथियार है।

2.   “वह हमें सब कुछ. . . कैसे नहीं देगा?”
“वह जिसने अपने पुत्र को भी नहीं छोड़ा परन्तु उसे हम सब लिए दे दिया, तो वह उसके साथ हमें सब कुछ उदारता से क्यों न देगा?” (रोमियों 8:32)।

मैंने कितनी ही बार इस पद के द्वारा परीक्षा के समय में स्वयं को विश्वास दिलाया है कि अनाज्ञाकारिता का प्रतिफल कभी भी “सब बातों” से अधिक नहीं हो सकता है।

3.  “मैं सदैव तुम्हारे साथ हूँ।”
“स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है…. और देखो, मैं युग के अन्त तक सदैव तुम्हारे साथ हूं” (मत्ती 28:18, 20)।

मैंने कितनी ही बार अपनी शिथिल आत्मा को इस आश्वासन के साथ दृढ़ किया है कि स्वर्ग और पृथ्वी का प्रभु आज भी मेरे साथ उतना ही है जितना कि वह पृथ्वी पर शिष्यों के साथ था!

4.  “मैं तुम्हें छुड़ाऊंगा।”
“और संकट के दिन मुझे पुकार: मैं तुझे छुड़ाऊंगा, और तू मेरी महिमा करेगा” (भजन संहिता 50:15)।

 जो बात इस हथियार को इतना प्रभावशाली बनाती है, वह यह है कि परमेश्वर द्वारा मेरी सहायता ने मुझे उसको महिमान्वित करने का अवसर प्रदान किया। कितना अद्भुत प्रबन्ध है। मुझे सहायता मिलती है, और उसे महिमा मिलती है!

5.  “मेरा परमेश्वर तुम्हारी प्रत्येक आवश्यकता पूरी करेगा।”
“मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्हारी प्रत्येक आवश्यकता पूरी करेगा” (फिलिप्पियों 4:19)।

“जब भी पाप आपको भटकाने की धमकी दे तो परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं का एक छोटा शस्त्रागार उपयोग करने के लिए तैयार रखें।”

इस पद का सन्दर्भ आर्थिक तथा भौतिक है। परन्तु यह सिद्धान्त प्रत्येक स्थिति पर लागू होता है। जिसकी हमें वास्तव में आवश्यकता है (केवल चाहिए नहीं) वह प्रदान किया जाएगा। और अंततः आवश्यकता क्या है? आवश्यकता वह है जो परमेश्वर की इच्छा को पूर्ण करने के लिए हमारे पास अवश्य होना चाहिए। अपने उद्धारकर्ता की बड़ाई करने के लिए हमारे पास क्या अवश्य होना चाहिए। वही हमें दिया जाएगा जब हम उस पर भरोसा करते हैं।

अपनी प्रतिज्ञाओं के शस्त्रागार को नियमित भरते रहें। परन्तु कभी भी उन थोड़ी चुनी हुई प्रतिज्ञाओं से अपनी दृष्टि मत हटाइए जिन्हें परमेश्वर ने आपके जीवन में आशीषित किया है। इन दोनों कार्यों को करें। पुरानी प्रतिज्ञा के साथ सदैव तैयार रहें। और प्रति भोर अपने लिए एक नई प्रतिज्ञा की खोज करें उस दिन के लिए। 

जॉन पाइपर (@जॉन पाइपर) desiringGod.org के संस्थापक और शिक्षक हैं और बेथलेहम कॉलेज और सेमिनरी के चाँसलर हैं। 33 वर्षों तक, उन्होंने बेथलहम बैपटिस्ट चर्च, मिनियापोलिस, मिनेसोटा में एक पास्टर के रूप में सेवा की। वह 50 से अधिक पुस्तकों के लेखक हैं, जिसमें डिज़ायरिंग गॉड: मेडिटेशन ऑफ ए क्रिश्चियन हेडोनिस्ट और हाल ही में प्रोविडेन्स सम्मिलित हैं।
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