हम प्रतीक्षा करते हैं, वह कार्य करता है

October 7, 2025

हम प्रतीक्षा करते हैं, वह कार्य करता है

प्राचीनकाल ही से न किसी ने सुना, न ही कानों तक उसकी चर्चा पहुँची और न आँखों से किसी ने तुझे छोड़ ऐसे परमेश्वर को देखा जो अपनी बाट जोहने वालों के लिए कार्य करता हो। (यशायाह 64:4)

इस सत्य से अधिक कुछ ही बातों ने मुझे अधिक आनन्द से भर दिया है कि परमेश्वर को मेरे लिए कार्य करने के द्वारा अपना परमेश्वर-त्व प्रकट करना भाता है, और मेरे लिए उसके द्वारा किया गया कार्य सदैव ही, उसके लिए, मेरे किसी भी कार्य के करने से पहले  और उसके नीचे  और उस में  पाया जाता है।

पहले तो यह सुनने में अहंकारी, और परमेश्वर को तुच्छ दिखाने वाला लग सकता है, अर्थात् यह कहना कि वह हमारे लिए कार्य करता है। परन्तु यह ऐसा केवल इसलिए प्रतीत होता है क्योंकि हम सोचते हैं कि इसका अर्थ यह है कि मैं मालिक (employer) हूँ और परमेश्वर को रोज़गार की आवश्यकता है। जब बाइबल बात करती है कि परमेश्वर हमारे लिए कार्य करता है तो उसका अर्थ यह नहीं है। यह बात यशायाह के मन में है ही नहीं जब वह कहता है कि परमेश्वर “अपनी बाट जोहने वालों के लिए कार्य करता” है (यशायाह 64:4)।

यह कहना कि परमेश्वर मेरे लिए कार्य करता है, इसका उचित अर्थ है कि मैं दिवालिया हूँ और मुझे सहायता की आवश्यकता है। मैं निर्बल हूँ और मुझे किसी सामर्थी जन की आवश्यकता है। मैं असुरक्षित हूँ और मुझे किसी रक्षक की आवश्यकता है। मैं मूर्ख हूँ और मुझे किसी बुद्धिमान जन की आवश्यकता है। मैं खोया हुआ हूँ और मुझे किसी छुड़ाने वाले की आवश्यकता है।

परमेश्वर मेरे लिए कार्य करता है  इसका का अर्थ है कि मैं कार्य को नहीं कर सकता हूँ। मुझे पूर्णतः सहायता की आवश्यकता है।

और यह परमेश्वर  को महिमा देता है, मुझे नहीं। दाता को महिमा प्राप्त होती है। सामर्थी जन को प्रशंसा प्राप्त होती है।

इन बातों को ध्यान से सुनें कि परमेश्वर आपके लिए कार्य करता है उसके विषय में बाइबल किस रीति से वर्णन करती है, और इसको सुनने के द्वारा आप स्वयं अपना भार उठाने के बोझ से स्वतन्त्र हो जाएँ। उसको वह कार्य करने दें।

  1. “न आँखों से किसी ने तुझे छोड़ ऐसे परमेश्वर को देखा जो अपनी बाट जोहने वालों के लिए कार्य करता हो” (यशायाह 64:4)।
  1. “न ही मनुष्यों के हाथों से [परमेश्वर] की सेवा-टहल होती है, मानो कि उसे किसी बात की आवश्यकता हो, क्योंकि वह स्वयं सब को जीवन, श्वास और सब कुछ प्रदान करता है” (प्रेरितों के काम 17:25)।
  1. “मनुष्य का पुत्र भी अपनी सेवा कराने नहीं वरन् सेवा करने और बहुतों की फिरौति के मूल्य में प्राण देने आया” (मरकुस 10:45)।
  1. “यहोवा की आँखें समस्त पृथ्वी पर फिरती रहती हैं कि जिनका हृदय सम्पूर्ण रीति से उसका है, वह उनके प्रति अपने सामर्थ्य को दिखाए” (2 इतिहास 16:9)।
  1. “यदि मैं भूखा होता तो तुझ से न कहता . . .। संकट के दिन मुझे पुकार: मैं तुझे छुड़ाऊँगा, और तू मेरी महिमा करेगा” (भजन 50:12, 15)।
  1. “तुम्हारे बुढ़ापे . . . के समय तक मैं तुम्हें उठाए रहूँगा। मैंने तुम्हें बनाया और मैं तुम्हें लिए फिरूँगा। मैं तुम्हें उठाए रहूँगा और छुड़ाता रहूँगा: (यशायाह 46:4)।
  1. “मैंने उन सब से बढ़कर परिश्रम किया, फिर भी मैंने नहीं, परन्तु परमेश्वर के अनुग्रह ने मेरे साथ मिलकर किया” (1 कुरिन्थियों 15:10)।
  1. “यदि घर को यहोवा ही न बनाए, तो बनाने वाले व्यर्थ परिश्रम करते हैं” (भजन 127:1)।
  1. “जो सेवा करे, उस सामर्थ्य से [सेवा] करे जो परमेश्वर देता है, जिस से सब बातों में परमेश्वर की महिमा हो” (1 पतरस 4:11)।
  1. “अपने उद्धार का काम पूरा करते जाओ . . . क्योंकि स्वयं परमेश्वर तुम्हारी इच्छा और कार्यों को प्रोत्साहित करने के लिए तुम में सक्रिय है” (फिलिप्पियों 2:12-13)।
  2. “मैंने बोया, अपुल्लोस ने सींचा, परन्तु परमेश्वर ने बढ़ाया” (1 कुरिन्थियों 3:6)।
साझा करें
जॉन पाइपर
जॉन पाइपर

जॉन पाइपर (@जॉन पाइपर) desiringGod.org के संस्थापक और शिक्षक हैं और बेथलेहम कॉलेज और सेमिनरी के चाँसलर हैं। 33 वर्षों तक, उन्होंने बेथलहम बैपटिस्ट चर्च, मिनियापोलिस, मिनेसोटा में एक पास्टर के रूप में सेवा की। वह 50 से अधिक पुस्तकों के लेखक हैं, जिसमें डिज़ायरिंग गॉड: मेडिटेशन ऑफ ए क्रिश्चियन हेडोनिस्ट और हाल ही में प्रोविडेन्स सम्मिलित हैं।

Articles: 407

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  1. हम प्रतीक्षा करते हैं, वह कार्य करता है (Current)

    जॉन पाइपर | October 7, 2025
  2. मृत्यु का पूर्वाभ्यास (Rehearsal)

    जॉन पाइपर | December 31, 2025
  3. तैयार और सशक्त किए गए

    जॉन पाइपर | December 30, 2025
  4. एक भयानक गन्तव्य

    जॉन पाइपर | December 29, 2025
  5. महिमा ही लक्ष्य है

    जॉन पाइपर | December 28, 2025
  6. आपका लक्ष्य क्या है?

    जॉन पाइपर | December 27, 2025
  7. आपदा के विषय में कैसे विचार करें

    जॉन पाइपर | December 26, 2025
  8. क्रिसमस के तीन उपहार

    जॉन पाइपर | December 25, 2025
  9. क्रिसमस के दो उद्देश्य

    जॉन पाइपर | December 24, 2025
  10. परमेश्वर का अवर्णनीय उपहार

    जॉन पाइपर | December 23, 2025
  11. कि तुम विश्वास करो

    जॉन पाइपर | December 22, 2025