ईश्वरविज्ञान की खरी शिक्षा ही ख्रीष्टीय एकता का आधार है।

हम में कई लोग इस अवधारणा से प्रभावित होंगे और मानते होंगे कि ईश्वरविज्ञान की खरी शिक्षा विभिन्न कलीसियाओं के मध्य और लोगों के मध्य विभाजन को उत्पन्न करती है, किन्तु प्रेम लोगों को जोड़ता या एक करता है। आइए हम संक्षिप्त लेख में जानें कि वास्तव में ख्रीष्टीय एकता का आधार क्या है।

ईश्वरविज्ञानीय खरी शिक्षा ही है जो हमें एकता के सूत्र में बांधती है और जो हमें एक-दूसरे से प्रेम करने के लिए प्रेरित करती है।

प्रिय भाई-बहनो, ईश्वरविज्ञान के खरे सत्य या खरी शिक्षा माला का ऐसा धागा है, जो मूंगे रूपी लोग एवं कलीसियाओं को एक साथ पिरोए रखता है। हमारी ख्रीष्टीय एकता का आधार प्रेम नहीं है, परन्तु ईश्वरविज्ञानीय खरी शिक्षा ही है जो हमें एकता के सूत्र में बांधती है, और जो हमें एक-दूसरे से प्रेम करने के लिए प्रेरित करती है।

खरी शिक्षा एक वृक्ष की जड़ के तुल्य है और प्रेम वृक्ष के फल के तुल्य है। बिना ईश्वरविज्ञान की खरी शिक्षा के सच्ची ख्रीष्टीय एकता की परिकल्पना करना असम्भव है, क्योंकि वास्तव में सच्चे प्रेम और एकता की जड़ें बाइबल की खरी शिक्षा में निहित होती हैं।

ख्रीष्टीय एकता का स्रोत या उद्गम बाइबल की खरी शिक्षा अर्थात् ईश्वरविज्ञान के सत्यों में पाया जाता है। इसलिए सच्ची ख्रीष्टीय एकता हेतु ईश्वरविज्ञान की खरी शिक्षा ही मूलभूत आधार है। कलीसियाई एकता की जड़ बाइबल एवं ईश्वरीयविज्ञानीय सत्यों में पाई जाती है, जो कलीसिया तथा एक-दूसरे को एकता के बन्धन में बांधती है।

ख्रीष्टीय एकता मानवीय सिद्धान्तों तथा रुचि पर नहीं आधारित है परन्तु हमारी एकता का एक आधार स्पष्ट रूप से ईश्वरविज्ञान की खरी शिक्षा है, जो एक कलीसिया को दूसरी कलीसिया से, एक जन को दूसरे जन से मेल कराती है अर्थात् एकता के बन्धन में पिरोती है।

ख्रीष्टीय एकता का स्रोत या उद्गम बाइबल की खरी शिक्षा अर्थात् ईश्वरविज्ञान के सत्यों में पाया जाता है।

कलीसिया की एकता खरी शिक्षा रूपी झरने से प्रवाहित होती है। खरी शिक्षा सम्पूर्ण बाइबल का सार है, जो बाइबल के प्रति विश्वसनीय और जीवन के लिए उपयोगी है। इसलिए आइए हम जानें कि बाइबल ख्रीष्टीय एकता के सन्दर्भ में क्या बताती है – इफिसियों 4:1-7

पद 1 में, प्रेरित पौलुस निवेदन करता है कि जिस बुलाहट से तुम बुलाए गए हो उसके योग्य चाल चलो। पद 2-3 में हमें बताता है कि हम कैसे उस बुलाहट के अनुसार योग्य चाल चलें – दीन होने के द्वारा, नम्र होने के द्वारा, धीरज के साथ प्रेम से एक दूसरे के प्रति सहनशीलता प्रकट करने के द्वारा, और मेल के बन्धन में आत्मा की एकता को सुरक्षित रखने हेतु यत्न करने के द्वारा। हम ख्रीष्टीय लोगों की मुख्य  बुलाहट – एक दूसरे प्रेम करना, एक दूसरे के प्रति सहनशीलता को प्रकट करना और कलीसिया की एकता को सुरक्षित रखने के लिए यत्न करना है।

ये सब हम क्यों करें? 4-7 पद में हमारे विश्वास के सत्यों की गहराईयों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए प्रेरित पौलुस उत्तर देता है कि “एक ही देह  है और आत्मा भी एक  है, ठीक उसी प्रकार अपनी बुलाहट की एक आशा  में तुम भी बुलाए गए थे। एक ही प्रभु, एक ही विश्वास, एक ही बपतिस्मा, और सब का एक ही परमेश्वर पिता  है, जो सब के ऊपर और सब के मध्य और सब में है।”

खरी शिक्षा सम्पूर्ण बाइबल का सार है, जो बाइबल के प्रति विश्वसनीय और जीवन के लिए उपयोगी है।

हमारे विश्वास के ये सत्य हमारी ख्रीष्टीय एकता के स्तम्भ हैं। केवल एक ही ख्रीष्ट की देह है। केवल एक ही आत्मा है जो हमें नया जीवन प्रदान करता है। केवल एक ही आशा है, जिसमें हम सब बुलाए गए हैं। केवल एक ही प्रभु यीशु ख्रीष्ट है, और उसी में एक ही विश्वास है। एक ही बपतिस्मा त्रिएक परमेश्वर के नाम में, सब का एक ही परमेश्वर पिता है। और परमेश्वर पिता, परमेश्वर पुत्र, और परमेश्वर पवित्र आत्मा एक ही परमेश्वर है।

हमारी ख्रीष्टीय एकता की जड़ें हमारे विश्वास की एकता में पाई जाती हैं। इसलिए हम मेल के बन्धन में आत्मा की एकता को सुरक्षित रखने हेतु बुलाए गए हैं। क्योंकि ख्रीष्ट की देह अर्थात् कलीसिया एक ही है, इसलिए हम भी एक होने के लिए बुलाए गए हैं।

इसलिए, प्रिय भाई-बहनो, मैं आपसे निवेदन करना चाहूँगा कि खरी शिक्षा को जानिए और उसके आधार पर कलीसियाई एकता को, आपस में एक दूसरे के साथ एकता को सुरक्षित रखने हेतु प्रयत्नशील रहें। क्योंकि खरी शिक्षा ही हमें कलीसिया की एकता हेतु प्रयत्नशील रहने और सुरक्षित रखने और पुन: स्थापित करने हेतु योग्य बनाती है।

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