पवित्रता के लिए खरी शिक्षा क्यों महत्वपूर्ण है?

सत्य के द्वारा उन्हें पवित्र कर-तेरा वचन सत्य है ( यूहन्ना 17: 17)।

आज पवित्रता को लेकर कई ख्रीष्टीय लोग भ्रमित है। अधिकाँश ख्रीष्टीय यह सोचते हैं कि पवित्रता के लिए हमें आत्मिक भाषा बोलना, आराधना में प्रदर्शन करना, सफेद वस्त्र पहनना, आत्मिक सभा में पंजीकरण करना, या शान्त तथा चुप रहने की आवश्यकता है। परन्तु पवित्रता के लिए हमें इन बातों की नहीं किन्तु खरी शिक्षा तथा परमेश्वर के वचन की आवश्यकता है। हम ख्रीष्ट में पवित्र किए गए हैं परन्तु अभी भी हम पाप के प्रभाव में है, इसलिए हमें पवित्रता में बढ़ने की आवश्यकता है। परमेश्वर का वचन जो खरा, पवित्र है, हमें दिन प्रति दिन शुद्ध करता है। 

पवित्रता का अर्थ है परमेश्वर के लिए पृथक किया जाना। यह सच है कि हम पवित्र किए गए हैं, परन्तु उसके बाद हम छोड़ नहीं दिए गए हैं जिससे कि हम अपनी इच्छा के अनुसार जीवन जी सकें। परमेश्वर की आज्ञा है कि हम पवित्र बनें। वास्तव में हम कह सकते हैं कि परमेश्वर हमें असाधारण, अलौकिक जीवन जीने के लिए बुलाया है। ऐसा जीवन जो परमेश्वर को प्रसन्न करता है और अनन्त काल के लिए फल देता है। इसके लिए हमें खरी शिक्षा की आवश्यकता है। परमेश्वर सर्वदा अपने लोगों को पवित्रता में बढ़ाने के लिए अपने वचन को उपयोग किया है। परमेश्वर सर्वदा इसी रीति से कार्य करता है। इसलिए, इस लेख में हम पवित्रता के लिए खरी शिक्षा की महत्वपूर्णता पर बात करेंगे।

परमेश्वर का वचन जो खरा, पवित्र है, हमें दिन प्रति दिन शुद्ध करता है। 

खरी शिक्षा क्या है?
खरी शिक्षा बाइबल के अनुसार विश्वासयोग्य परमेश्वर का वचन है। खरी शिक्षा बाइबलीय सिद्धांत है, परमेश्वर के विषय में सत्य की शिक्षा है न कि किसी मनुष्य की शिक्षा है। यह हमारे जीवन के लिए तथा प्रत्येक ख्रीष्टीय के लिए अत्यन्त उपयोगी है । 

खरी शिक्षा पवित्रता में बढ़ने के लिए हमारी सहायता करती है। 
खरी शिक्षा हमारी सहायता करती है, बाइबलीय सिद्धान्त को जानने के लिए जैसे कि परमेश्वर कौन है, हम कौन है। परमेश्वर पवित्र है, और हम पापी हैं और हमें पापों की क्षमा के लिए एक उद्धारकर्ता की आवश्यकता है। जब हम खरी शिक्षा को अपने दिमाग से समझते हैं, और हृदय से ग्रहण करते हैं, तब हमारी सोच, व्यवहार तथा आचरण में अन्तर दिखाई देता है। क्योंकि जितना अधिक हम परमेश्वर के चरित्र को जानेगें कि परमेश्वर कौन है, उतना ही अधिक हम अपने आपको पहचान पाऐंगे कि हम कौन है।

बॉबी जैमीसन अपनी पुस्तक “Sound Doctrine” में कहते है कि पवित्रता में बढ़ने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि आप पाप के बाइबलीय सिद्धान्त को समझें और उस लेंस के माध्यम से अपने जीवन को देखें। यदि आप नहीं जानते हैं कि आपकी समस्या क्या है, तो आप नहीं जान पाएँगे कि इसके विषय में क्या करना है। बाइबल का प्रत्येक सिद्धांत हृदय से ग्रहण किया जाता है और जीवन में लागू किया जाता है जो हमें परमेश्वर की इच्छा के अनुसार जीवन जीने में सहायता करता है। खरी शिक्षा हमें अपने विचारों, इच्छाओं, दृष्टिकोणों, शब्दों और कार्यों में स्वंय को पूरी तरह से परमेश्वर के प्रति समर्पित करने के लिए प्रेरित करती है- जिसे बाइबल “पवित्रता” कहती है। हम इस बात को जानते हैं कि सही शिक्षा हमें सही जीवन जीने की ओर ले जाती है। खरी शिक्षा खराई का जीवन जीने में सहायता करती तथा प्रेरित करती है।

खरी शिक्षा पवित्रता को प्रकट करने के लिए हमारे जीवन को प्रभावित करती है। 
हम जो विश्वास करते हैं तथा मानते हैं वह हमारे जीवन को प्रभावित करता है और वह हमारे कार्यों में दिखाई देता है। उदाहरण के लिए, दो व्यक्ति के बारे में विचार करें। एक व्यक्ति मानता है कि कोरोना है, उसे यह भी पता है कि थोड़ी सी असावधानी के कारण कैसे यह घातक एवं जानलेवा हो सकता है। दूसरी ओर, एक व्यक्ति नहीं मानता है कि कोरोना है। दोनों के व्यवहार में अन्तर स्पष्ट दिखाई देगा। दोनों के प्रतिउत्तर अलग होगें। एक व्यक्ति सावधानी बर्तेगा दूसरा ढिलाई करेगा तथा वह सामाजिक दूरी का पालन, मास्क का उपयोग नहीं करेगा या टीका नहीं लगवाएगा। इसी प्रकार से जो व्यक्ति खरी शिक्षा के प्रति समर्पित है तथा विश्वास करता है, उसे पता है कि परमेश्वर एक विश्वासी से क्या चाहता है, तथा वह जानता है कि सही क्या है और गलत क्या है। जैसे, परमेश्वर कौन है, पाप क्या है, यीशु कौन है और उसने क्या किया है। जब एक विश्वासी खरी शिक्षा पर विश्वास करता है और उसके अनुसार जीवन जीता है तो अवश्य ही उसके जीवन में फल दिखाई देंगे। परन्तु जब एक व्यक्ति को खरी शिक्षा पर विश्वास नहीं करता है, तो वह कैसे पवित्रता में बढ़ेगा। 

खरी शिक्षा पवित्रता को प्रकट करने के लिए हमारे जीवन को प्रभावित करती है चाहे कैसी भी परिस्थिति क्यों न हो। 

हम देख सकते हैं, प्रेरित पतरस विश्वासियों को लिखता है, परन्तु जैसे तुम्हारा बुलाने वाला पवित्र है, वैसे ही तुम भी समस्त आचरण में पवित्र बनो ( 1 पतरस 1:15)। जब वे विपरीत परिस्थिति से होकर जा रहे होते हैं, जब सब कुछ सही नहीं चल रहा है, जो बहुत से अन्यायों को सह रहे थे, जब वे सताव में होकर जा रहे थे, उनको यह नहीं कहता है कि चिन्ता मत करो, सब ठीक हो जाएगा, किन्तु वह उन्हें खरी शिक्षा के विषय में लिखता है जैसे, परमेश्वर का उद्धार के विषय में, जीवित आशा, चुनाव, नया जन्म, उत्तराधिकार, मसीही होने का अर्थ दुख उठाने के विषय में आदि। यह सच है कि खरी शिक्षा पवित्रता को प्रकट करने के लिए हमारे जीवन को प्रभावित करती है चाहे कैसी भी परिस्थिति क्यों न हो। 

खरी शिक्षा पवित्रता का जीवन जीने के लिए बुद्धि को प्रकट करती है। 
बाइबल के अनुसार पवित्रता न केवल यह भीतरी कार्य है तथा व्यक्तिगत है परन्तु यह आपसी सबन्धों में दिखाई देती है। हम कैसे एक दूसरे के साथ व्यवहार करते हैं, हमारा सबन्ध कैसे एक दूसरे का साथ है। खरी शिक्षा हमारी सहायता करती है, दूसरों से क्षमा करने के लिए, अपने शत्रुओं के लिए प्रार्थना करने के लिए, मन मुटाव के पाप से बचने के लिए, छोटी-छोटी बातों पर बुरा न मानने के लिए, अपनी अपेक्षा दूसरों को उत्तम समझने के लिए, दूसरों के साथ धैर्य रखने के लिए, विषम परिस्थिति में विश्वास में बने रहने के लिए, विपरीत परिस्थिति में परमेश्वर पर भरोसा रखने के लिए। अपनी अपनी पत्नी से प्रेम करने के लिए, अपने पति के अधीन रहने के लिए, बच्चों का पालन-पोषण करने के लिए और उन्हें प्रभु के भय में बढ़ाने के लिए।

इसलिए, पौलुस प्राचीनों को नियुक्त करने के लिए कलीसिया के सन्दर्भ में तीतुस से कहता है, वह (प्राचीन) उस विश्वासयोग्य वचन पर स्थिर रहे जो धर्मोपदेश के अनुसार है, जिससे कि वह खरी शिक्षा का उपदेश देने और विरोधियों का मुंह बन्द करने में भी समर्थ हो ( तीतुस 1:9 )। वह आगे कहता है, पर तू ऐसी बात कहा कर जो खरी शिक्षा के अनुसार है (तीतुस 2:9)। 

खरी शिक्षा हमारे जीवन के लिए लाभदायक है और पवित्रता के लिए आवश्यक है।

आज समकालीन मसीहत में बहुत सारी कलीसिया में सम्पन्नता तथा समृधि का सुसमाचार, सुख की भरपूरी का सुसमाचार प्रचार किया जा रहा है। इनका कहना यह है कि, यदि आप प्रभु यीशु के पीछे चलेंगे तो आप के जीवन में सब कुछ अच्छा हो जाएगा। ख्रीष्टीय होने के नाते आप के जीवन में कभी भी कोई समस्या नहीं आएगी। वे खरी शिक्षा का प्रचार नहीं करते हैं। वे पाप की समस्या को, परमेश्वर के न्याय के विषय में सम्बोधित नहीं करते है। वे अपने प्रचार में यीशु कौन है, और उसने क्या किया है बताते नहीं है। दु:ख की बात यह है कि आज कलीसिया में बहुत सारे गायक है और सम्पन्नता के प्रचारक है, बहुत कम सच्चे प्रचारक हैं जो खरी शिक्षा का प्रचार करते हैं। तो फिर, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि आज कलीसिया में लोग पवित्रता में नहीं बढ़ रहे हैं। 

खरी शिक्षा हमारे जीवन के लिए लाभदायक है और पवित्रता के लिए आवश्यक है। इस असाधारण, अलौकिक जीवन को जीने के लिए खरी शिक्षा की आवश्यकता है। यह पवित्रता का जीवन तभी सम्भव है जब यह परमेश्वर के वचन द्वारा संचालित हो। इसके लिए हमें खरी शिक्षा की आवश्यकता है। इसलिए प्रियों, खरी शिक्षा के प्रति अपने आपको समर्पित करें। अपने अगुवों के लिए प्रार्थना करें कि वे विश्वासयोग्य वचन पर स्थिर रहें, और खरी शिक्षा का प्रचार कर सकें। स्मरण रखें कि परमेश्वर अपने लोगों को पवित्रता में बढ़ाने के लिए सर्वदा अपने वचन का उपयोग करता है। परमेश्वर का धन्यवाद हो कि उसने हमारी सहायता के लिए पवित्रआत्मा, परमेश्वर का वचन दिया है जिससे कि वे हमारे पापों को उजागर करें, और हमें पवित्र बनाएँ। पवित्रता में बढ़ने के लिए परमेश्वर का वचन हमारी सहायता करता है। जब परमेश्वर पवित्र आत्मा हमें अपने वचन के द्वारा हमारे पापों को उजागर करता है, अपने पापों से पश्चाताप करें। कलीसिया में लोगों को अपने जीवन में आने दें। पाप के विषय में बात करें और पाप का अंगीकार करें। प्रभु हम सबकी सहायता करें।


  1. Bobby Jamieson, Sound Doctrine  ( Wheaton, Illinois: Crossway Books, 2013), 51,52.

साझा करें:

अन्य लेख:

यदि आप इस प्रकार के और भी संसाधन पाना चाहते हैं तो अभी सब्सक्राइब करें

"*" indicates required fields

पूरा नाम*