प्रेम के लिए खरी शिक्षा आवश्यक है।

मुझे स्मरण है कि जब मैं लगभग 7 या 8 वर्ष का था तो उस समय मेरा एक मित्र था। हम दोनों स्कूल साथ जाते थे, कक्षा में साथ बैठते थे, कभी-कभी कक्षा से भाग भी जाते थे। मैंने एक बार अपने घर से पैसे चुरा लिए और जब मैंने उसे बताया तो उसने कहा कि हम इन पैसों से बहुत सारा आनन्द उठा सकते हैं। पार्क जाकर हम आइसक्रीम खाएँगे। छोला भटूरा खाएँगे और वीडीयो गेम खेलेंगे। हम बहुत सारे मजे कर सकते हैं। उस समय मैं सोच रहा था कि ये मेरा बहुत पक्का मित्र है। यह मुझसे बहुत अधिक प्रेम करता है। परन्तु जब घर पर पता चला तो मेरी बहुत पिटाई हुई। 

हो सकता है कि आप इसे पढ़ कर हँसे। परन्तु क्या हम आत्मिक जीवन में इसी प्रकार से नहीं सोचते हैं? हम यह सोचते हैं कि यदि कोई मुझसे प्रेम करता है तो मुझे कुछ लाकर दे। या यदि कोई मुझसे प्रेम करता है तो जो मैं माँगू वह मुझे दे दे और किसी बात के लिए मना न करे, चाहे वह किसी भी प्रकार का कार्य हो। जब हम “प्रेम” शब्द का नाम सुनते हैं तो हो सकता है कि हमारे मन में विचार आये कि हम एक माता के विषय में विचार करते हैं जो अपने बच्चे को गोद में लिए हुए उसे लोरी सुना रही है। या एक प्रेमी और प्रेमिका के विषय में सोचते हैं जो अपने मन में यह ठानकर बैठे हैं कि एक दूसरे को बिना देखे जी नहीं पायेंगे। “प्रेम” की ये अभिव्यक्तियाँ मनुष्य पर केन्द्रित हैं।

 यदि किसी व्यक्ति का हृदय परिवर्तित हुआ है और यदि वह परमेश्वर के वचन को सही रीति से समझता है तो उसके जीवन से सच्चा प्रेम उमड़ेगा।

परन्तु ख्रीष्टीय होने के नाते, हम किस प्रकार से प्रेम के विषय में सोचते हैं? या दूसरी रीति से पूछे तो हमें प्रेम के विषय में किस रीति से सोचना चाहिए? हमारे प्रेम का आधार क्या है? बाइबल के अनुसार, हमारे प्रेम का आधार खरी शिक्षा है अर्थात परमेश्वर के वचन की खरी शिक्षा। यदि किसी व्यक्ति का हृदय परिवर्तित हुआ है और यदि वह परमेश्वर के वचन को सही रीति से समझता है तो उसके जीवन से सच्चा प्रेम उमड़ेगा। उसके जीवन से आत्मा के फल दिखाई देंगे जिसमें सर्वप्रथम प्रेम है।

तो हम इस लेख में “खरी शिक्षा से प्रेम उत्पन्न होता है” के अर्थ तथा व्यावहारिक जीवन में इसके प्रभाव पर ध्यान देंगे। 

प्रेम का उद्गम
“खरी शिक्षा प्रेम के लिए आवश्यक है” इस कथन का अर्थ क्या है? यह कथन इस बात का दृढ़ कथन करता है कि खरी शिक्षा अर्थात् परमेश्वर के वचन की सही शिक्षा ही सच्चे प्रेम को उत्पन्न करती है। जब हम सच्चे सुसमाचार को सुनते हैं तो परमेश्वर हमारे जीवन में कार्य करता है और हम जो आत्मिक रीति से मरे हुए थे परमेश्वर का आत्मा हमें नया जन्म दे देता है और हम अपने पापों से पश्चाताप करते हैं और यीशु ख्रीष्ट के क्रूस पर किए गए पूर्ण कार्य पर विश्वास करते हैं। अर्थात् सुसमाचार हमें बचाता है। परन्तु ख्रीष्टीय जीवन में बने रहने के लिए भी हमें प्रतिदिन सुसमाचार की ही आवश्यकता है। हमें परमेश्वर के सम्पूर्ण वचन की आवश्यकता है जिससे कि हम आत्मिक रीति से स्वस्थ्य हों। जब हम आत्मिक रीति से स्वस्थ्य होंगे तब ही हम वचन के अनुसार प्रेम दिखाऐंगे। 

वचन के अनुसार प्रेम कैसे दिखाई देगा? पौलुस इस प्रश्न का उत्तम रीति से उत्तर देता है। 

इसलिए प्रिय बालकों के सदृश परमेश्वर का अनुकरण करने वाले बनों, और प्रेम में चलो जैसे ख्रीष्ट ने भी हम से प्रेम किया और सुखदायक सुगन्धित भेंट बनकर हमारे लिए अपने आपको परमेश्वर के सम्मुख बलिदान कर दिया (इफिसियों 5ः1,2)।

ख्रीष्टीय जीवन में बने रहने के लिए भी हमें प्रतिदिन सुसमाचार की ही आवश्यकता है।

पौलुस विश्वासियों को प्रिय बालकों के समान प्रेम में चलने के लिए उत्साहित कर रहा है। वह यहाँ पर केवल नैतिक शिक्षा नहीं दे रहा है परन्तु वह विश्वासियों से बात कर रहा है जो ख्रीष्ट में उद्धार पाये हुए हैं। वह कहता है कि उन्हें प्रेम में चलना है। कैसे? ख्रीष्ट के समान। ख्रीष्ट ने हमसे प्रेम किया और हमारे लिए स्वयं को बलिदान कर दिया। सभी विश्वासी ख्रीष्ट के समान प्रेम करने के लिए बुलाए गए हैं। सच्चा प्रेम क्या है? किसी प्रचारक ने इस प्रकार कहा है, “सच्चे प्रेम में तीन तत्व पाये जाते हैं। पहला, यह हृदय का स्नेह है; दूसरा, यह इच्छाओं का समर्पण है; तीसरा, यह दूसरे के लिए स्वयं को बलिदान कर देना है।” खरी शिक्षा सच्चे प्रेम को उत्पन्न करती है।

खरी शिक्षा के जीवन के अलग-अलग क्षेत्र में प्रभाव।
प्रभु के एक सेवक ने बाइबल की खरी शिक्षा को दिखाया है कि ये कैसे हमें प्रेम करना सिखाती है। 

  1. परमेश्वर के विषय में खरी शिक्षा हमें परमेश्वर से प्रेम करने में सहायता करती है।
  1. मनुष्य के विषय में खरी शिक्षा हमें हमारे पड़ोसी से प्रेम करने में सहायता करती है।
  2. छुटकारे के विषय में खरी शिक्षा पतियों को अपनी पत्नियों से प्रेम करने में सहायता करती है।
  3. परमेश्वर के प्रेम के विषय में खरी शिक्षा हम विश्वासियों को परमेश्वर के लोगों से प्रेम करना सिखाती है।

ये शिक्षाएँ केवल एक हवा में की गई बातें नहीं है परन्तु यह खरी शिक्षा का परिणाम है। हम केवल तभी प्रेम कर पाँएगे जब हम परमेश्वर के प्रेम को समझेंगे। उसने हमसे प्रेम किया है। उसने हमसे तब प्रेम किया जब हम पापी ही थे और जब कोई हमारे लिए मरने के लिए तैयार नहीं था। हमारा प्रिय मित्र हमारे लिए नहीं मर सकता था। हमारे माता-पिता हमारे लिए नहीं मर सकते थे। मेरा भाई मेरे लिए नहीं मर सकता था परन्तु जब हम शत्रु ही थे तो ख्रीष्ट हमारे लिए मरा। यह है परमेश्वर का प्रेम।  

तो जब हम परमेश्वर की खरी शिक्षा का भोजन खाएगें जो हमें सामर्थ्य देगा कि हम प्रेम कर पाएँ। 

हम केवल तभी प्रेम कर पाँएगे जब हम परमेश्वर के प्रेम को समझेंगे।

आज बहुत सी कलीसियाएँ प्रेम के विषय में यह सिखाती हैं कि हम किसी के विषय में नकारात्मक बात इसलिए नहीं कहते हैं क्योंकि हम लोगों से प्रेम करते हैं। हम किसी पर दोषारोपण इसलिए नहीं करते हैं क्योंकि हम उनसे प्रेम करते हैं। उनके दृष्टि में प्रेम का अर्थ सत्य से समझौता करना है। हो सकता है कि वे ऐसी बात अपने मुख से न कहें परन्तु निष्कर्ष यही निकलता है। परन्तु मेरे मित्र, यदि आप ऐसी कलीसिया में हैं जहाँ प्रेम के नाम पर अपवित्रता को बढ़ावा दिया जा रहा है, जहाँ प्रेम के नाम पर पवित्रता के खोजी होने के स्थान पर व्यभिचार, चोरी तथा झूठे घमण्ड पर चुप्पी साध ली जा रही हो तो परमेश्वर का वचन आपसे आग्रह करता है कि ऐसी कलीसियाओं से दूर रहिए! ऐसे अगुवों की मत सुनिए क्योंकि ये केवल आपके कानों की खुजलाहट को दूर करते हैं। 

यदि आप एक सुसमाचार का प्रचार करने वाली तथा सुसमाचार के अनुसार जीवन व्यतीत करने वाली कलीसिया में हैं तो प्रभु का धन्यवाद हो। परन्तु मेरा आपसे प्रश्न है कि क्या आप परमेश्वर के प्रेम में बढ़ रहे हैं? क्या आप ख्रीष्ट के प्रेम को गहराई से समझ पा रहे हैं? जब आपका जीवन अस्त-वस्त है क्या आप उस स्थिति में परमेश्वर के लोगों से प्रेम कर रहे हैं? क्या आप लोगों के आत्मिक जीवन की चिन्ता करते हैं? क्या आप लोगों के साथ समय व्यतीत करते हैं, उनसे पूछते हैं कि वे किन पापों से संघर्ष कर रहे हैं? 

अपनी कलीसिया के लोगों की चिन्ता कीजिए, उनके लिए प्रार्थना कीजिए, समय दीजिए, और उन्हें अपने जीवन से सच्चा स्नेह दिखाइए। 

खरी शिक्षा पवित्रता तथा सच्चे प्रेम की ओर लेकर जाती है। ऐसी कलीसिया की खोज कीजिए जहाँ पास्टर अपनी कहानी नहीं सुनाते हैं परन्तु वे परमेश्वर की सम्पूर्ण वचन का प्रचार करते हों जिससे कि आप वचन पर आधारित प्रेम कर सकें क्योंकि खरी शिक्षा सच्चे प्रेम को उत्पन्न करती है।

साझा करें:

अन्य लेख:

 प्रबल अनुग्रह

अपने सिद्धान्तों को बाइबल के स्थलों से सीखें। इस रीति से वह उत्तम कार्य करता है

फेर लाए गए

परमेश्वर के लोगों के पास तब तक कोई आशा नहीं है जब तक परमेश्वर उन्हें उनके

यदि आप इस प्रकार के और भी संसाधन पाना चाहते हैं तो अभी सब्सक्राइब करें

"*" indicates required fields

पूरा नाम*