परमेश्वर आपकी देखभाल करता है

परमेश्वर आपकी देखभाल करता है

इसलिए परमेश्वर के सामर्थी हाथ के नीचे दीन बनो, जिससे कि वह तुम्हें उचित समय पर उन्नत करे। अपनी समस्त चिन्ता उसी पर डाल दो, क्योंकि वह तुम्हारी चिन्ता करता है (1 पतरस 5:6-7)।

भविष्य के विषय में चिन्ता करना क्यों घमण्ड का एक रूप है?

परमेश्वर का उत्तर कुछ इस प्रकार से सुनाई देगा (यशायाह 51:12 को आसान ढंग से व्यक्त  करते हुए): 

मैं — परमेश्वर, तुम्हारा सृष्टिकर्ता — मैं वही हूँ जो तुम्हें सान्त्वना देता है, जो तुम्हारी देखभाल करने की प्रतिज्ञा करता है; और जो तुम्हें धमकी देते हैं वे तो मनुष्य मात्र हैं जो मर जाते हैं। अतः, तुम्हारे भय का अर्थ निश्चय ही यह है कि तुम मुझ पर भरोसा नहीं करते हो — यहां तक कि तुम्हें इस बात का भी निश्चय नहीं है कि तुम्हारे संसाधन तुम्हारी देखभाल कर पाएंगे या नहीं, फिर भी तुम उस अनुग्रह पर जिसे मैं भविष्य में प्रदान करूँगा उसपर विश्वास करने के स्थान पर निर्बल आत्मनिर्भरता का विकल्प चुनते हो। इसलिए, तुम्हारे सारे भय के साथ कंपन —  यद्यपि निर्बल तो है — किन्तु घमण्ड को प्रकट करता है।

तो इसका उपचार क्या है? अपनी आत्मनिर्भरता से परमेश्वर-निर्भरता की ओर मुड़िये, और भविष्य में प्राप्त होने वाले उसकी अनुग्रह की प्रतिज्ञा की सर्व-पर्याप्त सामर्थ्य पर अपना विश्वास रखिये।

आप 1 पतरस 5:6–7 में देख सकते हैं कि चिन्ता घमण्ड का एक रूप है। इन पदों के बीच में व्याकरणीय सम्बन्ध पर भी ध्यान दें। “परमेश्वर के सामर्थी हाथ के नीचे. . . अपने आप को दीन करो. . . [अब, पद 7] अपनी समस्त चिन्ता  उसी पर डाल दो ।”  पद 7 कोई नया वाक्य नहीं है। यह एक अधीनस्थ वाक्यांश है जो इससे पहले के वाक्य से जुड़ा है। यह एक कृदंत (पार्टिसिपल) से प्रारम्भ होता है: “अपने आप को दीन करो. . . अपनी समस्त चिन्ता उसी पर डालने  (के द्वारा)।”

इसका अर्थ यह है कि अपनी समस्त चिन्ता परमेश्वर पर डालना एक रीति से अपने आप को परमेश्वर के सामर्थी हाथ के नीचे दीन करना है। यह ऐसा कहने के समान है, “शिष्टता से खाओ… मुंह बन्द करकेचबाते हुए ।” या “सावधानी से चलाओ. . . अपना ध्यान सड़क पर रखते हुए।” या “उदार बनो . . . त्योहारों पर किसी को आमन्त्रित करने के द्वारा।” या, “स्वयं को दीन करो. . . अपना भय परमेश्वर पर डालते हुए।”

स्वयं को नम्र करने का एक उपाय यह है कि हम अपनी सारी चिन्ताएं परमेश्वर पर डाल दें। जिसका अर्थ यह है कि आपकी चिन्ताओं को परमेश्वर पर डालने में एक बाधा  घमण्ड है। जिसका अर्थ यह है कि अनुचित चिन्ता घमण्ड का एक रूप है। चाहे यह कितना भी निर्बल दिखता हो या प्रतीत होता हो।

अब, अपनी चिन्ताओं को प्रभु पर डालना घमण्ड के विपरीत क्यों है? क्योंकि घमण्ड यह स्वीकार करना पसंद नहीं करता है कि उसे कोई चिन्ता है। या हम उसकी देखभाल स्वयं नहीं कर सकते हैं। और यदि घमण्ड को यह स्वीकार करना पडे़ कि उसके भय असहनीय हैं, तो फिर भी उसे यह स्वीकार करना नहीं भायेगा कि इसका उपचार किसी और पर विश्वास करना हो सकता है जो अधिक बुद्धिमान है तथा अधिक सामर्थी है।   

दूसरे शब्दों में, घमण्ड अविश्वास का एक रूप है और जो भविष्य में प्राप्त होने वाले अनुग्रह के लिए परमेश्वर पर भरोसा करना प्रिय नहीं जानता है। दूसरी ओर, विश्वास, सहायता की आवश्यकता को स्वीकार करता है। घमण्ड ऐसा कदापि नहीं करेगा। विश्वास सहायता प्राप्त करने हेतु परमेश्वर पर आशा लगाता है। घमण्ड ऐसा नहीं करता है। विश्वास चिन्ता को परमेश्वर पर डालता है। घमण्ड ऐसा नहीं करता है।  

इसलिए, घमण्ड के अविश्वास से लड़ने का उपाय यह है कि आप निसंकोच स्वीकार करें कि आपके पास चिन्ताएं हैं, और इन वचनों में भविष्य में प्राप्त होने वाले अनुग्रह की प्रतिज्ञा को संजोए रखिए, “वह आपकी देखभाल करता है।” और तब अपने भय को उसके सुदृढ़ कंधों पर उंडेल दीजिए। 

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