परमेश्वर हमें दूसरों के द्वारा दृढ़ करता है

परमेश्वर हमें दूसरों के द्वारा दृढ़ करता है

“शमौन, हे शमौन, देख ! शैतान ने तुम लोगों को गेहूँ के समान फटकने के लिए आज्ञा मांग ली है, परन्तु मैंने तेरे लिए प्रार्थना की है कि तेरा विश्वास चला न जाए। अत: जब तू फिरे, तो अपने भाइयों को स्थिर करना।” (लूका 22:31-32)

अन्य दस प्रेरितों के विषय में क्या कहेंगे (यहूदा को नहीं गिना गया है)?

शैतान उन्हें भी फटकने जा रहा था। क्या यीशु ने उनके लिए प्रार्थना की?

जी हाँ उसने किया। परन्तु उसने पिता से उसी रीति से उनके विश्वास की रक्षा करने के लिए प्रार्थना नहीं की जिस रीति से उसने पतरस की रक्षा हेतु प्रार्थना की थी।

परमेश्वर ने उस रात शैतान के द्वारा दी गयी वेदना की छलनी में पतरस के घमण्ड और आत्म-निर्भरता की कमर तोड़ दी। परन्तु उसने उसे त्याग नहीं दिया। उसने उसे वापस मोड़ लिया और उसे क्षमा कर दिया तथा उसे पुनःस्थापित किया और उसके विश्वास को दृढ़ किया। और अब यह पतरस का कार्य था कि वह अन्य दस को दृढ़ करे। “अत: जब तू फिरे, तो अपने भाइयों को दृढ़ करना।” 

यीशु ने पतरस के लिए उपलब्ध कराने के द्वारा दसों के लिए उपलब्ध कराया। अब दृढ़ किया हुआ दृढ़ करने वाला बन जाता है।

हमारे लिए यहां बहुत बड़ा पाठ है। कभी-कभी परमेश्वर सीधे आपके साथ व्यवहार करेगा, जब अन्य सब सो रहे होंगे तब सवेरे प्रातःकाल के समय में अकेले आपके विश्वास को दृढ़ करेगा। परन्तु अधिकांशतः (हम कह सकते हैं ग्यारह में दस बार) परमेश्वर हमारे विश्वास को किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से दृढ़ करता है। 

परमेश्वर हमारे लिए कोई शमौन‌ पतरस‌ भेजता है जो वही अनुग्रह का वचन लाता है जिसकी हमें आवश्यकता होती है विश्वास में लगे रहने के लिए: एक इस प्रकार की साक्षी कि “कदाचित रात को रोना पड़े, परन्तु प्रातःकाल आनन्द से भरा होता है” (भजन 30:5)।

अनन्त सुरक्षा एक सामुदायिक परियोजना है। जब भी परमेश्वर आपके हृदय को इस प्रतिज्ञा के साथ प्रोत्साहित करता है कि शैतान के छलनी से छानने पर भी आपका विश्वास विफल नहीं होगा, तो फिर उस प्रोत्साहन को लीजिए और इसका उपयोग करके अपने आनन्द को दोगुना कीजिए अपने भाइयों और बहनों को दृढ़ करने के लिए — उसी सामर्थ्य से जिसके द्वारा आप दृढ़ किए गए हैं।

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