न्याय चुकाया जायेगा

आप सभी के साथ कभी न कभी अन्याय हुआ ही होगा। सम्भवतः आप में से अधिकाँश लोगों के ऊपर ऐसे लोगों ने अन्याय किया होगा जिन्होंने आपसे कभी क्षमा नहीं माँगी या उसकी भरपाई करने के लिए कोई पर्याप्त कार्य नहीं किया।

और इस चोट और कड़ुवाहट को भुलाने में जो एक गहरी बाधा है, वह यह दृढ़-विश्वास है — जो कि एक उचित दृढ़-विश्वास है — कि न्याय चुकाया जाना चाहिए, और विश्व की सम्पूर्ण नैतिकता का ढाँचा बिखर जाएगा यदि लोग घोर अत्याचार करें, सभी को धोखा दें और बच के निकल जाएँ।

क्षमा करने तथा द्वेष को हटाने के कार्य में यह एक वास्तविक बाधा है। किन्तु यही एकमात्र बाधा नहीं है। हमारा स्वयं का पाप भी है जो कि बाधा बनता है। किन्तु यह एक वास्तविक बाधा है।

हमें ऐसा प्रतीत होता है कि इसे छोड़ देने का अर्थ यह स्वीकार करना होगा कि न्याय तो चुकाया ही नहीं जाएगा। और हम न्याय चुकाने में असमर्थ हैं।

इसलिए हम क्रोध से भरे रहते हैं, और हम इस भाव के साथ उस घटना को बार-बार दोहराते हैं: अरे, ऐसा तो नहीं होना चाहिए था; अरे, ऐसा नहीं होना चाहिए था; यह अच्छा नहीं हुआ; यह अच्छा नहीं हुआ। जब मैं इतना दुःखी हूँ तो वह इतना प्रसन्न कैसे हो सकता है? यह तो बहुत ही बुरा है।’ और हम इस बात को भुला नहीं पाते हैं। और हमारी कड़ुवाहट सब कुछ को प्रभावित करती है।

हमारे इस भार को उठाने के लिए हमें परमेश्वर के द्वारा रोमियों 12:19 का वचन दिया गया है।

“अपना बदला कभी न लेना, परन्तु परमेश्वर के कोप को जगह दो।” आपके लिए इसका अर्थ क्या है?

क्रोध के बोझ को त्यागना, अन्याय के द्वारा पहुँची चोट को बढ़ाने की प्रवृत्ति को त्यागना — इन सब को त्यागने — का अर्थ यह नहीं है कि आपके प्रति कोई बड़ा अन्याय नहीं हुआ था। वह तो हुआ ही था।

किन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि अब कोई न्याय नहीं होगा। इसका अर्थ यह भी नहीं है कि आपको कभी न्याय नहीं मिलेगा। इसका अर्थ यह भी नहीं है कि वे लोग बच कर निकल जाएँगे। नहीं, वे बच कर नहीं निकल जाएँगे।

इसका अर्थ है कि जब आप अपने बदला लेने की भावना का बोझ नीचे रख देते हैं, तो फिर परमेश्वर उसे उठाता है।

ऐसा नहीं है कि यह प्रतिशोध लेने की कोई चतुराई-भरी रीति है। यह उस महान् जन को बदला लेने का अवसर देना है जिसको बदला लेने का अधिकार है। प्रभु कहता है कि बदला लेना मेरा काम है। तुम इसे नीचे रख दो, मैं इसे उठा लूँगा। न्याय चुकाया जाएगा।

यह कितना महिमामय आश्वासन है। मुझे यह बोझ लेकर नहीं चलना पड़ेगा। यह ऐसा है कि मानो दशकों पश्चात् आप गहरी साँस ले रहे हों और ऐसा अनुभव कर रहे हों कि अब आप सम्भवत: प्रेम करने के लिए स्वतन्त्र हैं।

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जॉन पाइपर
जॉन पाइपर

जॉन पाइपर (@जॉन पाइपर) desiringGod.org के संस्थापक और शिक्षक हैं और बेथलेहम कॉलेज और सेमिनरी के चाँसलर हैं। 33 वर्षों तक, उन्होंने बेथलहम बैपटिस्ट चर्च, मिनियापोलिस, मिनेसोटा में एक पास्टर के रूप में सेवा की। वह 50 से अधिक पुस्तकों के लेखक हैं, जिसमें डिज़ायरिंग गॉड: मेडिटेशन ऑफ ए क्रिश्चियन हेडोनिस्ट और हाल ही में प्रोविडेन्स सम्मिलित हैं।

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