प्रबल अनुग्रह

“मैंने उसकी चाल को देखा है, परन्तु मैं उसे चंगा करूँगा, उसकी अगुवाई करूँगा और उसको तथा उसके लिए शोक करनेवालों को शान्ति दूँगा।” (यशायाह 57:18)

अपने सिद्धान्तों को बाइबल के स्थलों से सीखें। इस रीति से वह उत्तम कार्य करता है और आत्मा को पोषित करता है। 

उदाहरण के लिए, अप्रतिरोध्य (irresistible) अनुग्रह के सिद्धान्त को स्थल से सीखें। इस रीति से, आप देखेंगे कि इसका अर्थ यह नहीं है कि अनुग्रह का कभी विरोध नहीं किया जा सकता है; इसका अर्थ यह है कि जब परमेश्वर चुनाव करता है, तो वह उस प्रतिरोध को हटा सकता है और हटाएगा। 

उदाहरण के लिए, यशायाह 57:17-19 में, परमेश्वर अपने विद्रोही लोगों को ताड़ना देने तथा अपना मुख उनसे छिपाने के द्वारा दण्ड देता है: “उसके लोभ की दुष्टता के कारण मैंने क्रोधित होकर उसको मारा था, क्रोध ही के कारण मैंने अपना मुख छिपा लिया” (पद 17)। 

परन्तु उन्होंने पश्चाताप के साथ प्रतिउत्तर नहीं दिया। इसके विपरीत वे विश्वास से पीछे भटकते चले गए। उन्होंने विरोध किया: “परन्तु वह अपने मनमाने मार्ग पर भटकता चला गया” (पद 17)।

तो अनुग्रह का प्रतिरोध किया जा सकता  है। वास्तव में, स्तिफनुस ने यहूदी अगुवों से कहा, “तुम सदा पवित्र आत्मा का विरोध  करते आए हो” (प्रेरितों के काम 7:51)। 

तब फिर परमेश्वर क्या करता है? क्या वह उन लोगों को लेकर आने में असमर्थ है जो पश्चात्ताप और सम्पूर्णता का विरोध करते हैं? नहीं। वह शक्तिहीन नहीं है। अगला पद इस प्रकार कहता है, “मैंने उसकी चाल को देखा है, परन्तु मैं उसे चंगा करूँगा, उसकी अगुवाई करूँगा और उसको तथा उसके लिए शोक करने वालों को शान्ति दूँगा” (यशायाह 57:18)।  

इसलिए, लोगों के हट्ठीपन, अनुग्रह-प्रतिरोधी पीछे हटने वालों के सम्मुख परमेश्वर कहता है, “मैं उसे चंगा करूँगा।” वह “पुनर्स्थापित” करेगा। “पुनर्स्थापना” के लिए शब्द “परिपूर्ण या पूरा बनना है।” तथा यह शब्द “शान्ति” अर्थात् शालोम शब्द से सम्बन्धित है। इस परिपूर्णता और शान्ति का उल्लेख अगले पद में किया गया है जो यह समझाता है कि कैसे परमेश्वर एक अनुग्रह-प्रतिरोधी पीछे हटने वाले लोगों के जीवन में परिवर्तन लाता है। 

परमेश्वर यह कार्य “होठों के फल को उत्पन्न करने के द्वारा” करता है। यहोवा कहता है, “जो दूर है उसे शान्ति मिले और जो निकट है उसे भी शान्ति मिले, और मैं उसको चंगा करूँगा” (यशायाह 57:19)। परमेश्वर उन बातों को सृजता है जो वहाँ नहीं हैं— अर्थात् शान्ति एवं सम्पूर्णता। हम इसी रीति से बचाए गए हैं। और इसी रीति से हमें बार-बार विश्वास से पीछे जाने से वापस लाया जाता है।

जहाँ पर स्तुति अस्तित्व में भी नहीं थी वहाँ पर उसको उत्पन्न करने के द्वारा परमेश्वर का अनुग्रह हमारे प्रतिरोध पर विजय प्राप्त करता है। वह निकट के और दूर के लोगों के लिए शालोम, शालोम लेकर आता है। पूर्णता, वह निकट के और दूर के लोगों के लिए पूर्णता को लेकर के आता है। वह इस कार्य को लोगों को “पुनर्स्थापित” करने के द्वारा करता है, अर्थात्, प्रतिरोध के रोग को अधीनता के आरोग्य से प्रतिस्थापित करता है। 

तो अप्रतिरोध्य अनुग्रह की मुख्य बात यह नहीं है कि हम अनुग्रह का प्रतिरोध नहीं कर सकते हैं। हम यह कर सकते हैं, और हम करते भी हैं। किन्तु बात यह है कि जब परमेश्वर चुनाव करता है, तो वह हमारे प्रतिरोध पर विजय प्राप्त करता है और हमारे अन्दर अधीनता की आत्मा को पुनस्थार्पित करता है। वह सृजन करता है। वह कहता है, “उजियाला हो!” वह चंगा करता है। वह अगुवाई करता है। वह पुनर्स्थापित करता है। वह शान्ति प्रदान करता है। 

इसलिए, हम इस बात पर कभी गर्व नहीं करते हैं कि हम विश्वास से पीछे हटकर पुनः वापस लौट आए हैं। हम अपने मुख के बल परमेश्वर के सम्मुख गिरते हैं और काँपते हुए आनन्द के साथ उसके अप्रतिरोध्य अनुग्रह के लिए उसको धन्यवाद देते हैं कि उसने हमारे सभी विरोध पर विजय प्राप्त किया है।

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जॉन पाइपर
जॉन पाइपर

जॉन पाइपर (@जॉन पाइपर) desiringGod.org के संस्थापक और शिक्षक हैं और बेथलेहम कॉलेज और सेमिनरी के चाँसलर हैं। 33 वर्षों तक, उन्होंने बेथलहम बैपटिस्ट चर्च, मिनियापोलिस, मिनेसोटा में एक पास्टर के रूप में सेवा की। वह 50 से अधिक पुस्तकों के लेखक हैं, जिसमें डिज़ायरिंग गॉड: मेडिटेशन ऑफ ए क्रिश्चियन हेडोनिस्ट और हाल ही में प्रोविडेन्स सम्मिलित हैं।

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