हम विश्वास से जीवित हैं
<a href="" >जॉन पाइपर द्वारा भक्तिमय अध्ययन</a>

संस्थापक और शिक्षक, desiringGod.org

अब मैं जो शरीर में जीवित हूँ, तो केवल उस विश्वास से जीवित हूँ जो परमेश्वर के पुत्र पर है, जिसने मुझ से प्रेम किया और मेरे लिए अपने आप को दे दिया। (गलातियों 2:20)

परमेश्वर द्वारा भविष्य में दिये जाने वाले अनुग्रह के साथ विश्वास का एक उत्तम मेल है। यह स्वतन्त्रता और अनुग्रह की सर्व-पर्याप्तता के साथ मेल खाती है। और यह परमेश्वर की महिमामय विश्वासयोग्यता की ओर ध्यान आकर्षित करती है। 

इस निष्कर्ष के महत्वपूर्ण निहितार्थों में से एक यह है कि वह विश्वास जो धर्मी ठहराता है और वह विश्वास जो पवित्र करता है, दो अलग-अलग प्रकार के विश्वास नहीं हैं। “पवित्र होने” (Sanctify) का सीधा सा अर्थ है पवित्र बनाना या ख्रीष्ट की समानता में बदलना। यह सब अनुग्रह से है। 

इसलिए, यह विश्वास के द्वारा भी अवश्य होना चाहिए। क्योंकि विश्वास आत्मा का वह कार्य है जो अनुग्रह के साथ जुड़ा हुआ है, और इसे ग्रहण करता है तथा इसे आज्ञाकारिता की सामर्थ्य के रूप में प्रसारित करता है तथा मानव घमण्ड के द्वारा अनुग्रह को निरर्थक होने से बचाता है।

पौलुस विश्वास और पवित्रीकरण (sanctification ) के बीच इस सम्बन्ध को गलातियों 2:20 (“मैं विश्वास से जीवित हूँ”) में स्पष्ट करता है। पवित्रीकरण आत्मा तथा विश्वास के द्वारा होता है। यह कहने का एक और ढंग है कि यह अनुग्रह  के द्वारा और विश्वास के द्वारा होता है। आत्मा तो “अनुग्रह  का आत्मा है” (इब्रानियों 10:29)। परमेश्वर हमें आत्मा के द्वारा पवित्र बनाता है; परन्तु आत्मा सुसमाचार में विश्वास  के द्वारा कार्य करता है।

एक साधारण कारण कि क्यों विश्वास जो धर्मी ठहराता है वही विश्वास पवित्र भी करता है, क्योंकि दोनों धर्मी ठहराया जाना तथा पवित्रीकरण सम्प्रभु अनुग्रह का कार्य है। और वह विश्वास है जो अनुग्रह से मेल खाता है। धर्मी ठहराया जाना (justification-धर्मीकरण) और पवित्रीकरण दोनों एक समान  कार्य नहीं हैं (धर्मीकरण, धार्मिकता का अभ्यारोपण (imputation) है और पवित्रीकरण, धार्मिकता का प्रदान किया जाना है), परन्तु वे दोनों अनुग्रह ही के कार्य हैं। पवित्रीकरण और धर्मीकरण “अनुग्रह के ऊपर अनुग्रह है” (यूहन्ना 1:16)। 

परमेश्वर के सेंतमेंत में अनुग्रह का मानवीय परिणाम विश्वास है। यदि धर्मीकरण और पवित्रीकरण दोनों अनुग्रह के कार्य हैं, तो यह स्वाभाविक है कि वे दोनों विश्वास के द्वारा  हैं। 

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