जब परमेश्वर 100% हमारे पक्ष में हो जाता है
<a href="" >जॉन पाइपर द्वारा भक्तिमय अध्ययन</a>

संस्थापक और शिक्षक, desiringGod.org

. . .उन्हीं में हम सब भी पहिले अपने शरीर की लालसाओं में दिन बिताते थे, शारीरिक तथा मानसिक इच्छाओं को पूरा करते थे, और अन्य लोगों के समान स्वभाव ही से क्रोध की सन्तान थे (इफिसियों 2:3)।

परमेश्वर का सारा प्रकोप, सारी दण्डाज्ञा जिसके हम योग्य हैं, यीशु पर उण्डेल दिया गया था। ख्रीष्ट के द्वारा सिद्ध धार्मिकता के लिए परमेश्वर की सारी मांगें पूरी की गयीं हैं। जिस क्षण हम (अनुग्रह से!) इस बहुमूल्य धन को देखते हैं, और इसी रूप में उसे ग्रहण करते हैं, तो उसकी मृत्यु हमारी मृत्यु के रूप में और उसकी दण्डाज्ञा हमारी दण्डाज्ञा के रूप में और उसकी धार्मिकता हमारी धार्मिकता के रूप में गिनी जाती है, और उसी पल परमेश्वर अपरिवर्तनीय रीति से सदा के लिए 100% हमारे पक्ष में हो जाता है। 

जो बात इस प्रश्न को अनुत्तरित छोड़ देती है वह यह है, “क्या बाइबल यह नहीं सिखाती है कि अनन्तकाल में परमेश्वर ने चुनाव के द्वारा हम पर कृपा की थी?”

दूसरे शब्दों में, विचारशील लोग पूछते हैं, “क्या परमेश्वर 100% हमारे पक्ष में मात्र विश्वास के क्षण ही ख्रीष्ट के साथ मिलन और धर्मी ठहराए जाने पर हुआ था? क्या वह 100% हमारे पक्ष में जगत की उत्पत्ति से पूर्व चुनाव के कार्य में नहीं हो गया था? इफिसियों 1:4-5 में पौलुस कहता है, “[परमेश्वर] ने हमें जगत की उत्पत्ति से पूर्व [ख्रीष्ट] में चुन लिया कि हम उसके समक्ष प्रेम में पवित्र और निर्दोष हों।  उसने हमें अपनी इच्छा के भले अभिप्राय के अनुसार पहिले से ही अपने लिए यीशु ख्रीष्ट के द्वारा लेपालक पुत्र होने के लिए ठहराया”।

तब क्या परमेश्वर अनन्तकाल से चुने हुओं के पक्ष में 100% रीति से नहीं है? यह बात उस बात पर निर्भर है कि “100%” का अर्थ क्या है।

इस शब्द “100%” का उपयोग करने के द्वारा मैं पवित्र शास्त्र के विभिन्न खण्डों में पाए जाने वाले बाइबलीय सत्य को संरक्षित करने का प्रयास कर रहा हूँ। उदाहरण के लिए इफिसियों 2:3 में पौलुस कहता है कि ख्रीष्टीयगण ख्रीष्ट यीशु में जीवित किए जाने से पहले “क्रोध की सन्तान” थे: “हम सब भी पहिले [आज्ञा न मानने वालों के साथ] अपने शरीर की लालसाओं में दिन बिताते थे, शारीरिक तथा मानसिक इच्छाओं को पूरा करते थे, और अन्य लोगों के समान स्वभाव ही से क्रोध की सन्तान थे। “

पौलुस कह रहा है कि हमारे नए जन्म से पहले — ख्रीष्ट के साथ हमारे जीवित किए जाने से पहले —परमेश्वर का क्रोध हम पर था। चुने हुए लोग भी क्रोध के अधीन थे। यह बात तब परिवर्तित हुई जब परमेश्वर ने हमें ख्रीष्ट यीशु में जीवित किया और ख्रीष्ट की सच्चाई और सुन्दरता देखने के लिए जागृत किया जिससे कि हम उसे यह जानकर ग्रहण कर सकें कि वह हमारे लिए मरा तथा उसकी धार्मिकता यीशु के साथ हमारे मिलन के कारण हमारी गिनी गयी। इससे पहले कि ऐसा हमारे साथ हो, हम परमेश्वर के क्रोध के अधीन थे। परन्तु ख्रीष्ट में विश्वास और उसके साथ मिलन के कारण परमेश्वर का सारा क्रोध दूर हो गया और उस अर्थ में वह 100% रीति से हमारे पक्ष में हो गया।

इसलिए, इस सत्य पर अत्यन्त आनन्दित हों कि परमेश्वर आपको बनाए रखेगा। वह आपको अन्त तक ले जाएगा क्योंकि वह ख्रीष्ट में 100% आपके पक्ष में है। और ऐसा नहीं है कि अन्त तक पहुँचने के द्वारा परमेश्वर 100% आपके पक्ष में हो जाता है। यह तो इस तथ्य का प्रभाव है कि वह पहले से ही 100% आपके पक्ष में है।  

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