ज्योति से परे एक ज्योति
<a href="" >जॉन पाइपर द्वारा भक्तिमय अध्ययन</a>

संस्थापक और शिक्षक, desiringGod.org

इसलिए यदि तुम ख्रीष्ट के साथ जीवित किए गए हो तो उन वस्तुओं की खोज में लगे रहो जो स्वर्ग की हैं, जहाँ ख्रीष्ट विद्यमान है और परमेश्वर की दाहिनी ओर विराजमान है। अपना मन पृथ्वी पर की नहीं, परन्तु स्वर्गीय वस्तुओं पर लगाओ। (कुलुस्सियों 3:1-2)

यीशु ख्रीष्ट आप को नई उमंग से भर देता है। इसलिए, ऊपर की वस्तुओं की खोज में लगे रहिए। इस ग्रीष्मकाल के समय में ख्रीष्ट के स्थान पर अन्य तुच्छ वस्तुओं को मत चुन लीजिये। ख्रीष्ट से दूर भागकर ख्रीष्ट-रहित आनन्दों में जाना आप के प्राण को सुखा देता है।

आरम्भ में प्रार्थना कम करना और वचन की उपेक्षा करना स्वतन्त्रता और आमोद जनक लग सकता है। परन्तु तब हम मूल्य चुकाते हैं: उथलापन, सामर्थ्यहीनता, पाप में सरलता से गिर जाना, तुच्छ बातों से विचारों का भरा होना, दिखावटी सम्बन्ध, और आराधना और आत्मा की बातों के प्रति रुचि में भयावह करने वाली कमी।

ग्रीष्मकाल के आने को अपने प्राण के सिकुड़ जाने का कारण न बनाएं। परमेश्वर ने ग्रीष्मकाल को स्वर्ग के पूर्वानुभव के रूप में बनाया, और यह कुछ ही समय का है।

यदि डाकिया आपके पास आपके मंगेतर से एक प्रेम पत्र लेकर आता है, तो डाकिए के साथ प्रेम में मत पड़ जाइए। एक चल-चित्र के ट्रेलर के प्रेम में इस प्रकार मत पड़ जाइए कि आप आने वाले वास्तविक चल-चित्र से प्रेम ही न कर सकें।

यीशु ख्रीष्ट ही इस ग्रीष्मकाल का नई उमंग से भर देने का केन्द्र है। वह सब बातों में सर्वश्रेष्ठ है (कुलुस्सियों 1:18), जिनमें छुट्टी और पिकनिक और खेल और टहलना और सब प्रकार के मनोरंजन सम्मिलित हैं। इस ग्रीष्मकाल में वह हमें बुलाता है, “हे सब थके और बोझ से दबे लोगो, मेरे पास आओ: मैं तुम्हें विश्राम दूँगा” (मत्ती 11:28)।

क्या हम इसे चाहते हैं? प्रश्न तो यह है। ख्रीष्ट स्वयं को हमें उस अनुपात में देता है जितनी नई उमंग की हमें आवश्यकता होती है। “तुम मुझे ढूँढ़ोगे और पाओगे, क्योंकि तुम स्पूर्ण हृदय से मुझे ढूँढ़ोगे” (यिर्मयाह 29:13)।

इसके विषय में हमारे लिए पतरस का एक वचन है, “इसलिए पश्चात्ताप करो और लौट आओ कि तुम्हारे पाप मिटाए जाएँ, जिससे प्रभु की उपस्थिति से सुख-चैन के दिन आएँ” (प्रेरितों के काम 3:19-20)। पश्चात्ताप का अर्थ केवल पाप से फिर जाना ही नहीं है, परन्तु खुले और आशा से भरे और अधीन हृदयों के साथ प्रभु की ओर फिरना भी है।

यह किस प्रकार की ग्रष्मकालीन मानसिकता है? यह कुलुस्सियों 3:1-2 की मानसिकता है, “इसलिए यदि तुम ख्रीष्ट के साथ जीवित किए गए हो तो उन वस्तुओं की खोज में लगे रहो जो स्वर्ग की हैं, जहाँ ख्रीष्ट विद्यमान है और परमेश्वर की दाहिनी ओर विराजमान है। अपना मन पृथ्वी पर की नहीं, परन्तु स्वर्गीय वस्तुओं पर लगाओ।”

यह तो परमेश्वर की पृथ्वी है! यह उस वास्तविकता का ट्रेलर है कि वह अनन्त ग्रीष्मकाल कैसा होगा जब “उस नगर को सूर्य और चाँद के प्रकाश की आवश्यकता नहीं, क्योंकि परमेश्वर की महिमा ने उसे आलोकित किया है और मेमना उसका दीपक है” (प्रकाशितवाक्य 21:23)।

ख्रीष्मकाल का सूर्य उस भविष्य के सूर्य  की ओर मात्र एक संकेत है: परमेश्वर की महिमा। ग्रीष्मकाल यही देखने और दिखाने के लिए है। क्या आप चाहते हैं कि आपके पास देखने के लिए आँखें हों? हे प्रभु, हमारी सहायता कीजिए कि हम ज्योति से परे एक ज्योति को देख पाएं।

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