वह प्राप्त करें जिसे आप खो नहीं सकते
<a href="" >जॉन पाइपर द्वारा भक्तिमय अध्ययन</a>

संस्थापक और शिक्षक, desiringGod.org

यीशु ने उनकी ओर देख कर कहा, “मनुष्यों के लिए यह असम्भव है, परन्तु परमेश्वर के लिए नहीं, क्योंकि परमेश्वर के लिए सब कुछ सम्भव है।” (मरकुस 10:27)

वैश्विक ख्रीष्टीय बनने और सीमान्तर क्षेत्रों (Frontier) में सुसमाचार प्रचार-प्रसार  (Missions) के लिए स्वयं को समर्पित करने हेतु, यीशु द्वारा यहाँ दो महान प्रोत्साहन दिए गए हैं। जो या तो स्वयं जाने वाले के लिए हैं या भेजने वाले के लिए हैं। 

1. मनुष्यों के लिए प्रत्येक असम्भव कार्य परमेश्वर के लिए सम्भव है (मरकुस 10:27)। घोर पापियों के हृदय परिवर्तन का कार्य परमेश्वर का होगा और उसकी सम्प्रभु योजना के अनुरूप होगा। हमें अपनी निर्बलता से भयभीत होने या कुढ़ने की आवश्यकता नहीं है। युद्ध तो यहोवा ही का है, और विजय भी वही देगा।

2. ख्रीष्ट हमारे लिए कार्य करने और हमारे साथ होने की एक महान प्रतिज्ञा करता है कि जब हमारी सुसमाचार प्रचार-प्रसार की सेवा का जीवन समाप्त हो जाएगा, तो हम यह नहीं कहने पाएँगे कि हमने कुछ भी बलिदान किया है (मरकुस 10:29-30)।

जब हम उसके सुसमाचार प्रचार-प्रसार के निर्देश का पालन करते हैं, तो हम पाते हैं कि पीड़ायुक्त दुष्प्रभाव भी हमारी स्थिति को सुधारने का काम करते हैं। हमारा आत्मिक स्वास्थ्य, हमारा आनन्द, सौ गुना सुधर जाता है। और जब हम मरते हैं तो हम मरते नही हैं। हम अनन्त जीवन प्राप्त करते हैं।

मैं आपसे यह विनती नहीं कर रहा हूँ कि आप अपने साहस को और ख्रीष्ट के लिए बलिदान को व्यर्थ जाने दें। मैं आपसे विनती करता हूँ कि आपके पास जो कुछ भी है उसे ऐसा जीवन प्राप्त करने के लिए त्याग दें जो कि आपकी गहरी लालसाओं को सन्तुष्ट करता है। मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि राजाओं के राजा की सेवा में खड़े होने के श्रेष्ठ मूल्य के लिए सभी वस्तुओं को कूड़ा-करकट के समान समझिए। मैं आपसे विनती करता हूँ कि आप दुकान से मोल लिया हुए अपने चिथड़े कपड़ों को उतारकर परमेश्वर के राजदूतों वाले वस्त्र पहिन लीजिए।

मैं आपको सतावों और कष्टों की प्रतिज्ञा देता हूँ — परन्तु आनन्द को स्मरण रखें! “धन्य हैं वे जो धार्मिकता के कारण सताए जाते हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है” (मत्ती 5:10)।

8 जनवरी, 1956 को, इक्वाडोर  के वोरानी जनजाति (Waorani Indians) के पाँच मूल निवासियों ने जिम इलियट और उनके चार मिशनरी साथियों को तब मार डाला, जब वे साठ लोगों की वोरानी जनजाति को सुसमाचार देने का प्रयास कर रहे थे।

चार युवा पत्नियों ने अपने पति खो दिए और नौ बच्चों ने अपने पिता खो दिए। एलिज़ाबेथ इलियट ने तब लिखा था कि संसार ने इसे दुखद घटना का डरावना सपना कहा। फिर उसने आगे कहा, “संसार ने जिम इलियट के विश्वास के दूसरे आयाम की सत्यता को नहीं पहचाना: ‘वह व्यक्ति मूर्ख नहीं है जो उस वस्तु को दे देता है जिसे वह रख नहीं सकता, जिससे कि वह उसे पा सके जिसे वह कभी खो नहीं सकता है।” 

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