ख्रीष्टीय जीवन में खरी शिक्षा का महत्व

वास्तव में देखा जाए तो एक व्यक्ति के जीवन में शिक्षा उसके जन्म के साथ ही आरम्भ होती है और मृत्यु तक चलती रहती है। यही शिक्षा उस व्यक्ति के जीवन का मार्गदर्शन करती है। हम सब इस बात से सहमत होते हैं तथा अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने का प्रयास करते हैं। यह बात हमारे आत्मिक जीवन पर भी लागू होती है। हमें आत्मिक जीवन हेतु मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए खरी शिक्षा की आवश्यकता है। परन्तु विडम्बना की बात यह है कि आज अनेक ख्रीष्टीय लोग खरी शिक्षा को सुनना पसन्द नहीं करते हैं। जैसा कि पौलुस ने तीमुथियुस से कहा था कि “समय आएगा जब लोग खरी शिक्षा को सहन नहीं करेंगे” (2 तीमुथियुस 4:3)। इसी प्रकार उसने तीतुस को भी निर्देश दिया कि था कि “तू ऐसी बातें कहा कर जो खरी शिक्षा के अनुसार हैं” (तीतुस 2:1)। पौलुस बार-बार खरी शिक्षा पर बल देता है क्योंकि वह खरी शिक्षा के महत्व को जानता था। अतः आइए हम भी खरी शिक्षा तथा उसके महत्व के विषय में कुछ बातों को जानें। 

खरी शिक्षा (साउन्ड डॉक्टरिन) पुस्तक के लेखक बॉबी जेमीसन खरी शिक्षा को इस प्रकार से परिभाषित करते हैं: “खरी शिक्षा बाइबल की शिक्षाओं का सारांश है जो बाइबल के प्रति विश्वासयोग्य है और जीवन के लिए उपयोगी है”। 

“खरी शिक्षा बाइबल की शिक्षाओं का सारांश है जो बाइबल के प्रति विश्वासयोग्य है और जीवन के लिए उपयोगी है”। 

खरी शिक्षा हमारे विश्वास की रक्षा करती है
हम सबके जीवन में कभी न कभी ऐसी परिस्थितियाँ आती हैं जब हमें कुछ कठिन निर्णय लेने के लिए परमेश्वर की बुद्धि की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए आपको एक ऐसे नगर में अच्छा कार्य मिल रहा है जहाँ आपका वेतन दोगुना जाएगा किन्तु उस नगर में सुसमाचार प्रचार करने वाली कोई कलीसिया नहीं है। या आपके माता-पिता आपका विवाह किसी ऐसी लड़की या लड़के से कराना चाहते हैं जो ख्रीष्टीय नहीं है। ऐसी और भी स्थितियों के विषय में आप सोच सकते हैं जहाँ आपको अपने विश्वास से समझौता करना पड़ सकता है। ऐसी परिस्थियोंं में निर्णय में लेने के लिए आपको उस ज्ञान अर्थात् खरी शिक्षा की आवश्यकता है जिसे परमेश्वर ने अपने वचन में प्रकट किया है। इसलिए खरी शिक्षा हमें उन परिस्थियों में परमेश्वर के वचन के अनुसार उचित निर्णय लेने में सहायता करती है। 

खरी शिक्षा जीवन का मार्गदर्शन करती है
एक क्षण के लिए सोचिए कि आप किसी अनजान सड़क पर चलते चलते अपने मार्ग से भटक जाएँ तथा सही मार्ग दिखाने के लिए आस-पास कोई व्यक्ति न हो। तो ऐसे समय में आप गूगल मैप जैसे दिशा सूचक साधनों का उपयोग करके अपने गन्तव्य तक पहुँच सकते हैं। इसी प्रकार ख्रीष्टीय जीवन एक आत्मिक यात्रा के समान है। और इस आत्मिक जीवन की यात्रा हेतु सही मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए परमेश्वर ने हमें खरी शिक्षा दी है। और जब हम अपने मार्ग से भटकने लगते हैं तो यही खरी शिक्षा हमें सही मार्ग पर लाने तथा अपने गन्तव्य तक पहुँचने में सहायता करती है। अतः हम भजनकार के समान कह सकते हैं कि “तेरा वचन मेरे पांव के लिए दीपक, और मेरे मार्ग के लिए उजियाला है” (भजन 119:105)।

खरी शिक्षा कलीसियाई जीवन की समझ प्रदान करती है
खरी शिक्षा न केवल व्यक्तिगत रीति से हमें जीवन जीने के लिए बुद्धि प्रदान करती है, परन्तु हमें कलीसियाई रीति से कैसे जीवन जीना है इसके विषय में भी समझाती है। कलीसिया मसीह की देह है और हम सब उस देह के अंग हैं। और इस देह में एक साथ जीवन के लिए हमें खरी शिक्षा की आवश्यकता है क्योंकि खरी शिक्षा हमें भक्तिपूर्ण जीवन जीने में सहायता करती है (तीतुस 2:1-10)। ख्रीष्टीय जीवन अकेले में रहकर जीने वाला जीवन नहीं है किन्तु यह सामूहिक रूप से जीने वाला जीवन है। परमेश्वर ने हमें बचाकर अकेला नहीं छोड़ा किन्तु उसने हमें कलीसिया में जोड़ा है जिससे कि हम एक साथ मिलकर आत्मा के फल को व्यवहार में ला सकें। हम अकेले किसी रेगिस्तान में बैठकर आत्मा के फल को व्यवहार में नहीं ला सकते हैं। 

खरी शिक्षा सांसारिक जीवन की सही समझ प्रदान करती है
खरी शिक्षा न केवल हमें कलीसियाई रीति से सामूहिक जीवन जीने के विषय में बताती है किन्तु यह भी बताती है कि हमें संसार में विश्वासयोग्यता के साथ कैसे जीवन जीना है। हम इस संसार में हैं परन्तु इस संसार के नहीं हैं। परमेश्वर ने हमें पाप से बचाया है तथा एक ऐसा जीवन जीने के योग्य बनाया है जो परमेश्वर को भाता हो। अब हम ख्रीष्टीय होने के नाते इस संसार में एक परदेशी के समान यात्रा में हैं। और इस संसार में विश्वासयोग्यता के साथ जीवन जीने तथा संसार, शैतान और शरीर की अभिलाषाओं से बचने के लिए हमें खरी शिक्षा की आवश्यकता है। 

एक प्रसिद्ध ईश्वरविज्ञानीय (Theologian) जॉन कैल्विन ने कहा कि “किसी मनुष्य के लिए यह असम्भव है कि वह बिना पवित्रशास्त्र का शिष्य बने खरी शिक्षा की सूक्ष्म बातों को प्राप्त कर सके।” अतः बाइबल को निरन्तर पढ़िए तथा खरी शिक्षाओं को सुनने, जानने और अपनाने के लिए लालायित रहिए। इसके साथ ही इस संसार में परमेश्वर की महिमा के लिए जीवन जीएं। क्योंकि खरी शिक्षा उस अनन्त मार्ग पर चलने में सहायता करती है जो परमेश्वर के पास ले जाता है। 


 1यह लेख साउन्ड डॉक्ट्रिन नामक पुस्तक के पहले अध्याय पर आधारित है जिसके लेखक बॉबी जेमिसन हैं। 

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