उपस्थित और सामर्थी प्रेम

रोमियों 8:35 में तीन बातों पर ध्यान दें।

1. ख्रीष्ट अभी हम से प्रेम कर रहा है।

एक पत्नी अपने मृत पति के विषय में कह सकती है: मुझे उसके प्रेम से कुछ भी अलग नहीं करेगा। सम्भवतः उसका अर्थ होगा कि उसके पति के प्रेम की स्मृतियाँ उसके पूरे जीवन में मधुर और सामर्थी रहेंगी। परन्तु यहाँ पौलुस का अर्थ यह नहीं है।

रोमियों 8:34 में वह स्पष्ट रूप से कहता है, “ख्रीष्ट यीशु ही है जो मरा, हाँ, वरन् वह मृतकों में से जिलाया गया, जो परमेश्वर के दाहिनी ओर है, और हमारे लिए निवेदन भी करता है।” जिस कारण से पौलुस ऐसा कह सकता है कि हमें ख्रीष्ट के प्रेम से कुछ भी अलग नहीं करेगा वह कारण यह है कि ख्रीष्ट जीवित है और हमसे अभी भी प्रेम कर रहा है।

वह परमेश्वर के दाहिनी ओर है और इसलिए हमारे लिए शासन कर रहा है। और वह हमारे लिए मध्यस्थता कर रहा है, जिसका अर्थ है कि वह यह देख रहा है कि उसके द्वारा छुटकारे का पूरा किया कार्य वास्तव में हर घड़ी बचाता है, और हमें सुरक्षित रूप से अनन्त आनन्द में लाता है। उसका प्रेम केवल एक स्मृति नहीं है। यह सर्वशक्तिमान, परमेश्वर के जीवित पुत्र के द्वारा क्षण प्रति क्षण का कार्य है, जो हमें अनन्त आनन्द की ओर ले कर आता है।

2. ख्रीष्ट का यह प्रेम हमें अलगाव से बचाने में प्रभावी है, और इसलिए यह सभी के लिए एक सार्वभौमिक प्रेम नहीं है, परन्तु उसके लोगों के लिए विशिष्ट प्रेम है — अर्थात्, रोमियों 8:28 के अनुसार, वे जो परमेश्वर से प्रेम करते हैं और उसके उद्देश्य के अभिप्राय से बुलाए गए हैं।

यह इफिसियों 5:25 का प्रेम है, “हे पतियो, अपनी-अपनी पत्नी से प्रेम करो जैसा ख्रीष्ट ने भी कलीसिया से प्रेम किया और अपने आप को उसके लिए दे दिया।” यह कलीसिया के लिए, अर्थात् उसकी दुल्हन के लिए उसका प्रेम है। ख्रीष्ट के पास सबके लिए  प्रेम है, और उसके पास अपनी दुल्हन के लिए एक विशेष, बचाने वाला, बनाए रखने वाला प्रेम है। आप जानते हैं कि आप भी उस दुल्हन का भाग हैं यदि आप ख्रीष्ट पर भरोसा करते हैं। कोई भी — बिना किसी अपवाद के — कोई भी जो ख्रीष्ट पर भरोसा करता है वह कह सकता है, मैं उसकी दुल्हन, उसकी कलीसिया, उसके बुलाए हुए और चुने हुए लोगों का भाग हूँ, जो रोमियों 8:35 के अनुसार सदा के लिए, चाहे कुछ भी हो सुरक्षित रखे गए हैं।

3. यह सर्वशक्तिशाली, प्रभावीकारी, रक्षा करने वाला प्रेम हमें इस जीवन की विपत्तियों से नहीं बचाता है, वरन् उसके माध्यम से परमेश्वर के साथ अनन्त आनन्द की ओर ले जाता है।

हमारी मृत्यु होगी, परन्तु वह हमें अलग नहीं करेगी। इसलिए जब पौलुस पद 35 में कहता है कि “तलवार” हमें ख्रीष्ट के प्रेम से अलग नहीं करेगी, तो उसका अर्थ है: कि यदि हमें मार भी दिया जाए, तो भी हम ख्रीष्ट के प्रेम से अलग नहीं होंगे।

तो पद 35 में बात का सार यह है कि: यीशु ख्रीष्ट अभी अपने लोगों से सर्वशक्तिशाली प्रेम के साथ, हर क्षण प्रेम कर रहा है जो हमें सदा विपत्तियों से तो नहीं बचाता है, परन्तु हमें दुःखों और मृत्यु के मध्य में भी अपनी उपस्थिति में शाश्वत आनन्द के लिए सुरक्षित रखता है।

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जॉन पाइपर
जॉन पाइपर

जॉन पाइपर (@जॉन पाइपर) desiringGod.org के संस्थापक और शिक्षक हैं और बेथलेहम कॉलेज और सेमिनरी के चाँसलर हैं। 33 वर्षों तक, उन्होंने बेथलहम बैपटिस्ट चर्च, मिनियापोलिस, मिनेसोटा में एक पास्टर के रूप में सेवा की। वह 50 से अधिक पुस्तकों के लेखक हैं, जिसमें डिज़ायरिंग गॉड: मेडिटेशन ऑफ ए क्रिश्चियन हेडोनिस्ट और हाल ही में प्रोविडेन्स सम्मिलित हैं।

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