बचाने वाला विश्वास सरलता से तृप्त नहीं होता
<a href="" >जॉन पाइपर द्वारा भक्तिमय अध्ययन</a>

संस्थापक और शिक्षक, desiringGod.org

यदि वे उस देश के विषय सोचते जिस से वे निकले थे तो उन्हें लौट जाने का अवसर होता। पर वे एक उत्तम अर्थात् स्वर्गिक देश के अभिलाषी हैं। (इब्रानियों 11:15-16)

विश्वास उस प्रतिज्ञा किए गए भविष्य को देखता है जिसे परमेश्वर प्रदान करता है और उसकी “अभिलाषा” करता है। “पर वे एक उत्तम अर्थात् स्वर्गिक देश के अभिलाषी  हैं।” इस बात पर कुछ समय के लिए ठहर जाएँ।

ऐसे बहुत से लोग हैं जो विश्वास को केवल एक ऐसा निर्णय मात्र बना देते हैं जो इस बात को परिवर्तित नहीं करता है कि वह व्यक्ति क्या इच्छा करता है और खोजता है, और ऐसे करने के द्वारा वे विश्वास के महत्व को बहुत घटा देते हैं। परन्तु बाइबल में महान विश्वास वाले अध्याय —  इब्रानियों 11 —  के इस स्थल का मुख्य विषय यह है कि विश्वास के द्वारा  जीने और मरने का अर्थ है नई इच्छाओं को रखना और नई बातों में सन्तुष्टि की खोज करना।

14 पद कहता है कि प्राचीन काल के सन्त ( इब्रानियों 11 में जिनके विश्वास की प्रशंसा की जा रही है) इस संसार से हटकर एक भिन्न प्रकार के देश की खोज में थे। और 16 पद कहता है कि वे पृथ्वी के वर्तमान के अस्तित्व से कुछ उत्तम बात की अभिलाषा कर रहे थे। “वे एक उत्तम अर्थात् स्वर्गिक देश के अभिलाषी हैं।”

वे परमेश्वर के द्वारा इस रीति से जकड़े हुए थे कि केवल परमेश्वर के साथ रहना ही उन्हें सन्तुष्ट कर सकता था।

तो, सच्चा बचाने वाला विश्वास यह है कि: दूर से परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं को देखना, और प्राथमिकताओं में इस प्रकार के परिवर्तन का अनुभव करना जिससे कि संसार द्वारा दिए जाने वाले सब कुछ से बढ़कर आप परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं की इच्छा रखते हैं और उनकी खोज करते हैं और उन पर भरोसा करते हैं।

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