आत्मिक माता-पिता और आत्मिक शोषण

कई ख्रीष्टीय लोग यह विश्वास करते हैं कि जीवन में आशीष, अभिषेक और पवित्र आत्मा पाने के लिए आत्मिक माता-पिता का होना आवश्यक है। आत्मिक माता-पिता के प्रार्थनाओं से ये सब प्राप्त होंगे। आज कई झूठे शिक्षक जो अपने आप को आत्मिक माता-पिता कहलाना पसन्द करते हैं प्रायः वे भिन्न प्रकार की शिक्षा देकर कलीसिया में लोगों का शोषण करते हैं। क्या यह शिक्षा बाइबल पर आधारित है? यीशु ख्रीष्ट ने आत्मिक माता-पिता के विषय में क्या कहा है? इस लेख के द्वारा हम इन विषयों को देखेंगे – 

स्वर्गीय पिता हमें आशीष देता है: नया नियम यह नहीं सिखाता है कि किसी “आत्मिक माता-पिता”, धार्मिक अगुवों के द्वारा आशीष, अभिषेक और पवित्र आत्मा प्राप्त होता है। झूठे शिक्षक नये नियम के खण्डों को बिना संदर्भ के पुराने नियम के खण्डों के साथ जोड़ते हैं और अपनी झूठी शिक्षा को स्थापित करते हैं। मत्ती 23:8-10 में यह स्पष्ट है कि हम परमेश्वर को, जो स्वर्ग में है, पिता कह सकते हैं। यह स्वर्गीय पिता हमें यीशु ख्रीष्ट के द्वारा या माध्यम से आशीष देता है। ये आशीषें हमारे कार्यों या योग्यता के कारण नहीं वरन् परमेश्वर के अनुग्रह और करुणा के कारण हमें दिए जाते हैं। परमेश्वर ने किसी आत्मिक माता-पिता को यह अधिकार नहीं दिया है कि वह हमारे जीवनों में आशीष लेकर आएं। इफिसियों 1:2-4 के अनुसार परमेश्वर पिता ने हमें यीशु ख्रीष्ट में स्वर्गीय स्थानों में सब प्रकार की आत्मिक आशीषों से आशीषित किया है। 

आत्मिक माता-पिता या अगुवे: नया नियम, कलीसिया में अगुवों के नेतृत्व और उनकी भूमिका का समर्थन करता है। प्रेरित पौलुस ने कलीसिया में अगुवों को नियुक्त किया था और कई अन्य खण्डों में भी हम कलीसिया में अगुवों के होने के विषय में पढ़ते हैं (प्रेरितों के काम 14:23, 11:30, 15:2, 4, 6, 22, 23, 16:4, 20:28, 1 तीमुथियुस 5:17,19, तीतुस 1:5)। यह अगुवे और “आत्मिक माता-पिता” एक समान नहीं हैं। इन अगुवों को आत्मिक माता-पिता कहकर सम्बोधित नहीं किया गया। उनके द्वारा परमेश्वर लोगों को आशीष, अभिषेक और पवित्र आत्मा नहीं दे रहा था। परमेश्वर ने कलीसिया में हमारे आत्मिक उन्नति के लिए अगुवों को ठहराया है। इसके विपरीत झूठे शिक्षक लालच और नीच कमाई के लिए विश्वासियों पर अपना अधिकार जताकर, उन्हें डराकर उन पर नियंत्रण लेते हैं और उनका शोषण करते हैं। 

अभिषेक और पवित्र आत्मा पाना: आत्मिक माता-पिता के कारण अभिषेक और पवित्र आत्मा नहीं मिलता है। 1 कुरिन्थियों 12:3ब के अनुसार बिना पवित्र आत्मा के कोई भी यीशु को प्रभु कहकर अंगीकार नहीं कर सकता है। हमारी देह पवित्र आत्मा का मंदिर है जिसमे पवित्र आत्मा का निवास स्थान है और यह परमेश्वर के द्वारा दिया गया है (1 कुरिन्थियों 6:19)। 1यूहन्ना 2:27 के अनुसार विश्वासियों के पास एक स्थायी अभिषेक है, जो हमें उससे प्राप्त हुआ, जो हमें सब कुछ सिखाएगा। इसका अर्थ यह नहीं है कि कलीसिया में किसी शिक्षक की आवश्यकता नहीं है। इसका अर्थ यह है कि वचन की शिक्षा के सम्बन्ध में हमारी निर्भरता अपनी बुद्धि और समझ पर नहीं वरन परमेश्वर पर होनी चाहिए। हम शिक्षकों का आदर करेंगे, पर हमारी निर्भरता परमेश्वर पवित्र आत्मा पर होगी। सच्चे शिक्षक विश्वासियों का शोषण नहीं करते हैं, उनसे लाभ नहीं उठाते हैं, परन्तु दूसरी ओर अपने आप को आत्मिक माता-पिता कहलाने वाले शिक्षक/अगुवे विश्वासियों का आत्मिक रूप से शोषण करते हैं। 

वचन का दुरूपयोग: ये झूठे शिक्षक अपने आप को सही ठहराने के लिए 1 कुरिन्थियों 4:15-16 का उद्धरण देते हैं जहाँ प्रेरित पौलुस कहते हैं कि भले ही ख्रीष्ट में तुम्हारे असंख्य शिक्षक हैं, फिर भी तुम्हारे अनेक पिता नहीं हैं और सुसमाचार के द्वारा वह (प्रेरित पौलुस) उनका पिता है। वह उन्हें कहता है की वह लोग पौलुस का अनुकरण करें। प्रेरित पौलुस यहाँ पर, यह नहीं कह रहा है कि अब से वह उन लोगों और परमेश्वर के मध्य मध्यस्थ हैं क्योंकि सुसमाचार के द्वारा वह उनका पिता है। वह लोगों को यीशु ख्रीष्ट के अधीन होने के लिए कहता है जैसे वह भी यीशु ख्रीष्ट के अधीन है (1 कुरिन्थियों 11:1)। 

अभिषेक, आशीष और पवित्र आत्मा पाने के लिए आपको किसी आत्मिक माता-पिता की आवश्यकता नहीं है। हमारे स्वर्गीय पिता ने हमें यीशु ख्रीष्ट में सभी आत्मिक आशीषों से आशीषित कर दिया है। प्रत्येक विश्वासी यीशु ख्रीष्ट के साथ एक घनिष्ट, गंभीर और आत्मिक रीति से फलवन्त सम्बन्ध में बढ़ते जाएँ और उसके द्वारा परमेश्वर को महिमा दें। हम किसी आत्मिक माता-पिता को बिचवई न बना लें और यह न सोचें की उनके द्वारा ही अभिषेक, आशीष और पवित्र आत्मा प्राप्त होगा। परमेश्वर हमें झूठी शिक्षा को परखने के लिए और अपने जीवन के लिए सही निर्णय लेने के लिए सहायता करे।


टिप्पणीः बाइबल के अनुसार आत्मिक माता-पिता सम्बन्धी कोई विचारधारा नहीं है। मैं इस वाक्याँश का उपयोग उन लोगों के लिए कर रहा हूँ जो अपने आपको आत्मिक माता-पिता कहलवाते हैं।

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