जो अपने अपराध छिपाता है वह सफल नहीं होगा, परन्तु जो उन्हें मानकर छोड़ देता है उस पर दया की जाएगी। (नीतिवचन 28:13)

प्रभु के एक सेवक जे. आई. पैकर कहते हैं कि “पश्चात्ताप, जैसा कि हम जानते हैं मूल रूप से कराहना और पछताना नहीं है, किन्तु मुड़ना और बदलना है”। परन्तु प्रश्न यह है कि हमें किसकी ओर मुड़ना है या किससे पश्चात्ताप करने की आवश्यकता है? यह लेख इसी प्रश्न का उत्तर देते हुए बताता है कि हमें परमेश्वर से तथा आपस में एक-दूसरे से पश्चात्ताप  करने की आवश्यकता है। आइए हम इस लेख के माध्यम से विचार करें कि हमें क्यों परमेश्वर तथा आपस में एक-दूसरे के सामने पापों से पश्चात्ताप करने की आवश्यकता है? 

सच्चा पश्चात्ताप पवित्र आत्मा के द्वारा यीशु पर विश्वास करने से आता है। इसलिए, यदि अभी तक आपने परमेश्वर के सामने अपने पापों से पश्चात्ताप नहीं किया है तो उसके पास आइए।

1 पश्चात्ताप परमेश्वर से करें

पश्चात्ताप का अर्थ है पापों से मुड़कर परमेश्वर की ओर लौटना (व्यवस्थाविवरण 30:1-2)। दूसरे शब्दों में पश्चात्ताप मन फिराना और विश्वास करना है, क्योंकि बिना इसके उद्धार सम्भव नहीं है। परन्तु एक पापी को किसके सामने पश्चात्ताप करना चाहिए? इसका उत्तर यह है कि वह परमेश्वर के सामने अपने पापों से पश्चात्ताप करे। परमेश्वर के अतिरिक्त और कोई नहीं है जो पापों और अपराधों को क्षमा कर सके (यशायाह 43:25, मत्ती 9:6)। अतः उद्धार पाने के लिए एक पापी को परमेश्वर से पश्चात्ताप करना आवश्यक है जिसमें विश्वास निहित है। यह सच्चा पश्चात्ताप पवित्र आत्मा के द्वारा यीशु पर विश्वास करने से आता है। इसलिए, यदि अभी तक आपने परमेश्वर के सामने अपने पापों से पश्चात्ताप नहीं किया है तो उसके पास आइए। और खोए हुए पुत्र के समान उससे कहिए कि मैंने आपके विरोध में पाप किया है। और वह (परमेश्वर) आपके पाप क्षमा करने तथा आपको गले लगाने के लिए तैयार है (लूका 15:17-24)।

और यदि आप ज्योति पा चुके हैं और स्वर्गिक वरदान का स्वाद चख चुके हैं तथा पवित्र आत्मा के भागी बनाए गए हैं। तो यह मत सोचिए कि अब आपको जीवन में कभी पश्चात्ताप करने की आवश्यकता नहीं है। आर्थर पिंक कहते हैं “जिस ख्रीष्टीय ने पश्चात्ताप करना बन्द कर दिया है, उसने बढ़ना बन्द कर दिया है”। जीवन की इस आत्मिक यात्रा में चलते हुए आप पापों में गिर सकते हैं। संसार और शरीर की अभिलाषाएं आपको इस यात्रा से भटकाएंगी। शैतान आपको अपनी युक्तियों में फंसाने का प्रयास करेगा ताकि आप परमेश्वर के विरोध में पाप करें। और जब आप पापों में गिर जाएं या जीवन के मार्ग से भटक जाएं, तो तुरन्त परमेश्वर से अपने पापों के लिए प्रायश्चित्त करें। यह मत सोचिए कि एक बार पापों से पश्चात्ताप करने के पश्चात आपसे कभी पाप नहीं होंगे। हो सकता है कि आप पतरस के समान यीशु का इनकार न करें। किन्तु यह सम्भव है कि आप यहूदा के समान लालच करें या दाऊद के समान अनैतिकता के पाप में गिर जाएं। और जब आपको पापों से चिताया जाता है तो परमेश्वर से क्षमा मांगे। परमेश्वर की ताड़ना को तुच्छ न जानें परन्तु उससे प्रेरित होकर अपने पापों से पश्चात्ताप करें, क्योंकि यह उसके प्रेम का प्रकटीकरण है जो हमें उद्धार के सीधे मार्ग में चलने में सहायता करता है (प्रकाशितवाक्य 3:19)। और यदि कोई अपने पापों से पश्चात्ताप कर ले तो परमेश्वर उसके पापों को क्षमा करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है (1यूहन्ना 1:9)।

2 पश्चात्ताप आपस में एक-दूसरे से करें

परमेश्वर के साथ ही आपको उससे भी क्षमा प्राप्त करने की आवश्यकता है जिसके विरोध में आपने पाप किया है। स्मरण कीजिए जब खोए हुए पुत्र ने अपने पापों से पश्चात्ताप किया तब उसने अपने पिता से कहा “हे पिता, मैंने स्वर्ग के विरोध में और तेरी दृष्टि में पाप किया है, मैं अब तेरा पुत्र कहलाने के योग्य न रहा ” (लूका 15:21)। उसने यह नहीं कहा कि मैंने केवल स्वर्ग अर्थात परमेश्वर के विरोध में पाप किया है, परन्तु उसने अपने पिता की दृष्टि में किए गए पापों के लिए भी क्षमा मांगी। 

अतः हमें भी अपने पापों का पश्चात्ताप परमेश्वर के साथ साथ उस व्यक्ति से भी करना है जिसके विरोध में हमने पाप किया है। क्योंकि पश्चात्ताप मेल मिलाप कराता है और जब तक आपस में हमारा मेल-मिलाप नहीं होगा तब तक परमेश्वर हमारी आराधना को स्वीकार नहीं करेगा (मत्ती 5:23-24 )। इसीलिए यीशु ख्रीष्ट ने क्रूस पर बैर की दीवार गिराकर हमारा मेल-मिलाप परमेश्वर पिता के साथ ही साथ आपस में एक दूसरे से भी कराया। (इफिसियों 2:14-17)।

इस कारण, अपने विषय में सोचिए कि क्या आप मात्र पापों के कारण कराहते और पछताते हैं? या फिर पापों से पश्चात्ताप करके मेल-मिलाप करने का प्रयास करते हैं। आपस में एक दूसरे के सामने अपने पापों से पश्चात्ताप करना परमेश्वर के सामने किए गए पश्चात्ताप की पुष्टि करता है। क्योंकि परमेश्वर के सामने व्यक्तिगत रीति से पश्चात्ताप करना, लोगों के सामने अपने पापों से पश्चात्ताप करने से सरल है। किन्तु स्मरण रखिए कि हमें सरल मार्ग में चलने के लिए नहीं, परन्तु क्रूस उठाकर यीशु के पीछे चलने के लिए बुलाया गया है। इसलिए परमेश्वर तथा उसके लोगों के सामने अपने पापों से पश्चात्ताप कीजिए भले ही यह करना आपको सबसे कठिन प्रतीत होता हो।