सच्चा ज्ञान महान आनन्द लाता है
<a href="" >जॉन पाइपर द्वारा भक्तिमय अध्ययन</a>

संस्थापक और शिक्षक, desiringGod.org

तब सब लोग . . . महान उत्सव मनाने चले गए, क्योंकि जो बातें उन्हें बताई गईं थी, उन्हें वे समझ गए थे। (नहेमायाह 8:12)

मात्र वही आनन्द परमेश्वर के मूल्य को प्रतिबिम्बित करता है और परमेश्वर को महिमा देने वाले प्रेम से उमड़ता रहता है जिसकी जड़ परमेश्वर के सच्चे ज्ञान में होती है। और जिस सीमा तक हमारा ज्ञान छोटा या त्रुटिपूर्ण है, हमारा आनन्द परमेश्वर की सच्ची सर्वश्रेष्ठता की एक निर्बल प्रतिध्वनि ही होगा।

नहेमायाह 8:12 में इस्राएल का अनुभव एक उदाहरण है कि परमेश्वर को महिमा देने वाला आनन्द हृदय में कैसा होता है। एज्रा ने परमेश्वर के वचन को उनके लिए पढ़ा था और लेवियों ने उसे समझाया था। और फिर लोग एक महान “उत्सव मनाने” चले गए।

उनका महान आनन्द मनाना इसलिए था क्योंकि उन्होंने शब्दों को समझा था —परमेश्वर के सच्चे शब्दों को।

हम में से अधिकाँश लोगों ने हृदय को आनन्द से भरे हुए होने के इस अनुभव को चखा है जब परमेश्वर का वचन हमारे लिए खोला गया था (लूका 24:32)। यीशु ने दो बार कहा कि वह अपने चेलों को उन्हीं के आनन्द के लिए शिक्षा देता था।

  • यूहन्ना 15:11, “ये बातें मैंने तुम से इसलिए कही हैं कि मेरा आनन्द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए।”
  • यूहन्ना 17:13, “ये बातें संसार में कहता हूँ, कि वे अपने में मेरा आनन्द पूरा पाएँ।”

और हम वचन में मुख्य रीति से स्वयं प्रभु को ही देखते हैं — स्वयं परमेश्वर को — जिसने स्वयं को इसलिए दिया है कि लोग उसे जानें और उसका आनन्द उठाएँ। “यहोवा शीलो में पुनः प्रकट हुआ क्योंकि यहोवा ने शीलो में अपने वचन के द्वारा अपने को  शमूएल पर प्रकट किया” (1 शमूएल 3:21)।

बात यह है कि यदि हमारा आनन्द परमेश्वर की महिमा को प्रतिबिम्बित करने वाला होना है, तो उसे इस सच्चे ज्ञान से प्रवाहित होना होगा कि परमेश्वर कितना महिमामय है। यदि हमें परमेश्वर का आनन्द उचित रीति से उठाना है, तो पहले उसे सच्चाई से जानना है।

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