मार्ग तैयार करो

“वह इस्राएल के सन्तानों में से बहुतों को उनके प्रभु परमेश्वर की ओर लौटा ले आएगा। और वह उसके आगे -आगे एलिय्याह की आत्मा और सामर्थ्य में होकर चलेगा, कि पितरों का हृदय बाल -बच्चों की ओर फेर दे, और आज्ञा न मानने वालों को धर्मियों की समझ पर ले आए, जिस से कि वह प्रभु के लिए एक योग्य प्रजा तैयार करे।” (लूका 1:16-17)

यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने जो कार्य इस्राएल के लिए किया था, वही कार्य यह ख्रीष्ट आगमन हमारे लिए कर सकता है। ऐसा न हो कि आप क्रिसमस के समय बिना तैयारी के पाए जाएँ। मेरे कहने का अर्थ है आत्मिक रीति से बिना तैयारी के न पाए जाएँ। यदि आप तैयार हैं तो इसका आनन्द और प्रभाव कहीं अधिक होगा!

इसलिए कि आप तैयार पाए जाएँ . . .

पहला, इस तथ्य पर विचार करें कि हमें एक उद्धारकर्ता की आवश्यकता है। इससे पहले कि क्रिसमस आनन्द का कारण बने यह हम पर दोष लगाता है। “क्योंकि आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिए एक उद्धारकर्ता जन्मा है, और यही ख्रीष्ट प्रभु है” (लूका 2:11)। यदि आपको एक उद्धारकर्ता की आवश्यकता नहीं है तो आपको क्रिसमस की आवश्यकता भी नहीं है। जब तक कि हमें एक उद्धारकर्ता की अत्यधिक आवश्यकता का आभास नहीं हो जाता है तब तक क्रिसमस का हम पर जैसा प्रभाव होना चाहिए वैसा नहीं होगा। ऐसा होने पाए कि ये ख्रीष्ट आगमन के छोटे भक्तिमय अध्ययन आप के भीतर एक उद्धारकर्ता की आवश्यकता की कटु किन्तु मधुर भावना जागृत करने में सहायक हो सकें। 

दूसरा, गम्भीर आत्म-निरीक्षण करें। ख्रीष्ट आगमन का क्रिसमस के लिए वही अर्थ है जो उपवास-काल (लेन्ट-Lent) के दिनों का पुनरुत्थान-पर्व (Easter) के लिए है। “हे परमेश्वर, मुझे जाँचकर, मेरे हृदय को जान ले! / मुझे परख और मेरी चिन्ताओं को जान ले! / और देख कि मुझमें कोई बुरी चाल है कि नहीं! / और अनन्त के मार्ग में मेरी अगुवाई कर!” (भजन 139:23–24)। मन को स्वच्छ करने के द्वारा प्रत्येक हृदय उसके लिए स्थान तैयार करे . . .।

तीसरा, अपने परिवार में—विशेष रूप से बच्चों के लिए परमेश्वर-केन्द्रित अपेक्षा तथा आशा और उत्साह का निर्माण करें। यदि आप ख्रीष्ट के विषय में उत्साहित हैं, तो आपके बच्चे भी उत्साहित होंगे। यदि आप मात्र भौतिक वस्तुओं के द्वारा ही क्रिसमस को रोमांचक बना सकते हैं, तो फिर बच्चों के भीतर परमेश्वर को जानने की इच्छा कैसे जागेगी? बच्चों के भीतर राजा के आगमन के आश्चर्य को रोमांचक बनाने के लिए अपनी कल्पना का पूर्ण उपयोग करें।

चौथा, पवित्रशास्त्र में डूबे रहें, और उसके महान् खण्डों को मुखाग्र करें! “यहोवा कहता है, क्या मेरा वचन आग के समान नहीं?” (यिर्मयाह 23:29)! इस ख्रीष्ट आगमन के अवसर पर इस आग के चारों ओर बैठ जाएँ। क्योंकि यह तो अत्यन्त गर्म है। यह अनुग्रह के रंगों से चमक रही है। यह हज़ारों घावों के लिए चंगाई है। यह अन्धकार पूर्ण रात्रि के लिए उजियाला है।

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जॉन पाइपर
जॉन पाइपर

जॉन पाइपर (@जॉन पाइपर) desiringGod.org के संस्थापक और शिक्षक हैं और बेथलेहम कॉलेज और सेमिनरी के चाँसलर हैं। 33 वर्षों तक, उन्होंने बेथलहम बैपटिस्ट चर्च, मिनियापोलिस, मिनेसोटा में एक पास्टर के रूप में सेवा की। वह 50 से अधिक पुस्तकों के लेखक हैं, जिसमें डिज़ायरिंग गॉड: मेडिटेशन ऑफ ए क्रिश्चियन हेडोनिस्ट और हाल ही में प्रोविडेन्स सम्मिलित हैं।

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