दिन निकलने पर है
<a href="" >जॉन पाइपर द्वारा भक्तिमय अध्ययन</a>

संस्थापक और शिक्षक, desiringGod.org

रात्रि प्रायः बीत चुकी है, दिन निकलने पर है। (रोमियों 13:12)

यह दुख उठा रहे ख्रीष्टियों के लिए आशा का एक वचन है। यह उन ख्रीष्टियों के लिए आशा का एक वचन है जो अपने पाप से घृणा करते हैं और उस समय के लिए लालसा करते हैं जब वे पाप करना बन्द कर देंगे। यह उन ख्रीष्टियों के लिए आशा का एक वचन है जो उस समय के लिए लालसा करते हैं जब अन्तिम शत्रु मृत्यु पराजित किया जाएगा और आग की झील में फेंका जाएगा (प्रकाशितवाक्य 20:14)।

यह उन सब के लिए आशा का एक वचन कैसे है?

“रात्रि” इस अन्धकार के युग को दर्शाती है, जो पाप और कष्ट और मृत्यु से भरा हुआ है। और पौलुस उसके विषय में क्या कहता है? “रात्रि प्रायः बीत चुकी है।” पाप और कष्ट और मृत्यु का युग लगभग व्यय किया गया है। धार्मिकता और शान्ति और सम्पूर्ण आनन्द के दिन का उदय हो रहा है।

आप कह सकते हैं, “2,000 वर्ष तो एक बहुत लम्बे भोर के समान प्रतीत होते हैं।” एक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह ऐसा ही है। और हम पुकारते हैं, कब तक हे प्रभु, कब तक आप इसको ऐसे ही चलते रहने देंगे? परन्तु बाइबलीय सोचने की रीति, “कब तक!” के इस विलाप से आगे बढ़ता है। यह विश्व के इतिहास को भिन्न रीति से देखती है।

मुख्य भिन्नता यह है कि यीशु ख्रीष्ट में “दिन” का  — मसीहा के नए युग का — उदय वास्तव में हो गया है। यीशु इस पतित युग का अन्त है। अर्थात्, एक रीति से इस पतित युग का अन्त अब इस संसार में प्रवेश कर चुका है। यीशु ने पाप और पीड़ा और मृत्यु और शैतान को पराजित कर दिया जब वह मरा और जी उठा। युगों का निर्णायक युद्ध समाप्त हो चुका है। राज्य आ चुका है। अनन्त जीवन आ चुका है।

और जब भोर होता है — जैसे यह यीशु के आगमन के समय हुआ था — किसी को भी दिन के आने के विषय में सन्देह नहीं करना चाहिए। तब भी नहीं जब भोर 2,000 वर्ष से चला आ रहा है। जैसा कि पतरस, 2 पतरस 3:8 में कहता है, “हे प्रियो, यह बात तुमसे छिपी न रहे कि प्रभु की दृष्टि में एक दिन हज़ार वर्ष के बराबर है, और हज़ार वर्ष एक दिन के बराबर।” भोर आ चुका है। दिन आ चुका है। कोई भी बात सूर्य को पूर्ण रीति से उगने से नहीं रोक सकती है।

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