एकमात्र सच्ची स्वतन्त्रता
जॉन पाइपर द्वारा भक्तिमय अध्ययन

जॉन पाइपर द्वारा भक्तिमय अध्ययन

संस्थापक और शिक्षक, desiringGod.org

तब यीशु उन यहूदियों से जिन्होंने उस पर विश्वास किया था, कहने लगा, “यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे, तो सचमुच मेरे चेले ठहरोगे, और तुम सत्य को जानोगे और सत्य तुमको स्वतन्त्र करेगा।” (यूहन्ना 8:31-32)

सच्ची स्वतन्त्रता क्या है? क्या आप स्वतन्त्र हैं?

यदि हमें पूर्ण रीति से स्वतन्त्र होना है तो इन चार बातों का सत्य होना आवश्यक है ।

  1. यदि आपके भीतर किसी कार्य को करने के लिए इच्छा नहीं है, तो आप उसे करने के लिए पूर्ण रीति से स्वतन्त्र नहीं है। हाँ, ऐसा हो सकता है कि आप अपनी इच्छा शक्ति को उपयोग करके किसी कार्य को करने का साहस जुटा भी लें, किन्तु कोई भी उसे पूर्ण स्वतन्त्रता नहीं कहता है। हम इस रीति से नहीं जीना चाहते हैं। इसमें एक बाध्यता तथा दबाव है जिसे हम नहीं चाहते हैं।
  2. और यदि आपके भीतर किसी कार्य को करने की इच्छा है, किन्तु उसे करने की क्षमता नहीं है, तो आप उस कार्य को करने के लिए स्वतन्त्र नहीं हैं।
  3. और यदि आपके भीतर किसी कार्य को करने की इच्छा है और क्षमता भी, किन्तु उसे करने का कोई अवसर नहीं है, तब भी आप इसे करने के लिए स्वतन्त्र नहीं हैं।
  4. और यदि आपके भीतर किसी कार्य को करने की इच्छा है, और उसे करने की क्षमता है, और उसे करने का अवसर भी है, किन्तु अन्ततः यह कार्य आपको ही नष्ट कर देता है, तो आप इसे करते समय पूर्णतः स्वतन्त्र नहीं होते हैं — वास्तव में स्वतन्त्र नहीं होते हैं।

पूर्ण रीति से स्वतन्त्र होने के लिए, हमारे पास अवश्य ही उस कार्य को करने के लिए इच्छा, क्षमता, और अवसर होना चाहिए जो हमें सदाकाल के लिए आनन्दित करे। बिना किसी पछतावे के। और केवल यीशु ही, जो परमेश्वर का पुत्र है जो हमारे लिए मरा और फिर जी उठा, वही इसे सम्भव कर सकता है।

यदि पुत्र तुम्हें स्वतन्त्र करे तो तुम सचमुच स्वतन्त्र हो जाओगे (यूहन्ना 8ः36)।