सुसमाचार प्रचार-प्रसार कार्य की महान् आशा

सुसमाचार प्रचार-प्रसार कार्य की महान् आशा यह है कि जब सुसमाचार का प्रचार पवित्र आत्मा की सामर्थ्य के द्वारा होता है, तो स्वयं परमेश्वर वह कार्य करता है जिसे मनुष्य नहीं कर सकता है: वह बचाने वाले विश्वास को उत्पन्न करता है। परमेश्वर की बुलाहट वह कार्य करती है जिसे मनुष्य की बुलाहट नहीं कर सकती है। यह मृतकों को जिलाती है। यह कब्र में लाज़र के लिए यीशु की बुलाहट के समान है, “निकल आ!” और मृतक व्यक्ति ने आज्ञा मानी और वह बाहर निकल आया। उस बुलाहट ने जीवन को उत्पन्न करने के द्वारा आज्ञाकारिता को उत्पन्न किया (यूहन्ना 11:43)। कोई भी व्यक्ति इसी रीति से बचाया जाता है।

हम अपनी बुलाहट के द्वारा किसी सोते हुए व्यक्ति को जगा सकते हैं, परन्तु परमेश्वर की बुलाहट उन वस्तुओं को अस्तित्व में ला सकती है जो हैं ही नहीं (रोमियों 4:17)। परमेश्वर की बुलाहट इस अर्थ में अप्रतिरोध्य (irresistible) है कि यह किसी भी प्रतिरोध पर प्रबल हो सकती है। यह तो परमेश्वर के उद्देश्य के अनुसार अचूक रीति से प्रभावशाली है — इतना अधिक कि पौलुस कह सकता है, “जिन्हें बुलाया, उन्हें धर्मी भी ठहराया” (रोमियों 8:30), यद्यपि हम अपने विश्वास  के द्वारा ही धर्मी ठहराए जाते हैं।

दूसरे शब्दों में, परमेश्वर की बुलाहट इतनी प्रभालशाली है कि यह अचूक (infallibly) रीति से उस विश्वास को उत्पन्न करती है जिसके द्वारा व्यक्ति धर्मी ठहराया जाता है। रोमियों 8:30 के अनुसार सब  बुलाए गए लोग धर्मी ठहराए जाते हैं। परन्तु कोई भी विश्वास के बिना नहीं धर्मी ठहराया जाता है (रोमियों 5:1)। इसलिए परमेश्वर की बुलाहट अपने इच्छित प्रभाव में विफल नहीं हो सकती है। यह प्रबल रीति से उस विश्वास को लाती है जो धर्मी ठहराता है।

इस कार्य को मनुष्य नहीं कर सकता है। यह असम्भव है। केवल परमेश्वर ही पत्थर के हृदय को बाहर निकाल सकता है (यहेजकेल 36:26)। केवल परमेश्वर ही लोगों को पुत्र की ओर खींच सकता है (यूहन्ना 6:44-65)। केवल परमेश्वर ही आत्मिक रीति से मरे हुए हृदय को इस रीति से खोल सकता है कि वह सुसमाचार को माने (प्रेरितों के काम 16:14)। केवल अच्छा चरवाहा ही अपनी भेड़ों को जानता है, और वह ऐसी प्रभावशाली सामर्थ्य से उन्हें नाम लेकर बुलाता है कि वे पीछे आती हैं — और वे नाश नहीं होंगी (यूहन्ना 10:3-4, 14)।

परमेश्वर का सम्प्रभु अनुग्रह ही सुसमाचार प्रचार-प्रसार कार्य की महान् आशा है, जो यीशु ख्रीष्ट के सुसमाचार के द्वारा उस कार्य को करता है जो मानवीय रीति से असम्भव है।

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जॉन पाइपर
जॉन पाइपर

जॉन पाइपर (@जॉन पाइपर) desiringGod.org के संस्थापक और शिक्षक हैं और बेथलेहम कॉलेज और सेमिनरी के चाँसलर हैं। 33 वर्षों तक, उन्होंने बेथलहम बैपटिस्ट चर्च, मिनियापोलिस, मिनेसोटा में एक पास्टर के रूप में सेवा की। वह 50 से अधिक पुस्तकों के लेखक हैं, जिसमें डिज़ायरिंग गॉड: मेडिटेशन ऑफ ए क्रिश्चियन हेडोनिस्ट और हाल ही में प्रोविडेन्स सम्मिलित हैं।

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