परमेश्वर आपको कितना अधिक आशीषित करना चाहता है

“परमेश्वर यहोवा तेरी भलाई करने में पुनः आनन्दित होगा।” (व्यवस्थाविवरण 30:9)

परमेश्वर हमें न चाहते हुए आशीषित नहीं करता है। परमेश्वर के उपकार में एक प्रकार की उत्सुकता है। वह प्रतीक्षा नहीं करता कि हम उसके पास आएँ। वह हमें ढूँढ़ता है क्योंकि हमारा भला करना उसको भाता है। परमेश्वर हमारी प्रतीक्षा नहीं कर रहा है; वह तो हमें खोज रहा है। यही तो वास्तव में भजन 23:6 का शाब्दिक अनुवाद है, “निश्चिय भलाई और करुणा जीवन भर मुझे खोजती रहेंगी।”

परमेश्वर को दया दिखाना भाता  है। मैं पुनः इसे दोहराऊँगा। परमेश्वर को दया दिखाना भाता है। वह अपने लोगों का भला करने की अपनी इच्छा में संकोची या अनिर्णायक या अस्थायी नहीं है। उसका क्रोध एक ऐसी बन्दूक के समान है जिसको चलाना बहुत कठिन है परन्तु उसकी दया एक ऐसी बन्दूक के समान है जो बहुत ही सरलता से चलती है। उसका यही अर्थ था जब उसने सीनै पर्वत पर नीचे उतरकर मूसा से कहा, “यहोवा, यहोवा परमेश्वर, दयालु और अनुग्रहकारी, कोप करने में धीमा, और करुणा तथा सत्य से भरपूर” है (निर्गमन 34:6)। उसका यही अर्थ था जब उसने यिर्मयाह 9:24 में कहा, “मैं ही वह यहोवा हूँ जो पृथ्वी पर करुणा, न्याय और धार्मिकता के कार्य करता हूँ, क्योंकि मैं  इन बातों से प्रसन्न होता हूँ।”

परमेश्वर कभी चिड़चिड़ा या शीघ्रकोपी नहीं होता है। उसको विलम्ब से क्रोध आता है। वरन् वह तो अपने आनन्द की पूर्ति के लिए पूरी रीति से असीम और अन्तहीन उत्साह के साथ असीम रूप से ऊर्जावान है।

यह समझना हमारे लिए कठिन है क्योंकि हमें हर दिन केवल बने रहने के लिए भी नींद की आवश्यकता है, उन्नति की तो बात ही मत करिए। हमारी भावनाएँ ऊपर और नीचे होती रहती हैं। एक दिन तो हम ऊब जाते हैं और निराश हो जाते हैं और दूसरे दिन आशान्वित और उत्साहित होने का अनुभव करते हैं।

हम एक ऐसे छोटे झरने के समान हैं जो गड़गड़ाता तो है, परन्तु जिसमें से पानी अनियमित रीति से बहता है। परन्तु परमेश्वर महान् नियाग्रा फॉल्स के समान है — जहाँ आप हर मिनट 186,000 टन पानी को चट्टान पर टकराते हुए देखते हैं और सोचते हैं: ऐसा तो सर्वदा नहीं होता रह सकता है। फिर भी ऐसा ही होता है।

परमेश्वर इसी प्रकार से हमारे साथ भलाई करता है। वह इससे कभी भी थकता नहीं है। यह उसके लिए कभी उबाऊ नहीं होता है। उसके अनुग्रह के नियाग्रा फॉल्स का कोई अन्त नहीं है।

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जॉन पाइपर
जॉन पाइपर

जॉन पाइपर (@जॉन पाइपर) desiringGod.org के संस्थापक और शिक्षक हैं और बेथलेहम कॉलेज और सेमिनरी के चाँसलर हैं। 33 वर्षों तक, उन्होंने बेथलहम बैपटिस्ट चर्च, मिनियापोलिस, मिनेसोटा में एक पास्टर के रूप में सेवा की। वह 50 से अधिक पुस्तकों के लेखक हैं, जिसमें डिज़ायरिंग गॉड: मेडिटेशन ऑफ ए क्रिश्चियन हेडोनिस्ट और हाल ही में प्रोविडेन्स सम्मिलित हैं।

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